सीहोर जिले में स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत शासकीय नियुक्तियों में फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस ने प्रदेशभर में फर्जी मेडिकल डिग्रियां बनाने और बेचने वाले रैकेट का पर्दाफाश करते हुए मुख्य सरगना हीरा सिंह कौशल को गिरफ्तार किया है। आरोपी हीरा सिंह जिले के बिलकिसगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में सरकारी रेडियोग्राफर के पद पर पदस्थ था। उसने फर्जी डिग्रियों के आधार पर कई लोगों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के ‘संजीवनी क्लीनिक’ में डॉक्टर की नौकरी दिलवाई थी। सरकारी नौकरी की आड़ में चल रहा था अवैध कारोबार
आरोपी हीरा सिंह सरकारी नौकरी की आड़ में लंबे समय से पूरे मध्य प्रदेश में फर्जी मेडिकल डिग्रियों का यह अवैध कारोबार चला रहा था। पुलिस की शुरुआती पूछताछ में मास्टरमाइंड ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच में पता चला है कि आरोपी ने मोटी रकम लेकर फर्जी डिग्रियों के जरिए कई अयोग्य लोगों को शासकीय क्लीनिकों में डॉक्टर के पद पर पदस्थ करवा दिया था। शासकीय सेवा की गरिमा भंग करने वाले इस कर्मचारी की गिरफ्तारी के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। 12 फर्जी डॉक्टरों के नाम आए सामने, छापेमारी जारी
पूछताछ के दौरान आरोपी हीरा सिंह ने अब तक 12 से अधिक ऐसे फर्जी डॉक्टरों के नाम कबूल किए हैं, जिन्होंने उससे ये डिग्रियां खरीदी थीं। पुलिस अब इन फर्जी डॉक्टरों की गिरफ्तारी के लिए प्रदेश के अलग-अलग जिलों में लगातार छापेमारी कर रही है। इसके साथ ही, पुलिस इस पहलू पर भी बारीकी से जांच कर रही है कि क्या सीहोर में स्थानीय स्तर पर भी किसी को ऐसी फर्जी डिग्रियां बांटी गई थीं। एक तारीख से छुट्टी पर था आरोपी रेडियोग्राफर
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बिलकिसगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. नीरज कुमार डागोर का आधिकारिक बयान सामने आया है। डॉ. डागोर ने बताया कि, “आरोपी हीरा हमारे अस्पताल में रेडियोग्राफर के पद पर कार्यरत है। वर्तमान में वह 1 तारीख से बाकायदा छुट्टी का आवेदन देकर संस्थान से गया हुआ था।” उन्होंने बताया कि कर्मचारी के अवकाश आवेदन को नियमानुसार आगे की कार्रवाई के लिए वरिष्ठ कार्यालय भेज दिया गया था। मीडिया के माध्यम से मिली गिरफ्तारी की जानकारी
सीएचसी प्रभारी डॉ. डागोर ने स्पष्ट किया कि उन्हें अपने कर्मचारी हीरा की गिरफ्तारी के संबंध में जानकारी मीडिया के माध्यम से ही प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि आधिकारिक तौर पर इस गिरफ्तारी की विस्तृत वजहों की पूरी जानकारी उन्हें अभी तक नहीं मिली है। फिलहाल, पुलिस इस पूरे रैकेट की गहराई से जांच कर रही है और स्वास्थ्य विभाग भी मामले पर नजर बनाए हुए है।
