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पूर्व नेता प्रतिपक्ष बोले- ₹800 के मोबाइल पर डकैती केस:कहा- BJP विधायक के पिता अवैध परिवहन कर रहे, 6 जिलों में 5 साल में 1 हजार फर्जी केस

मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. गोविंद सिंह ने भाजपा सरकार पर ‘दस्यु उन्मूलन एवं प्रत्यर्पण अधिनियम 1981’ का दुरुपयोग कर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को झूठे मुकदमों में फंसाने का गंभीर आरोप लगाया है। भोपाल में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में उन्होंने मांग की कि जब प्रदेश से डकैतों की समस्या पूरी तरह समाप्त हो चुकी है, तो इस काले कानून को भी तत्काल प्रभाव से खत्म किया जाना चाहिए। इस संबंध में वे मुख्यमंत्री को पत्र लिख रहे हैं। ‘कागजों में डकैत खत्म, फिर भी कानून क्यों?’ डॉ. गोविंद सिंह ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि करीब 15-16 साल पहले ग्वालियर-चंबल और रीवा संभाग में डकैतों का आतंक था। 500 से ज्यादा डकैत 20-22 गिरोहों में सक्रिय थे, जिससे किसानों और व्यापारियों का जीना मुहाल था और बड़े पैमाने पर पलायन हुआ था। तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने 1981 में इस समस्या से निपटने के लिए यह कड़ा कानून बनाया था, जिसके तहत डकैतों के मददगारों को 120 दिनों तक जमानत नहीं मिलती थी। सीएम रहते शिवराज ने कहा था एमपी से डकैत खत्म हो गए डॉ गोविंद सिंह ने कहा, “साल 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खुद घोषणा की थी कि मप्र से डकैत समस्या समाप्त हो चुकी है और सरकारी दस्तावेजों में भी यही दर्ज है। 2012 में तत्कालीन गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने भी विधानसभा में इसे समाप्त करने की बात कही थी, लेकिन यह कानून आज भी लागू है।” 5 साल में 1000 से ज्यादा निर्दोषों पर कार्रवाई, अधिकारों का हनन कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि साल 2020 से 2025 के बीच पिछले पांच वर्षों में सरकार ने इस कानून का भारी दुरुपयोग किया है। ग्वालियर-चंबल के 6 जिलों (गुना को छोड़कर) और रीवा संभाग के 3 जिलों में सक्रिय इस कानून के तहत 1,000 से अधिक निर्दोष युवाओं और किसानों पर दस्यु अधिनियम लगाकर उन्हें जेल भेज दिया गया। यह नागरिकों के संवैधानिक स्वतंत्रता के अधिकार का सरासर हनन है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस कानून का इस्तेमाल सिर्फ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को दबाने और जेल में सड़ाने के लिए कर रही है। पुलिस की वसूली का विरोध करने पर ‘दस्यु’ का ठप्पा प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. सिंह ने लहार के रौन थाने का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के तत्कालीन दरोगा (थाना प्रभारी) यूपी में अवैध रेत खनन करवाता था और प्रति ट्रैक्टर 500 रुपये की वसूली करता था। जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सीसीटीवी फुटेज के साथ इसका विरोध किया और आंदोलन किया, तो दरोगा का तबादला हुआ। लेकिन जाने से पहले उसने बदला लेने के लिए 6 निर्दोष लोगों पर दस्यु उन्मूलन का केस ठोक दिया, जो आज भी जेल में हैं। ₹800 का मोबाइल गुमा तो लगा दिया डकैती का केस उन्होंने एक और चौंकाने वाली घटना साझा करते हुए कहा, “दतिया में दो लोगों के विवाद में महज 800 रुपए का मोबाइल गिरने पर पुलिस ने दस्यु उन्मूलन की धारा लगा दी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को थाने में उल्टा लटका कर पीटा। तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के समय की इस घटना के तस्वीरें मेरे पास मौजूद हैं।” उन्होंने कहा कि कानून में प्रावधान है कि एसपी की एनओसी पर जमानत मिल सकती है, लेकिन जब पुलिस खुद फर्जी केस लाद रही है तो एनओसी कौन देगा? “पापा जी के ट्रैक्टर” के नाम से चल रहा है अवैध धंधा डॉ. गोविंद सिंह ने स्थानीय भाजपा विधायक पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि विधायक के पिता जी 5 नए ट्रैक्टर खरीद कर लाए हैं और बेखौफ होकर रेत का अवैध परिवहन कर रहे हैं। पुलिस की हिम्मत नहीं है कि वह ‘पापा जी के ट्रैक्टरों’ को हाथ भी लगा सके। सिंध नदी में पनडुब्बियों से अवैध खनन, 80% हिस्सा पुलिस का रेत माफिया पर बरसते हुए पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सिंध नदी में पानी के बीच पनडुब्बी मशीनें लगाकर सरेआम रेत निकाली जा रही है और इसे बिना किसी टेंडर के कानपुर, इटावा और औरैया (यूपी) में बेचा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन और पुलिस विभाग इस चोरी के असली ‘हीरो’ हैं। रेत खनन के इस खेल में 80 फीसदी हिस्सा अकेले पुलिस विभाग का है। सभी थाना प्रभारी (TI), खनिज और राजस्व विभाग की मिलीभगत से यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है, जहाँ 22 चक्का हाईवा से 5,000 रुपये और ट्रैक्टर-ट्रॉली से 500 से 1,000 रुपये वसूले जा रहे हैं। डॉ. सिंह ने बताया कि उन्होंने इसके खिलाफ एनजीटी (NGT) में याचिका भी लगाई है, जिसकी जांच के लिए एक कमेटी बनाई गई है।

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