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पुलिसवालों का ‘पप्पू सेठ’ ही निकला एमडी ड्रग तस्कर:टीआई की बंदूक से माफिया काटते थे केक, ‘तोड़’ कराने में भी काम आते थे

राजस्थान के भिलवाड़ा में हाल ही में पकड़ी गई एमडी ड्रग फैक्टरी के मामले में मंदसौर जिले के डोडियामीणा गांव निवासी वीरेंद्र पिता हजारीलाल बांछड़ा उर्फ पप्पू का नाम सामने आया है। पप्पू के खिलाफ मध्य प्रदेश और राजस्थान में 10 से अधिक आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं, जिनमें तीन एनडीपीएस एक्ट के मामले भी शामिल हैं। पप्पू एक साल पहले उस समय चर्चा में आया था, जब उसका जन्मदिन मनाते हुए एक वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो में मंदसौर जिले के दो एएसआई सुनील तोमर और जगदीश ठाकुर उसे केक खिलाते दिखाई दिए थे। पुलिस के हर मूवमेंट की जानकारी रखता था मंदसौर क्षेत्र में पप्पू और पुलिस के बीच का रिश्ता किसी से छिपा नहीं था। कई पुलिसकर्मी उसे ‘पप्पू सेठ’ कहकर बुलाते थे। नई आबादी थाने में पदस्थ रहे कुछ पुलिसकर्मियों से उसके बेहद करीबी संबंध बताए जाते हैं। सूत्रों के अनुसार, इन्हीं संपर्कों के जरिए उसे पुलिस की गतिविधियों और कार्रवाई की पहले से जानकारी मिल जाती थी। एनडीपीएस एक्ट के तीन मामले दर्ज होने के बावजूद वह पुलिस के लिए मुखबिर जैसा बना रहा। इसी का फायदा उठाकर जिले से बाहर मादक पदार्थ की खेप भेजता था। कहां पुलिस चेकिंग कर रही है, किस मार्ग पर नाकाबंदी है और कौन सा रास्ता सुरक्षित है, जैसी सूचनाएं उसे मिलती रहती थीं। 15 साल से तस्करी में सक्रिय, ‘तोड़’ कराने में था माहिर पुलिस सूत्रों के मुताबिक पप्पू 15 वर्षों से मादक पदार्थ तस्करी के नेटवर्क में सक्रिय था। इस दौरान उसने पुलिस और स्थानीय प्रभावशाली लोगों से ऐसे संबंध विकसित कर लिए थे कि मारपीट, अवैध कारोबार और अन्य आपराधिक मामलों में भी ‘तोड़’ यानी समझौता कराने के लिए उसकी मदद ली जाती थी। किसी को मामले में फंसाना हो या किसी आरोपी को राहत दिलानी हो, वह अपने संपर्कों के दम पर रास्ता निकाल लेता था। भीलवाड़ा में गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसके स्थानीय नेटवर्क और संपर्कों की आंतरिक पड़ताल भी शुरू कर दी है। मंदसौर-नीमच क्षेत्र में बढ़ती सख्ती के बाद उसने कुछ पुलिसकर्मियों के कथित सहयोग से भीलवाड़ा में अपना कारोबार फैलाया। अफीम उत्पादक किसानों और स्थानीय नेटवर्क से मजबूत संपर्क होने के कारण उसे कच्चा माल जुटाने और तस्करी संचालित करने में विशेष परेशानी नहीं होती थी। तस्करों से पुलिस साठगांठ की लंबी फेहरिस्त पप्पू का मामला इकलौता केस नहीं है जिसमें पुलिस और तस्करों के बीच साठगांठ के आरोप हैं। हमने ऐसे ही केस की फेहरिस्त खंगाली तो चौंकाने वाले मामले सामने आए।

