ग्वालियर जिले के पिछोर अनुविभाग के लिधौरा घाट पर सुरक्षा मानकों का उल्लंघन कर अवैध नावों का संचालन किया जा रहा है। इन नावों में क्षमता से कई गुना अधिक यात्रियों के साथ-साथ बाइकों को भी नदी पार कराया जा रहा है, जिससे यात्रियों की जान जोखिम में पड़ रही है। नावों में सुरक्षा के लिए न तो लाइफ जैकेट उपलब्ध हैं और न ही किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए कोई प्रशिक्षित गोताखोर मौजूद है। यह स्थिति बरगी डैम क्रूज हादसे के बाद भी बनी हुई है, जहां प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। दतिया और ग्वालियर जिले को जोड़ता है घाट यह घाट दतिया और ग्वालियर जिले की सीमा को जोड़ता है। समय बचाने के लिए लोग अपनी जान जोखिम में डालकर इन अवैध नावों से नदी पार करते हैं। अनुमान है कि प्रतिदिन लगभग 500 लोग इन नावों का उपयोग कर दोनों जिलों के बीच आवागमन करते हैं। चक्कर बचाने के फेर में जान से खेलते हैं यात्री ग्राम लिधौरा के पास से निकली सिंध नदी पर कहने को तो पुल बना था पर साल 2021 में बाढ़ में यह ब्रिज धराशाई हो गया। तभी के यहां स्थानीय लोगों की ओर से नाव चलाना शुरू कर दिया गया है। पिछले चार सालों से लगातार नाव चला रहे हैं, पर प्रशासन ने यहां कभी भी सुरक्षा मानकों को लेकर कोई भी ध्यान नहीं दिया। रोजाना सैंकड़ों लोग इन नावों से आवागमन करते हैं। जिनमें महिला,पुरुष और बच्चे शामिल होते हैं। इनके साथ ही लोग अपनी बाइकों को भी नाव से इस पार से उस पार ले जाते हैं। देखिए तस्वीरें… नहीं रहता सुरक्षा का कोई संसाधन इस घाट पर दो नावों का संचालन स्थानीय लोगों की ओर से किया जा रहा है। यह प्रति सवारी ₹30 रुपए और बाइक के ₹50-60 रुपए लेते हैं। लोग 30 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर से बचने के लिए जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। इन नावों पर कोई लाइफ जैकेट नहीं होती है ना ही कोई गोताखोर मौजूद रहता है। लोग अपने रिस्क पर जान से खेलते हुए नदी पार करते हैं। नाव चलाने वाले मल्लाह अपनी नाव पर 5 से 6 बाइकों को लादते हैं और उन्हीं बाइकों के सवारियों को यानी 12 से 15 लोग बैठाकर नदी पार करते हैं। क्षमता से अधिक सवारी और बाइक रहती है जब भास्कर रिपोर्टर ने इंदरगढ़ तहसील के रहने वाले काली परिहार से बात की तो उनका कहना था कि मैं ग्वालियर से आया था। इस रास्ते से जल्दी इंदरगढ़ पहुंच जाते हैं। यदि डबरा होकर जाते हैं तो 30 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। यही कारण है की नाव पर स्वयं और बाइक को निकाल रहे हैं। जब उनसे पूछा डर तो नहीं लगता तो उनका कहना था डर तो लगता है पर क्या करें समय बचाना है तो इसका सहारा तो लेना ही पड़ेगा। ग्राम थरेट के रहने वाले संदीप का कहना है कि यहां से थरेट जाते हैं तो समय और पैसा दोनों बच जाता है। नाव में डर लगता है पर जाना तो है अब तो आदत भी हो गई है। बरगी क्रूज हादसे के बाद भी नहीं जागा प्रशासन जबलपुर के बरगी डैम पर हुए क्रूज हादसे के बाद प्रदेश भर में प्रशासन ने अवैध नावों का परिवहन और सुरक्षा मानकों को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की। डबरा एकमात्र ऐसी जगह होगी जहां इतने बड़े घटनाक्रम के बाद भी प्रशासन ने लिधौरा घाट पहुंचकर कार्रवाई नहीं की। अवैध नाव संचालकों पर न तो कोई कार्रवाई की और न ही उन्हें सुरक्षा मानकों के तहत नौका संचालन के निर्देश दिए। यहां