मानसूनी बारिश के लिहाज से बीता सप्ताह मध्य प्रदेश के लिए बेहतर रहा। 7 दिन में औसत 4.2 इंच पानी गिर गया। इससे बारिश का ओवरऑल आंकड़ा 21.4 इंच पहुंच गया है। हालांकि, यह कोटे से 12% (3 इंच) कम है। अब तक 24.4 बारिश होना चाहिए, लेकिन कई जिलों की तस्वीर बेहतर है। भोपाल संभाग के जिलों में सबसे ज्यादा पानी गिरा है। इस सप्ताह भी भारी बारिश होने का अनुमान है। अगस्त के दूसरे सप्ताह में प्रदेश में मानसून टर्फ, डिप्रेशन और लो प्रेशर एरिया (निम्न दवाब क्षेत्र) एक्टिव रहे। इस वजह से पश्चिमी हिस्से में भारी बारिश का दौर बना रहा। भोपाल में तो सड़कें तालाब बन गईं और कई निचले इलाकों में पानी भर गया। पुराने और नए शहर में यह स्थिति देखने को मिली। दो दिन में ही यहां साढ़े 8 इंच बारिश हो गई। सीहोर में भी भारी बारिश का दौर रहा। इससे कोलांस नदी उफान पर रही और पानी बड़ा तालाब में आया। इससे यह सिर्फ डेढ़ फीट ही खाली है। डैमों में आया पानी, फसलों को फायदा मिला
बारिश की वजह से प्रदेश के अन्य डैमों में भी पानी आया है। वहीं, सोयाबीन, धान समेत अन्य खरीफ फसलों को फायदा मिला है। कोलार, बाणसागर, कुंडालिया, बरना, ओंकारेश्वर, इंदिरा सागर, गांधीसागर, तिघरा समेत कई डैम में पानी बढ़ा है। इस बार 9 दिन लेट आया था मानसून
बता दें कि इस बार मानसून 9 दिन देरी से 24 जून को पहुंचा था और अगले नौ दिन में पूरे प्रदेश को कवर कर लिया। देरी की वजह से प्रदेश में जून महीने में 30 प्रतिशत बारिश कम हुई थी, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में ये आंकड़ा प्लस में 8 प्रतिशत पर आ गया। दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर रहा। कहीं भी भारी बारिश नहीं हुई। इस वजह से औसत आधा इंच पानी भी नहीं गिरा, लेकिन तीसरे सप्ताह मानसून ने रफ्तार पकड़ी और 3.3 इंच पानी गिर गया। चौथे सप्ताह में भी भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। अगस्त के दूसरे सप्ताह में भारी बारिश का दौर शुरू हो गया, जो अब तक जारी है। भोपाल में 29.8 इंच पानी गिरा, मुरैना में 9.8 इंच ही
मौसम विभाग की माने तो प्रदेश में सबसे ज्यादा बारिश भोपाल में 29.8 इंच हो चुकी है। सबसे कम पानी मुरैना में 9.8 इंच ही हुई है। एमपी में इन जिलों में कम/ज्यादा बारिश
प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 19% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में 2% से 54% तक कम बारिश हुई है। वहीं, पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में औसत से 1% से 48% कम पानी गिरा है। IMD की माने तो भोपाल, गुना, सीहोर, राजगढ़, ग्वालियर, अनूपपुर, भिंड, बुरहानपुर, देवास, बड़वानी, खंडवा और खरगोन में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। ऐसे समझें बारिश का गणित… सबसे ज्यादा बारिश वाले जिले मध्यप्रदेश में कैसा रहेगा यह सप्ताह
मौसम एक्सपर्ट शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि पूर्वी हिस्से में स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव है। इस वजह से जबलपुर, सागर, शहडोल और रीवा संभाग में तेज बारिश का दौर बना रहेगा। भोपाल, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग में भी सिस्टम का असर देखने को मिलेगा। 5 बड़े शहरों में ऐसा रहेगा मौसम
