11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र शुरू होंगे, जो 20 अक्टूबर तक चलेंगे। इस बार नवरात्र पूरे नौ दिन के रहेंगे और किसी भी तिथि का क्षय नहीं होगा। रविवार को चित्रा नक्षत्र में नवरात्र की शुरुआत होगी। श्रीमद् देवी भागवत के अनुसार रविवार को नवरात्र शुरू होने पर माता का वाहन हाथी होता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार हाथी पर माता के आगमन को सुख-समृद्धि और आर्थिक प्रगति का संकेत माना जाता है। नवरात्र के दौरान एक अमृत सिद्धि योग, दो सर्वार्थ सिद्धि योग और दो रवि योग भी बनेंगे। हाथी पर माता का आगमन, सुख-समृद्धि का संकेत आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्र का आरंभ होगा। इस बार रविवार के दिन चित्रा नक्षत्र में घटस्थापना होगी। श्रीमद् देवी भागवत के अनुसार रविवार को नवरात्र शुरू होने पर देवी का वाहन हाथी माना जाता है। मान्यता है कि हाथी पर माता का आगमन सुख-समृद्धि, आर्थिक प्रगति और सकारात्मक बदलाव का संकेत देता है। पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार इस बार माता के हाथी पर आने को आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वित्तीय व्यवस्था, अर्थव्यवस्था और न्याय व्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों में समय के साथ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। एक फ्रेम में एमपी के प्रमुख मंदिर… नवरात्र में एक अमृत, दो सर्वार्थ सिद्धि और दो रवि योग पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार इस बार नवरात्र में कई शुभ योग बन रहे हैं। धर्मशास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार इन योगों में किए गए शुभ कार्यों का महत्व बढ़ जाता है। इन योगों में साधना-उपासना के साथ भूमि, भवन, संपत्ति और वाहन की खरीदी जैसे शुभ कार्य किए जा सकते हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग में खरीदारी और नए काम शुभ सर्वार्थ सिद्धि योग को सभी कार्यों को सिद्ध करने वाला समय माना जाता है। मान्यता के अनुसार इस योग में नया व्यापार, नौकरी, प्रोजेक्ट या अन्य शुभ कार्य शुरू करना लाभकारी होता है। भूमि, मकान, वाहन, सोने-चांदी के आभूषण और इलेक्ट्रॉनिक सामान की खरीद के लिए भी इसे शुभ माना गया है। अमृत सिद्धि योग में डील और नए काम के लिए शुभ समय अमृत सिद्धि योग में किए गए कार्यों का फल शुभ रहने की मान्यता है। इस दौरान बड़ी डील, नए बिजनेस कॉन्ट्रैक्ट, नौकरी से जुड़े प्रयास और आजीविका के लिए यात्राएं करना लाभकारी माना जाता है। अष्टमी दो दिन, 18 और 19 अक्टूबर को पूजन इस बार अष्टमी तिथि को लेकर दो दिन का संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8:27 बजे शुरू होकर 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे तक रहेगी। पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार जिन घरों में रात में पूजन की परंपरा है, वे 18 अक्टूबर की शाम 3 से 5 बजे के बीच पारंपरिक पूजन कर सकते हैं। वहीं सुबह पूजन करने वाले श्रद्धालु 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे से पहले अष्टमी पूजन कर सकते हैं। कन्या पूजन का समय अष्टमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे तक रहेगी। इसलिए कन्या पूजन के लिए 19 अक्टूबर को सूर्योदय से सुबह 10:51 बजे तक का समय रखा जा सकता है। 10:51 के बाद अभिजीत मुहूर्त में कन्या भोज यदि सुबह 10:51 बजे तक कन्या पूजन संभव नहीं हो तो अभिजीत मुहूर्त में कन्या भोज कराया जा सकता है। 19 अक्टूबर को दोपहर 11:43 बजे से 12:30 बजे तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा। इस समय नवमी तिथि शुरू हो चुकी होगी, लेकिन शास्त्रीय मान्यता के अनुसार अभिजीत मुहूर्त को सर्वसिद्ध माना जाता है। नवमी 19 की दोपहर से, 20 अक्टूबर को दशहरा नवमी तिथि 19 अक्टूबर को करीब दोपहर 12 बजे शुरू होगी और 20 अक्टूबर को सुबह करीब 10 बजे तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि शुरू होगी। इसलिए इस बार 20 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा। नवरात्र में तंत्र साधना का भी विशेष महत्व उज्जैन को तंत्र साधना की भूमि माना जाता है। पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार यहां की जाने वाली साधना, विशेषकर वैदिक साधना, का अपना विशेष महत्व है। कुल परंपरा या गुरु परंपरा के अनुसार की जाने वाली साधना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति की मान्यता है। ये खबर भी पढ़ें… गुप्त नवरात्र- उज्जैन-दतिया में जुटेंगे तांत्रिक आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से बुधवार, 15 जुलाई से गुप्त नवरात्र की शुरुआत हो गई। इस बार गुप्त नवरात्र पुष्य नक्षत्र, हर्षल योग और कर्क राशि के चंद्रमा की साक्षी में बन रहे गजकेसरी योग में प्रारंभ हो रहे हैं, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। मध्यप्रदेश के उज्जैन, नलखेड़ा और दतिया में 9 दिनों तक तांत्रिक साधकों का विशेष जमावड़ा रहेगा।पूरी खबर पढ़ें
