दमोह शहर के प्रसिद्ध बूंदा बहू मंदिर के लॉकर और दान पेटी को बुधवार दोपहर न्यायालय के निर्देश पर खोला गया। इस कार्रवाई के बाद एक नया विवाद सामने आया है। मंदिर के आचार्य चंद्र गोपाल पौराणिक ने आरोप लगाया है कि मंदिर के लाकर से सोने के आभूषण नहीं मिले, जबकि पहले मंदिर में सोने के आभूषण मौजूद थे। लॉकर से करीब 150 प्रकार के चांदी और कुछ छोटे सोने के आभूषण मिले हैं। इसमें कुछ अन्य धातु के सामान भी शामिल हैं। इसके अलावा दोपहर से चली दान पेटी में रखी नगदी की गिनती रात करीब 9:00 बजे संपन्न हुई। कुल 4 लाख 80 हजार रुपए कैश दान पेटी से मिला। एक और दान पेटी है, जिसकी चाबी कमेटी ने नहीं दी है। गुरुवार को चाबी प्राप्त करने के बाद उसे भी खोला जाएगा, उसमें भी कुछ नगद राशि रखे होने की बात कही जा रही है। तहसीलदार रॉबिन जैन ने बताया कि जो सोने चांदी के आभूषण प्राप्त हुए हैं, उसकी सूची बनाकर न्यायालय में पेश की जाएगी। ट्रस्ट पर 80 लाख हड़पने का आरोप दरअसल, दो साल पहले न्यायालय के निर्देश पर मंदिर के ट्रस्ट को भंग कर दिया गया था और तहसीलदार को रिसीवर नियुक्त किया गया था। मंदिर से जुड़े लोगों ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर करीब 80 लाख रुपए के गबन का आरोप लगाया था। जांच में कुछ तथ्य सामने आने के बाद न्यायालय ने ट्रस्ट को भंग करने का आदेश दिया था। तब से मंदिर के लाकर और दान पेटी खोलने की मांग की जा रही थी, लेकिन मंदिर कमेटी के सदस्य रिसीवर को चाबियां नहीं दे रहे थे। इसके बाद यह मामला न्यायालय में उठाया गया। न्यायालय ने 7 अगस्त को लाकर और दान पेटी खोलने का निर्देश दिया था, जिसके तहत बुधवार को यह कार्रवाई शुरू की गई। पुजारी ने क्या बताया? आचार्य चंद्र गोपाल पौराणिक ने बताया कि लाकर से चांदी के आभूषण तो मिले हैं, लेकिन सोने का कोई आभूषण नहीं निकला। उन्होंने यह भी कहा कि वे कई वर्षों से मंदिर आ रहे हैं और उन्होंने माता का श्रृंगार सोने के आभूषणों से होते देखा है। बैंक का लॉकर खाली कमेटी ने यह भी बताया है कि कोऑपरेटिव बैंक में भी एक लॉकर है, लेकिन वह खाली पाया गया। आचार्य ने इस बात पर सवाल उठाया है कि कमेटी लॉकर का किराया चुका रही है, जबकि उसमें कुछ भी न होने की बात कही जा रही है। यदि बैंक के लॉकर की चाबी नहीं मिलती तो हम नई चाबी बनवाने का प्रयास करेंगे। कोऑपरेटिव बैंक का लाकर 10 जून 2016 को प्रेमलाल अग्रवाल ने खोला था। उसके बाद से इस लॉकर में क्या रखा गया क्या नहीं? मंदिर कमेटी को इसकी जानकारी नहीं है। अधिकारी क्या बोले? कार्रवाई में शामिल दमोह तहसीलदार रॉबिन जैन ने बताया कि बूंदा बहू मंदिर ट्रस्ट के संबंध में न्यायालय में केस विचारधीन है। न्यायालय ने आदेश दिया था कि लॉकर और दान पेटी खोलकर इसकी सूची तैयार की जाए। इसी के चलते वह मंदिर पहुंचे हैं। बुधवार को जब यह कार्रवाई शुरू की गई तो मंदिर कमेटी से जुड़े लोग वह रजिस्टर लेकर उपस्थित नहीं हुए। जिसमें 2 साल पहले हुई नगद राशि की गिनती और आभूषणों का उल्लेख था। इसलिए अब तहसीलदार की मौजूदगी में दान पेटी की नगद राशि की गिनती हो जाएगी और सभी आभूषणों का हिसाब लिख जाएगा। तब पुराने रजिस्टर से मिलान किया जाएगा। यह रहे मौजूद इस कार्रवाई के दौरान तहसीलदार के साथ आरआई अभिषेक जैन, पटवारी बृजेश पटेल, पटवारी अवधेश प्रताप सिंह, पटवारी हरिओम सोनी, पटवारी प्रज्ञा मिश्रा, के साथ सुषमा विश्वकर्मा की मौजूदगी रही और मंदिर ट्रस्ट की ओर से कीरत सिंह मौजूद रहे।
