विदिशा जिले के मूक-बधिर लोगों ने सुरक्षा और सरकारी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर सोमवार को कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। मूक-बधिर संघ के बैनर तले उन्होंने एसपी को ज्ञापन सौंपकर स्पेश्ल पुलिस सहायता व्यवस्था शुरू करने की मांग की। समाज के लोगों ने कहा कि प्रदेश के कई जिलों के थानों में मूक-बधिरों की मदद के लिए QR कोड और हेल्प डेस्क हैं, लेकिन विदिशा में ऐसी सुविधा नहीं है। उन्होंने जिले के हर थाने में QR कोड लगाने की मांग की। इससे परेशानी या अपराध की स्थिति में मूक-बधिर व्यक्ति सांकेतिक भाषा के जरिए संबंधित विभाग तक शिकायत पहुंचा सकेगा। ज्ञापन में विदिशा में पुलिस सहायता केंद्र और मेडिएशन पुलिस हेल्पलाइन सेंटर बनाने की मांग भी की गई। ज्ञापन देने पहुंचे लोगों ने गुलाबगंज में संस्था के लिए खरीदी गई जमीन का मामला भी उठाया। उनका आरोप है कि 2015 से समाज के लोगों ने पैसे जुटाकर संस्था के लिए जमीन खरीदी थी। वहां मूक-बधिर बच्चों के लिए संस्थान बनाने की योजना थी। विशेष हेल्प डेस्क जरूरी समाज के लोगों के मुताबिक, उन्हें सड़क किनारे जमीन देने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में पीछे की ओर जमीन दी गई। प्रतिनिधियों ने मनोहर रघुवंशी सहित कुछ लोगों पर राशि और जमीन के लेन-देन में गड़बड़ी के आरोप लगाए। उन्होंने मामले की जांच कराने की मांग की। समाज के प्रतिनिधि विवेक बुधोलिया ने बताया कि विदिशा में करीब एक हजार मूक-बधिर लोग हैं। उन्होंने कहा कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए विशेष हेल्प डेस्क जरूरी है। 5 दिन में व्यवस्था का आश्वासन प्रतिनिधियों ने विदिशा में 100 प्रतिशत दिव्यांगता के प्रमाण पत्र बनवाने की सुविधा देने की मांग की। अभी इसके लिए भोपाल जाना पड़ता है। उन्होंने गुलाबगंज में संस्था के लिए जमीन आवंटित करने और बसों में दिव्यांगजनों को मिलने वाली 50 प्रतिशत किराया छूट लागू कराने की मांग भी की। समाज के प्रतिनिधि दिनेश शर्मा ने बताया कि सांकेतिक भाषा से जुड़े QR कोड के माध्यम से मूक-बधिर लोग अपनी शिकायत संबंधित विभाग तक पहुंचा सकते हैं। पुलिस अधीक्षक ने उनकी समस्याएं सुनकर 2 से 5 दिन में आवश्यक व्यवस्थाएं शुरू कराने का आश्वासन दिया है। समाज के लोगों ने कहा कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम में मिले अधिकारों का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब प्रशासन इन सुविधाओं को जमीन पर लागू करेगा।
