सेंधवा ब्लॉक के मोरदड़ गांव के 26 वर्षीय दिव्यांग क्रिकेटर लोकेंद्र आर्य का चयन दिव्यांग क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ऑफ इंडिया (DCCBI) की इंडिया-ए टीम में हुआ है। वे 13 से 15 जून तक हरियाणा के यमुनानगर में आयोजित केसरी दिव्यांग टूर्नामेंट-2026 में इंडिया-ए की ओर से मैदान में उतरेंगे। बाएं पैर से दिव्यांग और दाएं हाथ के बल्लेबाज लोकेंद्र वर्तमान में दिव्यांग क्रिकेट एसोसिएशन मध्यप्रदेश की सतपुड़ा डिवीजन (ग्रामीण) टीम के कप्तान हैं। बचपन में लोगों ने उनके पैरों की कमजोरी को लेकर ताने दिए थे और क्रिकेट खेलने पर हंसी उड़ाते थे, लेकिन उन्होंने इन बातों को अपनी ताकत बनाया। विकलांग आश्रम में छोड़ आए थे पिता लोकेंद्र बताते हैं कि पोलियो से प्रभावित होने के कारण उनका बचपन आसान नहीं था। वर्ष 2006 में उनके पिता उन्हें झाकर स्थित पद्मश्री कांता विकलांग सेवा ट्रस्ट आश्रम में छोड़ गए थे। उन्होंने लगातार 12 साल आश्रम में रहकर पढ़ाई की। इसी दौरान दिव्यांग साथियों के साथ क्रिकेट खेलते-खेलते उनके भीतर इस खेल के प्रति जुनून पैदा हुआ। आश्रम से बाहर निकलने के बाद भी क्रिकेट के प्रति उनका लगाव बना रहा। 2021 में मिला पहला मौका वर्ष 2021 में उन्हें दिव्यांग क्रिकेट से जुड़ी जानकारी मिली। इसके बाद उनकी मुलाकात ब्रजेश द्विवेदी से हुई, जिसने उनके क्रिकेट करियर को नई दिशा दी। उन्हें और उनके साथियों को दिव्यांग क्रिकेट एसोसिएशन मध्यप्रदेश में अवसर मिला और सतपुड़ा डिवीजन की टीम का गठन हुआ। गांव में लोग उड़ाते थे मजाक लोकेंद्र के अनुसार, गांव में कई लोग उनका मजाक उड़ाते थे और कहते थे कि दिव्यांग होकर क्रिकेट खेलना संभव नहीं है। उन्हें कई बार पढ़ाई पर ध्यान देकर नौकरी करने की सलाह भी दी गई। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और वर्ष 2021 से लेदर बॉल क्रिकेट खेलना शुरू किया। शुरुआत में क्रिकेट किट और मैदान जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी थी। तब साथियों ने आपस में पैसे जुटाकर दो क्रिकेट किट खरीदीं। अभ्यास के लिए सेंधवा से करीब 20 किलोमीटर दूर निवाली खेल परिसर में अधिकारियों से अनुमति लेकर हर शनिवार-रविवार घंटों अभ्यास किया। आज लोकेंद्र के चयन होने पर गांव में खुशियों का माहौल है। दोस्त रिश्तेदार घर पर बधाई देने आ रहे है। तस्वीरे देखिए…
