मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। कार्यकर्ता ने जोश में मुसीबत मोल ले ली
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और SIR के विरोध में कांग्रेस ने देशभर में मोर्चा खोल रखा है। दिल्ली से लेकर मध्य प्रदेश तक कांग्रेस सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रही है। इसी सिलसिले में कांग्रेस ने रायसेन जिले के सिलवानी में भी प्रदर्शन किया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला जलाया। लेकिन यहां एक कांग्रेस कार्यकर्ता का जोश उस पर भारी पड़ गया। हुआ यूं कि पुतला जलाने के दौरान अचानक आग भड़क उठी और कार्यकर्ता उसकी चपेट में आ गया। युवक के सिर और कपड़ों ने आग पकड़ ली। वह घबराकर तुरंत वहां से भागा। गनीमत रही कि समय रहते आग बुझा ली गई, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कार्यकर्ता आग की चपेट में आने के बाद भागता नजर आ रहा है। अब खरी बात ये है कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन विपक्ष का अधिकार है। विरोध की आग भले ही जलाए रखिए, लेकिन असली आग से थोड़ा फासला रखना ही बेहतर है। क्योंकि जान है तो जहान है। सेवा ज्योति से अचानक छलक पड़ी ज्वाला
इधर, ग्वालियर में भाजपा की सेवा ज्योति यात्रा के दौरान एक कार्यकर्ता सेवा ज्योति की ज्वाला से ही झुलस गया। गनीमत रही कि वहां मौजूद पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने समय रहते हालात पर काबू पा लिया और बड़ा हादसा टल गया। हुआ यूं कि ग्वालियर सांसद भरत सिंह कुशवाह हाथ में मशाल लेकर चल रहे थे। तभी एक उत्साहित कार्यकर्ता मशाल यानी सेवा ज्योति को यात्रा रथ पर स्थापित करने के लिए रथ पर चढ़ गया। जब उसे मशाल थमाई जा रही थी, तभी अचानक उसकी लौ से आग कार्यकर्ता के कपड़ों पर गिर गई। देखते ही देखते उसकी शर्ट जलने लगी। वहां मौजूद लोगों ने उसे आग लगने की जानकारी दी। इसके बाद युवक ने किसी तरह आग बुझाई और रथ से नीचे उतर आया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है। इस घटना में सांसद भरत सिंह कुशवाह भी आग की चपेट में आने से बाल बाल बचे। यहां भी सीख यही है कि उत्साह की आग भले ही जलती रहे, लेकिन असली वाली आग से थोड़ा फासला रखना ही बेहतर है। मंत्री को ‘सेठ ‘.. विधायक को पूर्व विधायक कहा
सीएम डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में वर्चुअल रूप से रतलाम में आयोजित बलराम महोत्सव को संबोधित किया था। इस दौरान उनका खास अंदाज देखने को मिला। उन्होंने मंत्री चैतन्य काश्यप को ‘सेठ जी’ कहा और रतलाम ग्रामीण से विधायक मथुरालाल डामर को पूर्व विधायक बता दिया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कार्यक्रम में बैठे मंत्री चैतन्य काश्यप के लिए कहा- रतलाम एकमात्र नगर है, जहां के विधायक सेठ ही होते हैं। इसके बाद उन्होंने चैतन्य काश्यप का नाम लेते हुए जोरदार तालियां बजवाईं। इसके बाद जब रतलाम ग्रामीण विधायक मथुरालाल डामर की बारी आई तो मुख्यमंत्री ने उन्हें पूर्व विधायक कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा- हमारे बीच पूर्व विधायक मथुरालाल डामर जी भी बैठे हैं। इनका भी जोरदार अभिनंदन कीजिए। बस फिर क्या था, पूर्व विधायक कहने पर विधायक के चेहरे के भाव देखने लायक थे। न तो वे खुलकर खुश हो पाए और न ही कुछ कह पाए। दरअसल, उन्हें लेकर मुख्यमंत्री की जुबान फिसल गई थी। इसी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने रतलाम महापौर प्रहलाद पटेल को भी अपने अंदाज में लपेट लिया। महापौर के कार्यक्रम में नजर नहीं आने पर उन्होंने पूछा- महापौर हैं कि नहीं। फिर आगे कहा- ये किसानों का कार्यक्रम है, महापौर अभी अपना मैरिज गार्डन चला रहे हैं और नगर निगम संभाल रहे हैं। हालांकि कुछ देर बाद महापौर कार्यक्रम में पहुंच गए। इसके बाद मुख्यमंत्री ने उन्हें और उनके साथ आए एक और नेता को देखकर कहा- आओ-आओ, राम-लक्ष्मण बैठो। अब मुख्यमंत्री के इस अंदाज की रतलाम से लेकर सियासी गलियारों तक जमकर चर्चा हो रही है। और अब अंदर की बात.. बड़े साहब ने किया प्रमुख सचिव का बचाव
सरकार ने हाल ही में शत्रु संपत्ति को लेकर एक बैठक बुलाई थी। इसमें एक प्रमुख सचिव की उस वक्त फजीहत हो गई, जब वे बिना तैयारी के ही बैठक में पहुंच गए। आलम ये रहा कि वे सरकार को मांगी गई जानकारी तक नहीं दे पाए। इस पर सरकार नाराज हो गए। तभी प्रमुख सचिव ने गेंद एक ACS के पाले में डाल दी। उन्होंने ACS की ओर इशारा करते हुए कह दिया कि इनकी ओर से ही जानकारी नहीं आई है। लेकिन ACS ने भी पलटकर साफ कर दिया कि उनकी ओर से जानकारी पहले ही दी जा चुकी है। अब प्रमुख सचिव के फंसने की नौबत आई तो बैठक में मौजूद एक बड़े साहब ने फौरन मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने प्रमुख सचिव का बचाव करते हुए सरकार से कह दिया कि इनके पास वाकई जानकारी नहीं आई है। इस तरह बड़े साहब ने प्रमुख सचिव को फजीहत से बचा लिया और मामला भी संभल गया। इनपुट सहयोग – देव शाक्य (रायसेन), अरुण मोरे (ग्वालियर), केके शर्मा (रतलाम), विजय सिंह बघेल (भोपाल) ये भी पढ़ें –
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