भाई-बहन के उत्साह के पर्व राखी को तीन दिन बचे हैं और शहर के बाजारों में रौनक बढ़ गई है। राजबाडा, मारोठिया, क्लाथ मार्केट, पाटनीपुरा, विजय नगर, स्कीम 78 सहित शहर के प्रमुख बाजारों में राखी, मिठाई, नारियल और गिफ्ट की दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही बढ़ने लगी है। हालांकि इस बार त्योहार की तैयारियों के बीच महंगाई भी जेब पर असर डाल रही है। खासकर शक्कर के भाव में एक महीने में करीब 27 रुपए प्रति किलो की तेजी ने मिठाई और घर में बनने वाले पकवानों का बजट बढ़ा दिया है। करीब एक महीने पहले तक 45 रुपए किलो बिकने वाली शक्कर अब 70 से 72 रुपए किलो तक पहुंच गई है। यानी त्योहार से पहले ही शक्कर करीब 60 फीसदी तक महंगी हो गई है। इसका सीधा असर घरों के किचन से लेकर मिठाई की दुकानों तक दिखाई देने की संभावना है। मिठाई बनाना भी हुआ महंगा राखी पर घरों में मिठाई और पकवान बनाने की परंपरा है। ऐसे में शक्कर के दाम बढ़ने से घरेलू बजट प्रभावित होना तय है। वहीं बाजार की मिठाई में सिर्फ शक्कर ही नहीं, बल्कि दूध, मावा, ड्रायफ्रूट, गैस, श्रम और पैकेजिंग जैसी लागत भी शामिल होती है। ऐसे में कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर तैयार मिठाई के दाम पर भी पड़ सकता है। ‘दैनिक भास्कर’ ने शकर व्यापारियों, मिठाई दुकादारों, ग्राहकों, गृहिणियों से बात की तो महंगाई को लेकर उनका दर्द सामने आया। शरद सोनी ने बताया कि जितना कमा रहा हूं, उससे घर का खर्च पूरा नहीं हो पा रहा है। महंगाई बढ़ती जा रही है, तो गरीब क्या खाएगा? कम से कम हर व्यक्ति की रोजाना आय 1 हजार रु. होनी चाहिए। शारदा पाटिल ने कहा कि महंगाई की वजह से बाजार की रौनक ही चली गई है। रोजगार छीनकर महंगाई बढ़ा दी गई है। आम आदमी का सवाल- त्योहार की मिठास कैसे रहे बरकरार महंगाई के बीच लोगों का कहना है कि त्योहार की खुशियों पर खर्च कम करना आसान नहीं है, लेकिन रोजमर्रा की जरूरतों के बढ़ते खर्च के कारण बजट संभालना चुनौती बन गया है। लोगों की मांग है कि सरकार जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर निगरानी रखे। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि अर्थव्यवस्था में बदलाव के साथ आय और आमदनी भी बढ़ रही है, इसलिए बढ़ती कीमतों के बीच लोगों को अपनी खर्च क्षमता और प्राथमिकताओं के अनुसार आगे बढ़ना होगा। कुल मिलाकर इस बार राखी के बाजार में उत्साह तो पूरा है, लेकिन महंगाई ने खरीदारी का गणित जरूर बदल दिया है। शक्कर के बढ़े दामों का असर मिठाई और घरेलू पकवानों पर कितना पड़ता है, यह त्योहार के अंतिम दिनों में बाजार के भाव से और साफ होगा। शक्कर कारोबारी भरत वैष्णव शक्कर के भाव में 30-40% तक बढ़ोतरी हो सकती है। किलो के भाव में भी इसका असर देखने को मिलेगा, क्योंकि हमारा पूरा व्यापार शक्कर पर ही निर्भर है। मिठाई व्यापारी चेतन का कहना है अगर शक्कर के भाव कम नहीं होते हैं तो मिठाई की कीमत में 30-40% तक बढ़ोतरी होगी, क्योंकि हमारा पूरा काम शक्कर से ही चलता है। मांग बढ़ना सामान्य, लेकिन इतनी तेजी ने बढ़ाई चिंता त्योहारी सीजन में शक्कर की मांग बढ़ना सामान्य है। मिठाई की दुकानों के साथ घरों में भी इसकी खपत बढ़ जाती है। ऐसे में कुछ तेजी स्वाभाविक मानी जाती है, लेकिन 45 से 72 रुपए किलो तक पहुंचना बाजार में चर्चा का विषय बना हुआ है। शक्कर के दाम बढ़ने के पीछे उत्पादन और उपलब्धता, गन्ने की फसल, त्योहारी मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों जैसे कई कारण बताए जा रहे हैं। बाजार में जमाखोरी की आशंका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। एथेनॉल को लेकर भी चर्चा शक्कर की कीमतों में तेजी के बीच गन्ने के इस्तेमाल और एथेनॉल उत्पादन को लेकर भी चर्चा है। कुछ लोगों का मानना है कि गन्ने के एक हिस्से का उपयोग एथेनॉल उत्पादन में होने से शक्कर की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। हालांकि इस संबंध में अलग-अलग पक्षों के अलग तर्क हैं। ऐसे में मौजूदा तेजी के पीछे किसी एक कारण को जिम्मेदार मानना फिलहाल आसान नहीं है। महंगाई के बावजूद बाजार में उत्साह शक्कर और अन्य सामान महंगे होने के बावजूद राखी की खरीदारी पर इसका खास असर नहीं दिख रहा है। त्योहार से पहले बाजारों में ग्राहकी बढ़ी है। बहनों के लिए राखी खरीदने के साथ भाई-बहन एक-दूसरे के लिए उपहार और मिठाई भी खरीद रहे हैं। हालांकि ग्राहक अब खरीदारी करते समय कीमतों की तुलना जरूर कर रहे हैं। पहले जहां त्योहार पर कई चीजें बिना ज्यादा सोचे खरीद ली जाती थीं, वहीं अब लोग बजट बनाकर खर्च करने की बात कह रहे हैं। खास बात यह कि इस बार राखी माह के अंत में हैं। ऐसे में लोग बजट के हिसाब से ही खरीदी कर रहे हैं। सराफा में चांदी की राखियों को लेकर उठाव उधर, इंदौर में सराफा बाजार में ग्राहकों का एक महिला वर्ग वह है जो सालों से भाइयों के लिए चांदी की राखी खरीदता है। सराफा व्यवसायियों का कहना है कि सरकार द्वारा सोना पहनने को मना किया जा रहा है, इसलिए चांदी में उठाव आया है। लोग सोने से परहेज कर रहे हैं, इसलिए चांदी में ज्यादा निवेश और रुचि दिखा रहे हैं। चांदी में राखी की डिजाइनों की वैरायटी भी ज्यादा है, इसलिए हर साल के मुकाबले इस बार इसकी बिक्री ज्यादा है। विजय वर्मा ने बताया कि चांदी की राखियों की मांग ज्यादा रही है। लोगों में चांदी की राखियों को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है। अजय जैन का कहना है कि सीजन उम्मीद से काफी धीमा चल रहा है। राखियों की कीमतें ग्राहकों के बजट से बाहर जा रही है? अभिषेक जैन का कहना है कि हल्के वजन के सोने और चांदी में अच्छा सीजन चल रहा है। पिछले साल के मुकाबले लोगों की चांदी में रुचि ज्यादा है। चांदी के दूसरे आर्टिकल्स की बिक्री भी अच्छी हो रही है।
