इंदौर नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष का दायित्व संभालने के बाद कांग्रेस की वरिष्ठ पार्षद सोनिला मिमरोट ने निगम प्रशासन और भाजपा पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पदभार ग्रहण करने के बाद मीडिया से चर्चा में उन्होंने नगर निगम मुख्यालय की फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर चिंता जताई और विभिन्न मामलों में पारदर्शी जांच की मांग की। मिमरोट ने कहा कि नगर निगम परिसर के विभिन्न विभागों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं दिखाई देती। उन्होंने दावा किया कि यदि किसी प्रकार की आगजनी जैसी घटना होती है तो महत्वपूर्ण दस्तावेजों और रिकॉर्ड को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने आशंका जताते हुए कहा कि नगर निगम में सामने आए विभिन्न विवादों और कथित घोटालों की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। उन्होंने हाल ही में चर्चा में रहे संपत्ति नामांतरण प्रकरण का भी उल्लेख किया। मिमरोट का कहना है कि इस मामले में कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं और पूरे घटनाक्रम की गहन जांच कराई जानी चाहिए, ताकि तथ्य सामने आ सकें और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो सके। गौरतलब है कि हाल ही में कांग्रेस संगठन ने पूर्व नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे की जगह सोनिला मिमरोट को नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किया है। नियुक्ति के बाद उन्होंने औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया और विपक्ष की भूमिका को मजबूती से निभाने का संकल्प जताया। मिमरोट ने कहा कि नगर निगम में जनहित से जुड़े मुद्दों, वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर कांग्रेस लगातार आवाज उठाती रहेगी। उन्होंने नगर निगम प्रशासन से फायर सेफ्टी व्यवस्था की समीक्षा कराने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की मांग भी की। ढोल-ढमाकों के बीच संभाला नेता प्रतिपक्ष का पदभार इसके पूर्व पदभार ग्रहण करने से पहले मिमरोट संविधान की प्रति हाथ में लेकर नेता प्रतिपक्ष कक्ष पहुंची। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच उन्होंने विधिवत अपनी नई जिम्मेदारी संभाली। कार्यक्रम में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, पार्षद और कार्यकर्ता मौजूद रहे। जनता की आवाज बनने का भरोसा पदभार ग्रहण करने के बाद सोनिला मिमरोट ने कहा कि शहर की जनता पानी, सड़क, सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जनता से जुड़े हर मुद्दे को नगर निगम परिषद से लेकर सड़क तक मजबूती के साथ उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका केवल विरोध करने की नहीं, बल्कि जनहित के मुद्दों को प्रभावी ढंग से सामने लाने की भी होती है। नगर निगम के कार्यों पर निगरानी रखते हुए जनता की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे।