लोग बेधड़क अपनी जान से खिलवाड़ करते हुए नदी पार कर रहे हैं। इस समय प्रदेश भर में कई जगह तूफान का अलर्ट भी है ऐसे में यदि नाव परिवहन के दौरान तूफान के चलते कोई हादसा होता है तो उसकी जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा। कब टूटा पुल, टाइमलाइन 4 अगस्त 2021 की बाढ़ में सिंध नदी पर बना लांच लिधोरा पुल ढह गया था, जिसके बाद क्षेत्र के लोगों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई। इस प्राकृतिक आपदा के बाद दिसंबर 2022 में पुल के पुनर्निर्माण के लिए करीब 30 करोड़ रुपए की योजना बनाई गई, लेकिन इसमें से केवल 20 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति ही मिल सकी। इसके बाद साल 2023 में निर्माण कार्य शुरू किया गया और निर्माण एजेंसी श्री मंगलम बिल्डकॉन (गुजरात) की ओर से पुल के नीचे के स्टेप और 17 पिलर का काम पूरा कर लिया गया। हालांकि, आगे के निर्माण कार्य के लिए आवश्यक 10 करोड़ 83 लाख रुपए की अतिरिक्त राशि को अब तक स्वीकृति नहीं मिल पाई है, जिसके चलते काम बीच में ही रुक गया। बजट के अभाव में पुल का निर्माण अटका वर्तमान स्थिति यह है कि बजट के अभाव में पुल का निर्माण कार्य पिछले एक साल से पूरी तरह बंद पड़ा है। इस अधूरे निर्माण के कारण इन्दरगढ़ और पिछोर तहसील के लगभग 150 गांवों का सीधा संपर्क टूट गया है, जिससे लोगों को रोजमर्रा के कार्यों के लिए करीब 32 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। मजबूरी में लोग अब भी नावों के सहारे अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को विवश हैं, जबकि प्रशासन और शासन स्तर पर बजट स्वीकृति का मामला लंबित बना हुआ है। 150 गावों के ग्रामीणों को जोड़ता है यह पुल लांच लिधोरा पुल के माध्यम से इन्दरगढ़ तहसील और पिछोर तहसील के लगभग 150 गांव सीधे जुड़े हुए थे। ग्रामीणों की दैनिक जरूरतें पूरी होती थीं और कृषि उपज डबरा, पिछोर और इन्दरगढ़ की मंडियों तक पहुंचती थी, जिससे किसानों को फसल के उचित दाम मिलते थे। बसों का परिवहन, विद्यार्थियों की आवाजाही और मरीजों का अस्पताल तक पहुंचना भी इसी मार्ग पर निर्भर था। पुल बंद होने के बाद स्थिति यह बन गई है कि इन्दरगढ़ से पिछोर जाने के लिए लोगों को करीब 32 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही है। यही कारण है कि लोग समय बचाने के लिए नावों का सहारा ले रहे हैं। शेष राशि मंजूर होते ही फिर शुरू होगा निर्माण नगर परिषद पिछोर की अध्यक्षा रामजानकी राजेश पण्डा का कहना है कि इस पुल से न केवल 150 गांव जुड़े थे, बल्कि यह मार्ग क्षेत्र के मुख्य बाजारों, शैक्षणिक संस्थानों और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच का सबसे छोटा रास्ता था। ग्वालियर और दतिया जिलों के ग्रामीणों को लंबे मार्ग से होकर जाना पड़ रहा है, जिससे किसानों को अपनी उपज मंडी तक पहुंचाने में अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। ईई, पुल सेतु निर्माण विभाग पीडब्ल्यूडी ग्वालियर के जोगेंद्र सिंह यादव ने बताया कि पुल निर्माण के लिए शेष राशि की प्रशासकीय स्वीकृति हेतु शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया है। कुल लागत 30 करोड़ 86 लाख रुपए है, जिसमें से 20 करोड़ रुपए का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। शेष राशि की स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य दोबारा शुरू कर दिया जाएगा।
