सीहोर के समाजसेवी विनय रुठिया की ओर से ब्रिटिश सरकार पर कथित तौर पर एक लोन का भुगतान नहीं करने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में कानूनी नोटिस भेजे जाने और उसके जवाब में यूनाइटेड किंगडम के डेट मैनेजमेंट ऑफिस (यूके डीएमओ) की ओर से ईमेल भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। ईमेल में विभाग ने कहा है कि जांच के दौरान उसे संबंधित लोन का ऐसा कोई रिकॉर्ड या प्रमाण नहीं मिला, जिसके आधार पर ब्रिटिश सरकार की भुगतान संबंधी जिम्मेदारी स्थापित हो सके। दस्तावेज भेजने के बाद मिला जवाब
विनय रुठिया के अनुसार, इस मामले में ब्रिटिश सरकार को कानूनी नोटिस भेजा गया था। इसके जवाब में सरकार की ओर से लोन से संबंधित दस्तावेज और अन्य जरूरी जानकारी मांगी गई। इसके बाद रुठिया ने अपने वकील के माध्यम से प्रमाणित दस्तावेज ईमेल से भेजे। रुठिया का कहना है कि दस्तावेज भेजने के बाद उनके वकील को यूके डेट मैनेजमेंट ऑफिस की ओर से ईमेल मिला। इसमें कहा गया कि संबंधित लोन का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है और उपलब्ध जानकारी के आधार पर ब्रिटिश सरकार की ओर से कोई भुगतान देय नहीं है। रुठिया ने उठाए सवाल
विनय रुठिया ने विभाग के जवाब पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जब पहले दस्तावेज मांगे गए और बाद में प्रमाण उपलब्ध करा दिए गए, तो अब रिकॉर्ड नहीं होने की बात कहना सवाल खड़े करता है। रुठिया का दावा है कि उनके पास लोन से संबंधित लिखित दस्तावेज और राजनीतिक एजेंट के हस्ताक्षर वाले रिकॉर्ड मौजूद हैं। उन्होंने मांग की है कि ब्रिटिश सरकार इस कथित लोन से जुड़े दस्तावेजों और उसकी स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी दे। हालांकि, लोन की प्रकृति, उसकी शर्तों और ब्रिटिश सरकार पर भुगतान की कानूनी बाध्यता होने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। 16 अक्टूबर को जारी हुआ ईमेल
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यूके डेट मैनेजमेंट ऑफिस के कम्युनिकेशंस विभाग की ओर से 16 अक्टूबर को ईमेल भेजा गया था। यह जवाब रुठिया के वकील श्रेयांश रानीवाला की ओर से की गई पूछताछ के बाद दिया गया। ईमेल में विभाग ने कहा कि मामले की जांच की गई, लेकिन ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला जिससे यह स्थापित हो कि संबंधित लोन यूनाइटेड किंगडम सरकार की वित्तीय जिम्मेदारी है। यह प्रतिक्रिया लंदन स्थित यूके डेट मैनेजमेंट ऑफिस की ओर से दी गई बताई गई है। ये खबरें भी पढ़ें…
109 साल बाद पोतों ने मांगा था हिसाब
सीहोर जिले के रुठिया परिवार ने दावा किया है कि उनके दादा सेठ जुम्मा लाल रुठिया ने 1917 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार को 35 हजार रुपए का कर्ज दिया था, जिसका आज तक भुगतान नहीं हुआ है। पूरी खबर पढ़िए… फरवरी में नोटिस दिया था
सीहोर जिले के प्रतिष्ठित नगर सेठ परिवार ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान तत्कालीन ब्रिटिश सरकार को दिए गए 35 हजार रुपए के वार लोन की राशि पर दावा किया था। परिवार का कहना है कि इस संबंध में ब्रिटेन सरकार के लोन मैनेजमेंट ऑफिस से तीन अगस्त को सकारात्मक जवाब मिला है। पूरी खबर पढ़िए…
