इंदौर के सरकारी प्रकाशचंद सेठी अस्पताल में डॉक्टरों ने एक दुर्लभ और जटिल प्रसव को सफलतापूर्वक संभालते हुए मां और नवजात दोनों की जान बचा ली। अस्पताल में 37 वर्षीय गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा के साथ भर्ती हुई थी। जांच में सामने आया कि उसकी गर्भावस्था नौ माह की थी और गर्भ में जुड़वा शिशु थे। लेकिन, गर्भावस्था के पांचवें महीने में ही एक शिशु की मृत्यु हो चुकी थी। मामला इसलिए बेहद संवेदनशील था क्योंकि दोनों शिशु एक ही थैली में थे। ऐसी स्थिति में संक्रमण और अन्य गंभीर जटिलताओं का खतरा काफी बढ़ जाता है। बावजूद इसके, डॉक्टरों ने सावधानीपूर्वक उपचार कर सुरक्षित प्रसव कराया। डॉक्टरों ने तुरंत किया ऑपरेशन डॉक्टरों ने बिना देरी किए महिला का ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। सफल ऑपरेशन के बाद दूसरे शिशु का सुरक्षित प्रसव कराया गया। जन्म लेने वाला शिशु लगभग 3.75 किलोग्राम वजन का है और पूरी तरह स्वस्थ बताया जा रहा है। खास बात यह रही कि पेट में मृत शिशु के जीवित शिशु को किसी प्रकार का संक्रमण नहीं हुआ। निजी अस्पताल से आई थी महिला महिला पहली बार इलाज के लिए सरकारी अस्पताल पहुंची थी। इससे पहले वह एक निजी अस्पताल में इलाज करा रही थी। डॉक्टरों ने जटिल स्थिति को देखते हुए सभी जरूरी व्यवस्थाएं कीं और सफलतापूर्वक प्रसव कराया। वर्तमान में मां और नवजात दोनों स्वस्थ हैं। इस जटिल प्रसव प्रक्रिया को डॉ. कोमल विजयवर्गीय, डॉ. सुनीता भटनागर, डॉ. स्वाति, डॉ. दिव्याभ गहलोत और नर्सिंग स्टाफ रेखा और प्रीति ने सफलतापूर्वक पूरा किया। डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने इस जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने पर पूरी टीम को बधाई दी।
