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स्कूल खुलने से पहले 8 बच्चों को टीसी का नोटिस:भोपाल में भीषण गर्मी में स्कूल बुलाने पर उठाए थे सवाल; समझौता बैठक छोड़ गए प्रिंसिपल

भोपाल के ईस्टर्न पब्लिक स्कूल (EPS) और अभिभावकों के बीच चल रहे विवाद के समाधान के लिए बीआरसीसी कार्यालय में दोनों पक्षों की बैठक बुलाई गई। बैठक में स्कूल के प्रिंसिपल डॉ. फराज अहमद पहुंचे, लेकिन कुछ मिनट रुकने के बाद बिना कोई चर्चा किए बीच बैठक से ही चले गए। जांच अधिकारी बीआरसीसी अमित श्रीवास्तव ने अभिभावकों को आश्वासन दिया कि पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार कर जिला शिक्षा अधिकारी को भेजी जाएगी और सोमवार को आगे की कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, अप्रैल-मई की भीषण गर्मी के दौरान स्कूल संचालन को लेकर विवाद शुरू हुआ था। अभिभावकों का आरोप है कि कलेक्टर के आदेश के बावजूद 45 डिग्री की गर्मी में भी स्कूल में आईबी असेसमेंट और दूसरे कामों के लिए बच्चों को बुलाया जा रहा था। इसे लेकर जब अभिभावकों ने व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई थी, तो स्कूल प्रबंधन ने उनके 8 बच्चों का प्रवेश समाप्त कर दिया था। बीच बैठक से उठकर चले गए प्रिंसिपल फराज
सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के निराकरण के लिए बीआरसीसी कार्यालय में आयोजित बैठक से स्कूल प्रबंधन की ओर से पहुंचे प्रिंसिपल डॉ. फराज अहमद बिना चर्चा किए चले गए। अभिभावकों का कहना है कि वे पिछले डेढ़ महीने से अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं और उम्मीद थी कि इस बैठक में कोई ठोस निर्णय निकलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उनका आरोप है कि स्कूल प्रबंधन लगातार बातचीत से बच रहा है और बच्चों के भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रहा। स्कूल सहयोग नहीं कर रहा
बैठक के बाद जांच अधिकारी ने बताया कि प्रशासन इस मामले का समाधान निकालने की लगातार कोशिश कर रहा है, लेकिन स्कूल प्रबंधन की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। मामले में स्कूल प्रबंधन ने जो लिखित स्पष्टीकरण प्रशासन को सौंपा है, उसमें कहा है कि कलेक्टर द्वारा स्कूल बंद करने संबंधी आदेश जारी होने के बाद स्कूल ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर आईबी बोर्ड की परीक्षाएं और मूल्यांकन कराने के लिए अनुमति मांगी थी। स्कूल का तर्क है कि परीक्षाएं पहले से निर्धारित थीं और उन्हें स्थगित करने से छात्रों का शैक्षणिक नुकसान होता। हालांकि अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल ने अनुमति मिलने का इंतजार नहीं किया और प्रशासन से स्पष्ट मंजूरी प्राप्त किए बिना ही स्कूल चलाता रहा। स्कूल खुलने से 3 दिन पहले आया टीसी का मैसेज प्रभावित अभिभावकों का कहना है कि स्कूल की ओर से उन्हें मैसेज मिला कि उनके बच्चों की ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) तैयार है और उसे प्राप्त कर लिया जाए। यह संदेश ऐसे समय भेजा गया जब सोमवार से स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने जा रहा है। अब हम अपने बच्चों को कहां लेकर जाएं? हमने पूरी फीस जमा कर दी है। इससे पहले भी स्कूल कई बच्चों का प्रवेश समाप्त कर चुका है।
