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पानी-नाली का मुद्दा उठाया तो ‘मार’ डाला:कागजों में मर चुकी महिला कैमरे पर बोली- मैं जिंदा हूं, 5 महीने से अफसरों के चक्कर लगा रही

साहब, मैं जिंदा हूं… अब तो मान जाओ! क्या मैं आपको कहीं से भी मरी हुई दिख रही हूं? ये कहना है रतलाम जिले के कलालिया गांव की 52 वर्षीय निर्वाचित पंच रहिसाबाई का, जो खुद को जिंदा साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं।
सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित होने के बाद उनका राशन, लाडली बहना योजना की राशि और गैस सब्सिडी बंद हो गई। पंचायत बैठकों में बुलाना भी बंद कर दिया गया। रहिसाबाई का आरोप है कि गांव में पानी और नाली जैसी समस्याएं उठाने के कारण उन्हें निशाना बनाया गया। वहीं सरपंच प्रतिनिधि और सचिव इसे तकनीकी गलती बताते हैं और रिकॉर्ड सुधारने का दावा करते हैं, लेकिन पीड़िता को अब भी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। भास्कर की टीम जब रहिसाबाई से मिलने पहुंचीं तो वह अपने पति जगदीश नाथ के साथ एक और आवेदन तैयार कर रही थीं, जिसका उद्देश्य यह साबित करना था कि वे जीवित हैं। पिछले पांच महीनों में वे तहसील से लेकर जिला स्तर तक कई आवेदन दे चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। रहिसाबाई का आरोप है कि पंचायत बैठकों में पानी, नाली और अन्य बुनियादी सुविधाओं के मुद्दे उठाने से कुछ प्रभावशाली लोग नाराज हो गए और उन्हें परेशान करने की साजिश रची गई। पति जगदीश नाथ का आरोप है कि सरपंच और सचिव की मिलीभगत से समग्र आईडी में रहिसाबाई को मृत दर्ज कर दिया गया। परिवार को इसकी जानकारी तब मिली जब सरकारी योजनाओं का लाभ अचानक बंद हो गया। पंचायत की बैठकों में नहीं बुलाया जाता रहिसाबाई का कहना है कि उन्होंने जनपद, तहसील और पंचायत स्तर पर कई बार पहचान दस्तावेज दिखाकर अपनी स्थिति स्पष्ट की, लेकिन पांच महीने बाद भी रिकॉर्ड पूरी तरह ठीक नहीं हुए। जगदीश नाथ का कहना है कि उनका परिवार लंबे समय से स्थानीय जनप्रतिनिधित्व से जुड़ा रहा है। उनके अनुसार इस घटना का परिवार पर मानसिक प्रभाव पड़ा है और रहिसाबाई लगातार तनाव में हैं। सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज होने का असर रहिसाबाई की जनप्रतिनिधि भूमिका पर भी पड़ा। निर्वाचित पंच होने के बावजूद उन्हें पंचायत बैठकों की सूचना मिलना बंद हो गया। राशन और सरकारी योजनाओं का फायदा बंद रिकॉर्ड में मृत दर्ज होने के बाद परिवार का राशन बंद हो गया। लाडली बहना योजना की राशि भी रुक गई, जिससे घरेलू खर्च प्रभावित हुए हैं। परिवार का कहना है कि योजनाओं का लाभ बंद होने के बाद उन्हें उधार लेकर राशन खरीदना पड़ा। उनके अनुसार सरकारी सहायता उनके लिए आजीविका का महत्वपूर्ण साधन थी। रहिसा के जीवन पर ये असर पड़ा सरपंच प्रतिनिधि-सचिव बोले- ये टेक्निकल मिस्टेक सचिव बापूलाल जाट ने कहा कि केवाईसी प्रक्रिया के दौरान गलत समग्र आईडी दर्ज हो गई थी, जिसे बाद में सुधार दिया गया। योजनाओं का लाभ बहाल होने संबंधी सवाल पर उन्होंने इसे शासन की प्रक्रिया बताया। मृत्यु संबंधी रिकॉर्ड दर्ज होने पर उनका कहना था कि यह त्रुटिवश हुआ होगा और संभव है कि मामला उनके कार्यकाल से पहले का हो।

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