मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना 2023 को बंद कराने और 1.25 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को दी जा रही ₹1500 की मासिक किस्त पर रोक लगाने की मांग को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य शासन के महिला एवं बाल विकास विभाग को नोटिस जारी किया है। सरकार को 4 हफ्ते में जवाब देना होगा। याचिका ग्वालियर के थाटीपुर स्थित नेहरू कॉलोनी निवासी और वार्ड-22 की कांग्रेस की पूर्व पार्षद सुधा दुबे ने अधिवक्ता अनिल कुमार मिश्रा के माध्यम से दायर की है। इसमें मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग और वित्त विभाग के प्रमुख सचिवों को पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ता ने योजना को असंवैधानिक बताते हुए इसे तत्काल निरस्त करने और महिलाओं को नकद राशि देने पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की है। याचिकाकर्ता बोलीं- रोजगार दें, रुपए बांटना स्थायी समाधान नहीं सुधा दुबे का कहना है कि महिलाओं को हर महीने ₹1500 देने के बजाय उन्हें रोजगार और उनके बच्चों को नौकरी के अवसर दिए जाने चाहिए, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने कहा कि वह महिला कल्याण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन बिना कौशल विकास, वोकेशनल ट्रेनिंग या स्वरोजगार के सीधे नकद राशि देना स्थायी समाधान नहीं है। उनका तर्क है कि इससे महिलाओं में सरकारी सहायता पर निर्भरता बढ़ सकती है और उनकी प्रतिभा का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि योजना के जरिए राशि बांटना वोट की राजनीति का हिस्सा है। योजना पर सालाना खर्च ₹22,500 करोड़ से ज्यादा याचिका में बताया गया है कि वर्तमान में 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं को हर महीने ₹1500 की सहायता दी जा रही है। इसके लिए राज्य सरकार पर हर माह करीब ₹1878 करोड़ और सालाना ₹22,500 करोड़ से अधिक का वित्तीय भार पड़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में लाड़ली बहना योजना के लिए ₹23,882 करोड़ का प्रावधान किया गया है। याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया है कि सरकार कर्ज लेकर योजना चला रही है तो इससे महिलाओं के कौशल, रोजगार और आत्मनिर्भरता की स्थिति में कितना बदलाव आया है। सरकार ने कहा- सवा करोड़ लाभार्थियों को पक्षकार नहीं बनाया सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से आपत्ति उठाई गई कि योजना का लाभ लेने वाली सवा करोड़ महिलाओं को याचिका में पक्षकार नहीं बनाया गया है। इस पर हाईकोर्ट ने निर्देश दिए कि लाभार्थियों की संख्या सवा करोड़ से अधिक है, इसलिए शासन खुद लाभार्थियों की सूची अदालत में पेश करे। साथ ही याचिका की कॉपी शासन के माध्यम से लाभार्थियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए। अब सरकार के जवाब के बाद आगे की सुनवाई ग्वालियर खंडपीठ ने महिला एवं बाल विकास विभाग को 4 सप्ताह में विस्तृत जवाब पेश करने का समय दिया है। इसके बाद कोर्ट योजना पर अंतरिम रोक की मांग और याचिका में उठाए गए अन्य मुद्दों पर आगे सुनवाई करेगा। ————–
यह खबरें भी पढ़ें लाड़ली लक्ष्मी-बहनों को मिलते रहेंगे रुपए, 5 साल की मंजूरी मध्य प्रदेश में लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मियों को सरकारी सहायता मिलती रहेगी। मंगलवार को कैबिनेट बैठक में इन दोनों योजनाओं को अगले 5 साल तक जारी रखने का फैसला लिया गया है। सरकार लाड़ली बहना योजना पर 1,14,365 करोड़ और लाड़ली लक्ष्मी योजना पर 16,326 करोड़ रुपए खर्च करेगी। पढ़ें पूरी खबर ढाई साल में 5.70 लाख घटी लाड़ली बहनों की संख्या मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में ढाई साल के अंतराल में 5 लाख 70 हजार से अधिक महिलाओं के नाम बाहर हो गए हैं। अब इस योजना में पात्र महिलाओं की संख्या 1 करोड़ 25 लाख 31 हजार ही रह गई है। पढ़ें पूरी खबर
