मध्यप्रदेश के मैहर जिले में साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर PHE के रिटायर्ड कर्मचारी से ₹22 लाख की ठगी कर ली। ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस और CBI का अफसर बताकर मानेन्द्र सिंह (69) को 15 दिनों तक डर और निगरानी में रखा। उन्हें लगातार वाट्सएप कॉल पर रखा गया और हर घंटे “WE ARE SAFE” लिखकर भेजने को कहा जाता था, ताकि उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। इस दौरान उनसे और उनकी पत्नी के नाम की चार एफडी तुड़वाई गईं। रकम एक खाते में जमा कराकर आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर करा ली गई। महिला बोली- खाते में करोड़ों रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग ग्राम इटमा कोठार निवासी मानेन्द्र सिंह लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) से टाइमकीपर पद से रिटायर्ड हैं। 5 मई की शाम उनके पास एक महिला का फोन आया। उसने अपना नाम अदिति शर्मा बताते हुए खुद को दिल्ली टेलीकॉम विभाग की अधिकारी बताया। महिला ने कहा कि उनके नाम से दिल्ली में एक बैंक खाता संचालित हो रहा है, जिसका इस्तेमाल करोड़ों रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है। दो घंटे में दिल्ली नहीं पहुंचने पर गिरफ्तारी की धमकी महिला ने दो घंटे में दिल्ली नहीं पहुंचने पर गिरफ्तारी की धमकी दी। बुजुर्ग ने उम्र और खराब स्वास्थ्य का हवाला दिया तो उनकी बात खुद को आईपीएस अधिकारी बताने वाले सुनील कुमार गौतम और सीबीआई टीम लीडर बताने वाले प्रदीप सिंह से कराई गई। ठगों ने मानेन्द्र सिंह को किसी से भी बात न करने और मामले की जानकारी गुप्त रखने के निर्देश दिए। लोकलाज और गिरफ्तारी के डर से बुजुर्ग ने किसी को कुछ नहीं बताया। इसी दौरान ठगों ने उनके बैंक खातों और फिक्स डिपॉजिट (FD) की पूरी जानकारी हासिल कर ली। RBI का फर्जी लेटर भेजकर रकम ट्रांसफर कराई 18 मई को मानेन्द्र सिंह ने अपनी और पत्नी पुष्पा सिंह के नाम की चार एफडी तुड़वाकर ₹22.69 लाख एक खाते में जमा किए। अगले दिन ठगों ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का फर्जी पत्र भेजा और जांच प्रक्रिया का हवाला देकर ₹22 लाख एक निजी कंपनी के खाते में आरटीजीएस से ट्रांसफर करा लिए। जेवर गिरवी रखने को कहा तो हुआ शक पैसे भेजने के बाद भी रकम वापस नहीं आई, लेकिन ठग लगातार संपर्क में बने रहे। 23 मई को उन्होंने संपत्ति की जांच का बहाना बनाकर ₹8 लाख और मांगे। इतना ही नहीं, घर के जेवर गिरवी रखकर रकम जुटाने की सलाह भी दी। यहीं से मानेन्द्र सिंह को शक हुआ। उन्होंने पूरा घटनाक्रम परिवार को बताया। परिजनों ने इसे साइबर ठगी बताते हुए पुलिस से शिकायत करने की सलाह दी। बैंक से जानकारी जुटाने के बाद पहुंचे थाने पीड़ित ने 25 मई को थाने में मौखिक शिकायत दी। इसके बाद बैंक से पैसों के ट्रांजैक्शन की जानकारी जुटाई। 1 जून को लिखित शिकायत देने के बाद अमरपाटन थाना पुलिस ने 2 जून को अदिति शर्मा, सुनील कुमार गौतम और प्रदीप सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और आईटी एक्ट की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली। एसपी अवधेश प्रताप सिंह के निर्देश पर साइबर सेल आरोपियों के मोबाइल नंबर, बैंक खातों और पैसों के ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है। ——————-
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