Homeविदेशपुतिन की यूरोप को चेतावनी- रूस से टकराव महंगा पड़ेगा:बोले- बाल्टिक सागर...

पुतिन की यूरोप को चेतावनी- रूस से टकराव महंगा पड़ेगा:बोले- बाल्टिक सागर में जहाजों की आवाजाही न रोकें, वरना होर्मुज जैसे हालात बनेंगे

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोपीय देशों को चेतावनी दी है कि रूस से टकराव बढ़ाना उनके लिए महंगा पड़ सकता है। मॉस्को में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पुतिन ने कहा, अगर बाल्टिक सागर में जहाजों की आवाजाही रोकने की कोशिश की गई, तो वहां भी होर्मुज जैसे हालात बन सकते हैं। पुतिन ने कहा कि रूस यूरोप के साथ युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर कोई देश उससे टकराव करता है तो उसे इसके नतीजों के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तनाव बहुत ज्यादा बढ़ा तो किसी की जीत नहीं होगी। बाल्टिक सागर को लेकर क्यों नाराज हैं पुतिन पुतिन ने फिनलैंड और नॉर्वे के PM से बातचीत का बचाव किया पुतिन ने फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे से फोन पर हुई बातचीत का भी बचाव किया। दोनों नेताओं ने इसी हफ्ते उनसे बात की थी। यूरोप के कुछ नेताओं ने रूस से बातचीत करने के उनके फैसले की आलोचना की थी। पुतिन ने कहा कि रूस और यूरोपीय देशों के बीच रिश्ते सुधारने के लिए बातचीत जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि मॉस्को यूरोप के साथ संबंध बेहतर करने की कोशिशों के लिए तैयार है। यूरोप और रूस के बीच क्यों छिड़ा विवाद 1. समुद्र में रूसी जहाजों की नाकाबंदी पश्चिम के प्रतिबंधों से बचने के लिए रूस बिना सही कागजात और पुरानी जहाजों से बाल्टिक सागर के रास्ते तेल बेचता है। यूरोपीय देश इन जहाजों को पर्यावरण और सुरक्षा का हवाला देकर समुद्र में रोकने और जांचने की कोशिश कर रहे हैं। रूस इसे अपने व्यापार पर सीधा हमला मान रहा है। 2. बाल्टिक सागर पर नाटों की निगरानी फिनलैंड और स्वीडन के नाटो में शामिल होने से बाल्टिक सागर के लगभग 90% किनारे नाटो देशों के नियंत्रण में आ चुके हैं। रूस को डर है कि उसके मुख्य समुद्री रास्तों (सेंट पीटर्सबर्ग और कलिनिनग्राद) को यूरोपीय देश कभी भी पूरी तरह बंद कर सकते हैं। 3. कूटनीतिक बातचीत पर यूरोपीय संघ में फूट फिनलैंड और नॉर्वे के नेताओं ने हाल ही में पुतिन से सीधी फोन पर बातचीत की थी। पोलैंड और कुछ यूरोपीय देशों ने इस बातचीत का विरोध किया। उनका मानना है कि युद्ध के दौरान पुतिन से बात करने से यूरोप की एकजुटता कमजोर पड़ती है। 4. समुद्र के नीचे जासूसी का डर यूक्रेन जंग के दौरान बाल्टिक सागर के नीचे बिछी इंटरनेट केबल और गैस पाइपलाइनों को कई बार नुकसान पहुंचा है। इसके बाद रूस और यूरोपीय देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। दोनों एक-दूसरे पर जासूसी और जानबूझकर नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा रहे हैं। इससे इस इलाके में सैन्य तनाव भी बढ़ता जा रहा है। बाल्टिक सागर बंद होने का दुनिया पर असर, 4 पॉइंट्स में… 1. नाकाबंदी हुई तो दुनियाभर में ईंधन महंगा होगा बाल्टिक सागर से होकर दुनिया के बाज़ारों में रूस का लगभग 40% समुद्री तेल हर साल लगभग 5 लाख 70 हजार करोड़ रुपए गुजरता है। अगर इस रास्ते पर कोई नाकाबंदी होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के दाम तुरंत 690 रुपय से ₹1,300 प्रति बैरल तक बढ़ सकते हैं। 2. माल ढुलाई की कीमतें बढ़ने का असर भारत तक तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से माल ढुलाई महंगी हो जाती है। इसका असर केवल यूरोप में ही नहीं, बल्कि भारत तक खाद्य पदार्थों, फर्टिलाइजर और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर पड़ता है। 3. शिपिंग इश्योरेंस महंगा होगा अगर बाल्टिक सागर में तनाव के चलते सुरक्षा जांच सख्त होती है या रास्ते ब्लॉक होते हैं, तो व्यापारी जहाजों को लंबे और महंगे रास्तों जैसे आर्कटिक या अन्य लंबे समुद्री मार्ग का इस्तेमाल करना पड़ेगा। इससे सामान पहुंचने में देरी होगी और शिपिंग इंश्योरेंस महंगा हो जाएगा। 4. बाल्टिक सागर में पर्यावरण का बड़ा खतरा असर यूरोपीय देशों का कहना है कि रूस जिन पुराने जहाजों का इस्तेमाल कर रहा है, बाल्टिक सागर जैसे पतले और उथले समुद्री रास्ते में उनके टकराने या तेल का रिसाव होने का भारी खतरा है। ऐसा होने पर पूरे क्षेत्र का समुद्री इकोसिस्टम तबाह हो सकता है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… सर्बिया में छात्र संगठनों ने चुनाव जीता:पुतिन समर्थक PM पद के उम्मीदवार वुचिच हारे; देश में 2 साल से प्रदर्शन चल रहे सर्बिया में छात्र संगठनों के गठबंधन ‘स्टूडेंट लिस्ट’ ने चुनाव जीत लिया है। रूसी राष्ट्रपति पुतिन के करीबी पूर्व राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिच की पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
Related News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here