सरकारी खरीदी केंद्रों पर तकनीक और नियमों को ताक पर रख सर्वेयरों की ‘नजर’ ही अंतिम फैसला बन गई है। चने की खरीदी किसी लैब टेस्ट से नहीं बल्कि सर्वेयरों की आंखों के इशारे से तय हो रही है। हैरत की बात यह है कि जिस उपज को सर्वेयर एक दिन पहले ‘घटिया’ बताकर रिजेक्ट कर देते हैं, वही माल शिकायत के बाद अगले ही दिन ‘ए-वन’ क्वालिटी का मानकर पास कर दिया जाता है। संसाधनों के अभाव और कमीशनखोरी के आरोपों के बीच अन्नदाता यहां मशीनों से नहीं, बल्कि सर्वेयरों की मनमानी से हार रहा है। जिले में करीब 15 हजार किसानों ने पंजीयन कराया लेकिन अब तक केवल 405 ही उपज बेच पाए हैं। भास्कर इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि सर्वेयरों को न पर्याप्त संसाधन दिए गए हैं और न ही जरूरी ट्रेनिंग या स्पष्ट दिशा-निर्देश मिले हैं। इसी वजह से वे मनमाने तरीके से निर्णय ले रहे हैं। हालात ये हैं कि वेयरहाउस तक पहुंचा हुआ माल भी बिना ठोस कारण के रिजेक्ट हो रहा है। इसके चलते 22 अप्रैल को लदूना केंद्र पर एक दाना भी नहीं खरीदा गया। बुधवार शाम व गुरुवार को जिला पंचायत अध्यक्ष दुर्गा पाटीदार ने भी कई जगह निरीक्षण किया। जांच के दौरान सर्वेयरों से कहा गया कि एफएक्यू मापने के लिए क्या है, तो वह मॉइस्चर मीटर लेकर आ गए। जिला पंचायत अध्यक्ष ने गुरुवार को डीएमओ गरिमा सेंगर से भी चर्चा कर किसानों की समस्या के निराकरण के निर्देश दिए। अधिकारियों का कहना है कि हरे चने नहीं लिए जाएंगे जबकि एफएक्यू में स्पष्ट लिखा है कि इस तरह के केस में 4 फीसदी की छूट है। सीधे वेयर हाउस पर माल रिजेक्ट किया जा रहा जानकारी के अनुसार पहले मार्कफेड के सर्वेयर हर जगह होते थे, जो माल की चेकिंग करते थे और यहीं से रिजेक्ट या एक्सेप्ट होता था। तब भी रुपए मांगकर पास करने के आरोप लगते थे। अब इनको एमपीडब्ल्यूसीएल के वेयरहाउस पर बैठाया गया है। बताया जा रहा है कि अब सीधे वेयरहाउस पर माल रिजेक्ट किया जा रहा है। इसके उदाहरण भी सामने आए हैं। 21 अप्रैल को लदूना से भेजे गए कई बैग रिजेक्ट हो गए। इस चक्कर में सोसायटियों ने भी माल खरीदना बंद कर दिया। 10 तरह के बहाने भी शुरू किए। सरकार के बड़े-बड़े दावों के बीच किसान परेशान हो रहे हैं जबकि जो माल रिजेक्ट किया जा रहा है वह रिजेक्ट करने जैसा नहीं है। खरीदी केंद्र के नोडल अधिकारी बीए विश्नोई ने बताया कि मामला संज्ञान में आते ही तत्काल निराकरण कराया है। किसानों कीआपबीती: फेल करने के बाद पास किया तब तक निकल गई तारीख किसान मदन बैरागी ने भास्कर को बताया कि 22 अप्रैल को मैं अपना चना लेकर लदूना केंद्र पर पहुंचा था। मेरी उपज को सिर्फ ऊपर-ऊपर से देखकर ही रिजेक्ट कर दिया। मैंने इसका विरोध किया। मौके पर डॉ. विजय पाटीदार भी पहुंचे थे। देर रात तक हमने अधिकारियों व कर्मचारियों से जानकारी ली। जो माल एक दिन पहले रिजेक्ट किया था, वह अगले दिन पास कर दिया। लेकिन 22 तारीख आखिरी थी तो मेरा स्लॉट एक्सपायर हो गया। हालांकि जिला पंचायत अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद समस्या का समाधान हो गया। दीपाखेड़ा व बेलारा के किसान के साथ भी यही हुआ।
