उज्जैन में मॉडलिंग से संन्यास लेने वाली हर्षा रिछारिया के मामले में विवाद गहराता जा रहा है। मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिलानंद ने कड़े शब्दों में कहा कि यह पूरा घटनाक्रम गलत है और संन्यास की गरिमा को ठेस पहुंचाता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, 900 चूहे खाकर बिल्ली हज को नहीं जा सकती” और इसे सनातन परंपरा के खिलाफ बताया। संतों का कहना है कि यह संन्यास परंपरा और सनातन धर्म की मर्यादा के विपरीत है। मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिलानंद ने कहा कि हर्षा रिछारिया पहले भी धार्मिक आयोजनों को लेकर विवादित बयान दे चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रयागराज कुंभ के दौरान उन्होंने संन्यास लेने का दावा किया, लेकिन बाद में सनातन धर्म के खिलाफ अपमानजनक बातें कहीं। उनके मुताबिक, ऐसे व्यक्ति का संन्यास लेना स्वीकार्य नहीं है। प्रयागराज कुंभ में भी किया था भ्रमित
महाराज अनिलानंद ने कहा कि हर्षा रिछारिया पहले भी धार्मिक आयोजनों को लेकर विवादित रुख अपना चुकी हैं। उनके अनुसार, प्रयागराज कुंभ के दौरान उन्होंने खुद को संन्यासी बताया, लेकिन बाद में सनातन धर्म के खिलाफ अपमानजनक बातें कहीं। उन्होंने कहा कि ऐसे आचरण वाले व्यक्ति का संन्यास लेना संदेह पैदा करता है। यह संन्यास नहीं, परंपरा का अपमान
उन्होंने कहा कि संन्यास एक पवित्र और अनुशासित परंपरा है, जिसे कोई भी व्यक्ति अचानक नहीं अपना सकता। “जो लोग पहले अलग जीवन जीते रहे, वे अचानक संन्यास लेकर सम्मान की अपेक्षा नहीं कर सकते। यह हमारे सनातन धर्म के लिए घोर अपमान की बात है। 900 चूहे खाकर बिल्ली हज को नहीं जा सकती
महाराज अनिलानंद ने कड़े शब्दों में कहा कि यह पूरा घटनाक्रम गलत है और संन्यास की गरिमा को ठेस पहुंचाता है। उन्होंने कहा, 900 चूहे खाकर बिल्ली हज को नहीं जा सकती। जो लोग पहले अलग जीवन जीते रहे, वे अचानक संन्यास लेकर सम्मान की अपेक्षा नहीं कर सकते। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या ऐसे लोगों को सनातन समाज स्वीकार करेगा। अखाड़ा परिषद से कार्रवाई की मांग
संत समिति ने अखाड़ा परिषद से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। अनिलानंद ने कहा कि जो लोग सनातन धर्म को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने संन्यास दिलाने वालों की भूमिका पर भी सवाल उठाए और जांच की मांग की। संन्यास की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
संत समिति के अध्यक्ष ने कहा कि संन्यास एक गहन और दीर्घकालिक प्रक्रिया है, जिसे बचपन से साधना और अनुशासन के साथ अपनाया जाता है। उनके अनुसार, संन्यास लेने वाले को वर्षों तक कठोर नियमों का पालन करना पड़ता है। ऐसे में अचानक संन्यास लेने को उन्होंने परंपरा के विपरीत बताया। सरकार का भी लिया हवाला
अनिलानंद ने चेतावनी देते हुए कहा कि उज्जैन में आगामी धार्मिक आयोजनों के मद्देनजर इस तरह के मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि यदि सनातन परंपरा से छेड़छाड़ की गई, तो कड़ी कार्रवाई हो सकती है। संन्यास के बाद क्या बोलीं स्वामी हर्षानंद गिरि
वहीं, संन्यास लेने के बाद स्वामी हर्षानंद गिरि ने इसे अपने जीवन का नया अध्याय बताया था। उन्होंने कहा था कि गुरुदेव के मार्गदर्शन में उन्होंने आध्यात्मिक जीवन का मार्ग चुना है और आगे धर्म, संस्कृति और समाज की सेवा के लिए समर्पित रहेंगी। कैसे सुर्खियों में आईं हर्षा?
4 जनवरी, 2025 को महाकुंभ के लिए निरंजनी अखाड़े की पेशवाई निकली थी। उस वक्त 30 साल की मॉडल हर्षा रिछारिया संतों के साथ रथ पर बैठी नजर आई थीं। पेशवाई के दौरान हर्षा रिछारिया से पत्रकारों ने साध्वी बनने पर सवाल किया था। इस पर हर्षा ने बताया था कि मैंने सुकून की तलाश में यह जीवन चुना है। मैंने वह सब छोड़ दिया, जो मुझे आकर्षित करता था। इसके बाद हर्षा सुर्खियों में आ गईं। वह ट्रोलर्स के भी निशाने पर हैं। मीडिया चैनल ने उन्हें ‘सुंदर साध्वी’ का नाम भी दे दिया। इसके बाद हर्षा फिर से मीडिया के सामने आईं। कहा- मैं साध्वी नहीं हूं। मैं केवल दीक्षा ग्रहण कर रही हूं। पिता बस कंडक्टर, मां बुटिक चलाती हैं
रिछारिया का परिवार मूलत: उत्तर प्रदेश के झांसी का रहने वाला है। उनके पिता दिनेश बस कंडक्टर और मां किरण रिछारिया बुटिक चलाती हैं। एक भाई कपिल है जो प्राइवेट जॉब करता है। पूरा परिवार भोपाल में रहता है। अध्यात्म से पहले स्टेज एंकर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रही हैं। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर उनके अच्छे फॉलोअर्स हैं, सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार से जुड़े वीडियो बनाती हैं। ग्रेजुएट हैं और अहमदाबाद से योग स्पेशल कोर्स कर रखा है। वह निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज की शिष्या हैं। ये खबर भी पढ़ें… प्रयागराज महाकुंभ की वायरल साध्वी ने संन्यास लिया प्रयागराज महाकुंभ में साध्वी के रूप में चर्चा में आईं मॉडल हर्षा रिछारिया एक बार फिर धर्म की राह अपना ली है। अक्षय तृतीया पर संन्यास ले लिया। उन्हें उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में पंचायती निरंजनी अखाड़ा के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि महाराज ने संन्यास दीक्षा दी। पढ़ें पूरी खबर