दोहरा रवैया अपना रहा स्कूल प्रशासन अभिभावक सबीन खान ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन दोहरा रवैया अपना रहा है। एक ओर अभिभावकों को व्यक्तिगत मैसेज भेजकर कहा जा रहा है कि बच्चों की टीसी तैयार है, वहीं दूसरी ओर सीएम हेल्पलाइन की सुनवाई में कहा जा रहा है कि टीसी जारी नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि 15 मई को ही बच्चों का प्रवेश समाप्त करने का संदेश मिला था, लेकिन अब जून तक की फीस जमा करने के बाद टीसी लेने के लिए कहा जा रहा है। जब बच्चों को स्कूल से निकाल दिया गया है तो फीस क्यों मांगी जा रही है और यदि स्कूल में रखना है तो फिर टीसी का संदेश क्यों भेजा जा रहा है। अभिभावकों का आरोप- स्कूल कोई नियम नहीं मानता अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन लगातार प्रवेश फॉर्म, पेरेंट कोड ऑफ कंडक्ट और अन्य दस्तावेजों में लिखे नियमों का हवाला देकर कार्रवाई को सही ठहराने की कोशिश कर रहा है। लेकिन जब बात प्रशासनिक आदेशों और सरकारी निर्देशों की आती है तो वही स्कूल उनका पालन नहीं करता। उन्होंने कहा कि बच्चों पर इसका मानसिक असर पड़ रहा है और अभिभावक लगातार असमंजस में हैं। हम सिर्फ यह जानना चाहते हैं कि हमारे बच्चों का भविष्य क्या होगा। यदि स्कूल हमें निकाल चुका है तो इसकी स्पष्ट जानकारी दे और यदि नहीं निकाला है तो बच्चों को पढ़ाई जारी रखने दे।
मीडिया के पास गए तो हमें ‘मीडिया टेररिज्म’ कह दिया
अभिभावकों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई में समय लगने के कारण उन्होंने अपनी बात सार्वजनिक करने और मीडिया तक पहुंचाने का फैसला किया। उनका आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने पहले ही अपने संदेशों में ‘मीडिया टेररिज्म’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि वह किसी से डरता नहीं है। रुबिका ने बताया कि इससे पहले भी हमारे बच्चों के सामने उन्होंने हमारे लिए गलत शब्द बोले थे। स्कूल प्रबंधन की ओर से हमें बुरे लोग, ईविल फोक्स और पीठ में छुरा घोंपने वाले कहा गया था। जानिए, क्या है पूरा मामला? विवाद की शुरुआत अप्रैल 2026 में हुई, जब भोपाल में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया था। जिला प्रशासन ने स्कूलों के संचालन समय में बदलाव और छोटे बच्चों के लिए छुट्टियों के निर्देश जारी किए थे। अभिभावकों का आरोप है कि इसके बावजूद ईस्टर्न पब्लिक स्कूल ने आईबी असेसमेंट और अन्य गतिविधियों के लिए बच्चों को बुलाना जारी रखा। इसी दौरान कुछ अभिभावकों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चर्चा के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाया। स्कूल प्रबंधन का आरोप है कि इस ग्रुप के माध्यम से संस्थान के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा था। बाद में कई अभिभावकों को स्पष्टीकरण के लिए बुलाया गया और कुछ दिनों बाद 8 बच्चों का प्रवेश समाप्त कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों ने कलेक्टर जनसुनवाई, जिला शिक्षा अधिकारी, सीएम हेल्पलाइन और अन्य मंचों पर शिकायत दर्ज कराई। मामला सार्वजनिक होने के बाद स्कूल और अभिभावकों के बीच विवाद लगातार बढ़ता गया। कब-क्या हुआ मामले से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें.. गर्मी में स्कूल बुलाया, सवाल पूछे तो 10 बच्चों को निकाला भोपाल में 10 स्टूडेंट्स को प्राइवेट स्कूल से निकाल दिया गया। कसूर सिर्फ इतना था कि उनके पेरेंट्स ने वॉट्सऐप ग्रुप बनाकर कलेक्टर के उस आदेश का जिक्र किया था, जिसमें भीषण गर्मी के चलते छोटी क्लासेस की छुट्टी घोषित की गई थी और बड़ी क्लासेस का समय बदला गया था। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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