परंपरागत फसलों के बीच जब कोई किसान नई राह चुनता है तो खेती का गणित बदल जाता है। खेती में मुनाफा बढ़ाने का सबसे सीधा रास्ता है, खर्च कम करें और आय के कई स्रोत बनाएं। सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र के दीवड़िया गांव के प्रगतिशील किसान मुकेश वर्मा ने यही कर दिखाया है। वे मल्टीलेयर फार्मिंग कर रहे हैं। उन्होंने वर्षों तक कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में काम करने के बाद खेती की राह चुनी, लेकिन एक अलग सोच के साथ। किसान ने हालियाखेड़ी में अपनी 10 एकड़ जमीन पर लगभग 3000 नीलिया दुबिया और चंदन के 2500 पौधे लगाए हैं। ये पौधे उन्होंने गुजरात और चेन्नई से मंगवाए थे। मुकेश वर्मा ने जून 2024 में करीब एक फीट ऊंचाई के पौधों का रोपण किया था, जो अप्रैल तक लगभग 25 फीट तक बढ़ चुके हैं। उन्होंने पौधों के बीच लगभग 7 फीट की दूरी रखी है। पहले नीलिया दुबिया और उसके 7 फीट के बाद चंदन का पौधा लगाया है। इस तरह की योजना से न केवल पेड़ों की अच्छी वृद्धि हो रही है, बल्कि पेड़ों के बची जो गैप की जमीन का उपयोग कर रहे हैं। पेड़ों के बीच की खाली जगह का उपयोग करते हुए वे पिछले तीन साल से अलग-अलग फसलों की खेती कर रहे हैं। 10 एकड़ जमीन में ड्रिप इरिगेशन सिस्टम पहले साल उन्होंने मसूर की खेती की, जिससे उन्हें लगभग 45 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ और करीब 3 लाख की आय हुई। दूसरे साल उन्होंने चने की फसल लगाई, जिसमें 35 क्विंटल उत्पादन मिला। वर्तमान में वे इसी मॉडल के तहत हल्दी की खेती करने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने एग्रीकल्चर से पासआउट दो लोगों को काम पर रखा है। सिंचाई के लिए पूरे 10 एकड़ क्षेत्र में ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगाया है। इसके अलावा पानी के लिए खेत में कुआं और बोरवेल भी कराया है, जिससे पेड़ों और फसलों दोनों की नियमित सिंचाई हो रही है। 15 से 20 हजार रुपए किलो बिकता है चंदन मुकेश वर्मा बताते हैं उन्होंने 10 एकड़ में लाल चंदन के 2500 पेड़ लगाए हैं। बड़े होने पर इस पेड़ की हाइट 20 फीट तक जाती है, जो 15 से 20 हजार रुपए किलो बिकता है। पेड़ का वजन 20 से 30 किलो होता है। नीलिया दुबिया के पेड़ से प्लाईवुड बनती है। यह पेड़ 5 से 6 साल में कटने लायक हो जाता है। इसकी हाइट 70 से 80 फीट तक होती है और वजन 10 से 12 क्विंटल होता है। एक पेड़ 10 हजार रुपए में बिकता है। चार लेयर मे रखी पेड़ों की सुरक्षा मुकेश वर्मा ने बताया कि इन पेड़ों की सुरक्षा चार लेयर में रखी है। पहली लेयर में चारों तरफ 6 फीट गहरी नाली बनाई गई। दूसरी लेयर में बांस की बाउंड्री बनाई जाएगी, तीसरी लेयर में तार की फेंसिंग की जाएगी। इसमें सेंसर सिस्टम लगाया जाएगा, टच करते ही अलार्म बजेंगे साथ ही डॉग्स को छोड़ा जाएगा। चौथी लेयर में 25 फीट ऊंची टपरीनुमा बनाई जाएगी, जिस पर पूरे समय एक गनमैन तैनात रहेगा। मुकेश वर्मा बताते हैं कि वर्षों तक सड़क निर्माण और अन्य प्रोजेक्ट्स पर काम करते हुए मैंने एक बात गहराई से महसूस की। वह यह कि विकास की इस दौड़ में प्रकृति कहीं पीछे छूट रही है। पेड़ों की कटाई, धूल, प्रदूषण और बढ़ता कार्बन उत्सर्जन उन्हें अंदर ही अंदर परेशान करने लगा। यहीं से उनके मन में एक विचार आया। जिस प्रकृति से लिया है, अब उसे लौटाने का समय है। यह सिर्फ खेती नहीं है, यह एक तरह से मेरे द्वारा किए गए कार्बन उत्सर्जन की भरपाई है। पहले मैं सड़कें बनाता था, अब मैं जंगल उगा रहा हूं और दोनों में फर्क यह है कि अब मैं प्रकृति को वापस दे रहा हूं।