ऐसे ही 4 केस से समझिए इस साठगांठ को केस-1: वायरल ऑडियो में तस्करी की सलाह इन दिनों इलाके में पुलिस महकमे में एक कथित ऑडियो भी चर्चा का विषय बना हुआ है। करीब 26 मिनट के इस ऑडियो में एक व्यक्ति खुद को रऊफ खान बताते हुए कथित तौर पर एक तस्कर से बातचीत करता सुनाई देता है। बातचीत में दस क्विंटल डोडाचूरा से जुड़े मामले, पैसों की मांग और पुलिस अधिकारियों के नामों का जिक्र है।ऑडियो में एक अन्य व्यक्ति तस्कर को सलाह देता सुनाई देता है कि वह स्थानीय स्तर पर धंधा न करे, बल्कि मणिपुर से दिल्ली तक माल सप्लाई का नेटवर्क तैयार करे। बातचीत में सेटिंग कराने और मोटी कमाई के दावे भी किए गए हैं। हालांकि इस ऑडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसका कंटेंट पुलिस और तस्करों के कथित रिश्तों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। केस- 2: पुलिस की बंदूक से काटा था केक नीमच क्षेत्र के कुख्यात तस्कर जयकुमार सबनानी उर्फ बाबू सिंधी का एक वीडियो भी पहले सुर्खियों में रहा था। वर्ष 2021 में 250 क्विंटल काला दाना तस्करी प्रकरण में गिरफ्तारी के बाद उसका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह 12 बोर बंदूक से केक काटता दिखाई दिया। वीडियो में तत्कालीन टीआई नरेंद्र सिंह ठाकुर और आरक्षक पंकज कुमावत समेत अन्य लोग भी मौजूद थे। जांच में सामने आया कि जिस बंदूक से केक काटा गया, वह टीआई की थी। मामले ने पुलिस विभाग में हड़कंप मचा दिया था। बाद में तस्कर से सांठगांठ के आरोपों में आरक्षक पंकज कुमावत और एक अन्य पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई हुई। दोनों को पहले निलंबित किया गया और बाद में बर्खास्तगी की कार्रवाई भी की गई। इस मामले में केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) ने भी कार्रवाई की थी। केस-3: तस्कर की संपत्ति की देखरेख करते थे पुलिसवाले वर्ष 2023 में भी नीमच जिले में पुलिस और तस्करों के रिश्तों पर सवाल उठे थे। राजस्थान पुलिस ने 70 हजार रुपए के इनामी और कई मामलों में वांटेड तस्कर कमलसिंह राणा को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में राणा ने दावा किया कि नीमच जिले के कुछ पुलिसकर्मी उसे पुलिस चेकिंग, निगरानी और तस्करी के सुरक्षित रास्तों की जानकारी देते थे। उसने यह भी आरोप लगाया कि कुछ पुलिसकर्मी उसकी अवैध कमाई और संपत्तियों की देखरेख में मदद करते थे। इन खुलासों के बाद तत्कालीन एसपी अमित कुमार तोलानी ने छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। इनमें हेड कांस्टेबल और आरक्षकों को लाइन अटैच करने से लेकर निलंबन तक की कार्रवाई शामिल थी। केस-4: रतलाम की एमडी ड्रग फैक्टरी से मिली पुलिस वर्दी मंदसौर-नीमच के अलावा रतलाम में भी इसी साल एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। चिकलाना क्षेत्र में पुलिस ने एमडी ड्रग बनाने की फैक्टरी पर छापा मारकर 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में ड्रग और उपकरणों के साथ पुलिस की वर्दी तथा एक सब इंस्पेक्टर का पहचान पत्र भी बरामद हुआ। यह आईडी कार्ड रऊफ खान के नाम का बताया गया, जो पहले मंदसौर, नीमच और रतलाम में पदस्थ रह चुके हैं और वर्तमान में सीआईडी भोपाल में तैनात हैं। यहीं से सेना का एक पहचान पत्र भी मिला, जो मुख्य आरोपी दिलावर खान के बेटे के नाम से बनाया गया था। जांच में यह दस्तावेज फर्जी पाया गया। मामले की रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजी जा चुकी है। पुलिस का दावा: मिलीभगत पर होती है कार्रवाई रतलाम रेंज के डीआईजी निमिष अग्रवाल का कहना है कि पुलिस लगातार मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। जहां भी पुलिसकर्मियों की संलिप्तता सामने आती है, वहां विभागीय जांच के बाद निलंबन, वेतन वृद्धि रोकने और बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई की जाती है। डीआईजी के अनुसार चिकलाना मामले में भी संबंधित रिपोर्ट भोपाल भेजी गई है और आगे की कार्रवाई वहीं से की जाएगी। पुलिस का जनता से लगातार संपर्क रहता है और किसी भी तरह की शिकायत मिलने पर उसकी जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाते हैं।

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