विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने रीवा के सरई गांव में प्रस्तावित परमाणु बिजलीघर को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। सोमवार को भोपाल स्थित अपने सरकारी आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने सवाल उठाया, “क्या सरकार कैंसर के लिए पावर प्लांट डालना चाहती है? क्या आसपास के लोगों को मारना चाहती है?” सिंघार ने परियोजना की साइट बदलने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि इसके लिए गरीब आदिवासियों, दलितों और किसानों को उजाड़ने की तैयारी है। सिंघार के मुताबिक प्रस्तावित बिजलीघर के लिए सरकारी जमीन के अलावा करीब 150 हेक्टेयर निजी जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण लंबे समय से जल सत्याग्रह कर रहे हैं, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी जा रही। उन्होंने कलेक्टर पर भी ग्रामीणों को हटाने की धमकी देने का आरोप लगाया। ‘सरपंच ने न हस्ताक्षर किए, न एनओसी दी’ सिंघार ने बिजलीघर के लिए बोरिंग की अनुमति से जुड़े पत्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार पंचायत की अनुमति मिलने की बात कह रही है, जबकि ग्रामसभा ने अनुमति देने से इनकार किया है। उनके अनुसार, सरपंच कोमल संजय सिंह ने आयुक्त और कलेक्टर को पत्र लिखकर संबंधित दस्तावेज को फर्जी बताया है। सिंघार ने कहा, “ना मैंने साइन करी, ना मैंने एनओसी दी।” उन्होंने मामले की जांच कराने की मांग की। विमला कोल की मौत पर मुख्यमंत्री से मांगा जवाब जल सत्याग्रह के दौरान विमला कोल की मौत का मुद्दा उठाते हुए सिंघार ने उनके परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि मीडिया में महिला के चार दिन तक जल सत्याग्रह में शामिल रहने की खबरें आईं, जबकि कलेक्टर इसे सामान्य मौत बता रहे हैं। सिंघार ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि यदि कलेक्टर गलत जानकारी दे रहे हैं और मीडिया सही तथ्य सामने ला रहा है, तो सरकार निर्णय क्यों नहीं ले पा रही। उन्होंने कहा, “क्या आप कलेक्टर की आंखों से प्रदेश चला रहे हो? क्या धृतराष्ट्र हो गए हो?” परमाणु बिजलीघर की साइट बदलने की मांग सिंघार ने प्रस्तावित स्थल के आसपास कई गांव होने का दावा करते हुए परियोजना के संभावित पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि आबादी संबंधी मानकों और पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन किया गया है या नहीं और स्थानीय लोगों को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। उन्होंने सरकार से तत्काल साइट बदलने की मांग की। सिंघार ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएगी और जरूरत पड़ने पर अदालत भी जाएगी। केन-बेतवा परियोजना के मुआवजे पर भी सवाल सिंघार ने पन्ना क्षेत्र में केन-बेतवा और मझगांव-रुंज परियोजनाओं के विस्थापितों के मुआवजे में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अपात्र लोगों को मुआवजा मिल गया, जबकि पात्र प्रभावितों के खाते तक नहीं खुल पाए। उन्होंने मुख्यमंत्री को विधानसभा में जांच कराने के आश्वासन की याद दिलाते हुए पूछा कि अब तक जांच क्यों नहीं कराई गई। उन्होंने आंदोलनकारी दिव्या अहिरवार की गिरफ्तारी का मुद्दा भी उठाया। सिंघार के मुताबिक, दिव्या 25 दिन से अधिक समय से जेल में हैं और अब तक चालान पेश नहीं किया गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से उनकी रिहाई के लिए प्रशासन को निर्देश देने की मांग की। ओबीसी आरक्षण पर विधानसभा सत्र बुलाने की मांग ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार ओबीसी के वोट तो लेना चाहती है, लेकिन आरक्षण लागू नहीं करना चाहती। उन्होंने इस विषय पर विधानसभा का सत्र बुलाकर चर्चा कराने और सर्वदलीय सहमति से प्रस्ताव पारित करने की मांग की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिंघार ने महेश्वर में बड़ी संख्या में मतदाता पहचान पत्र मिलने के मामले की जांच की मांग भी की। भाजपा द्वारा कांग्रेस कार्यालय के घेराव के सवाल पर उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा जनता के वोट के अधिकार और एसआईआर में कथित गड़बड़ियों पर उठ रहे सवालों से ध्यान भटकाना चाहती है।
