मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। पटवारी और सज्जन में प्यार वाली नोकझोंक
मध्य प्रदेश कांग्रेस इंदौर से भोपाल तक साइक्लोथॉन का आयोजन कर रही है। इंदौर से यात्रा की शुरुआत हुई तो मंच पर एक रोचक नजारा देखने को मिला। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी एक वाहन पर बने मंच से संबोधित कर रहे थे। उनके पास खड़े कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा बार-बार हाथ उठाकर नीचे मौजूद लोगों से इशारों में कुछ कह रहे थे। इससे पटवारी के भाषण में डिस्टर्ब हो रहा था। उन्होंने भाषण देने के दौरान ही सज्जन वर्मा का हाथ पकड़कर उन्हें ऐसा करने से मना किया। यात्रा जब आगे बढ़ते हुए सोनकच्छ पहुंची, तो वहां सज्जन सिंह वर्मा ने अनजाने में जीतू पटवारी को असहज स्थिति में डाल दिया। अपने संबोधन के बाद उन्होंने कहा- अब मैं माइक मध्य प्रदेश युवक कांग्रेस…। वे ‘अध्यक्ष’ कहने ही वाले थे कि उन्हें तुरंत याद आया कि जीतू पटवारी युवक कांग्रेस नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। इतना सुनते ही मंच और नीचे मौजूद लोगों के बीच हल्की हंसी छूट गई। जीतू पटवारी भी मुस्कुराते हुए सज्जन वर्मा की ओर देखने लगे। इसके बाद सज्जन वर्मा ने अपनी बात संभालते हुए उन्हें मध्य प्रदेश कांग्रेस का युवा अध्यक्ष कहकर संबोधित किया। अब इस पूरे घटनाक्रम पर लोग चुटकी ले रहे हैं। कह रहे हैं कि जीतू पटवारी जहां मुख्यमंत्री बनने के सपने देख रहे हैं, वहीं सज्जन सिंह वर्मा तो उन्हें कांग्रेस संगठन में ही ‘डिमोट’ करने पर उतर आए थे। हालांकि यह महज जुबान फिसलने का मामला था, लेकिन इससे मंच का माहौल कुछ देर के लिए हल्का और खुशनुमा जरूर हो गया। खाली मंच से भाषण, सुनने वाला कोई नहीं
कांग्रेस की साइक्लोथॉन यात्रा के दौरान सोनकच्छ में एक और दिलचस्प नजारा देखने को मिला। यहां यात्रा के स्वागत के लिए एक मंच बनाया गया था। उस समय तक यात्रा वहां पहुंची नहीं थी। मंच पूरी तरह खाली था और नीचे भी भाषण सुनने के लिए कोई मौजूद नहीं था। तभी एक नेता जी ने इस मौके का फायदा उठाया और खाली मंच से ही भाषण देना शुरू कर दिया। जब लोगों ने देखा कि नेता जी अकेले ही संबोधित कर रहे हैं और सामने सुनने वाला कोई नहीं है, तो कई लोगों ने इसका वीडियो बना लिया। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब चटकारे लेकर शेयर किया जा रहा है। लोग इस पर मजेदार टिप्पणियां भी कर रहे हैं। कुछ का कहना है कि हो सकता है यही नेता जी बाद में सोशल मीडिया पर यह पोस्ट करते नजर आएं कि, ‘आज कांग्रेस की विशाल सभा को संबोधित करने का सौभाग्य मिला।’ लोग हटते गए, कांग्रेस का कारवां घटता गया
मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल मगर, लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया…। यह मशहूर शेर आपने जरूर सुना होगा। लेकिन कांग्रेस की साइक्लोथॉन यात्रा में मानो इसका उल्टा ही देखने को मिला। इंदौर से जब यात्रा की शुरुआत हुई, तब कारवां अच्छा-खासा बड़ा नजर आया। लेकिन जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ी, लोग छिटकते गए और कारवां छोटा होता गया। कांग्रेस ने साइक्लोथॉन में करीब दो हजार साइकिलों के शामिल होने का दावा किया था, लेकिन मौके पर दो सौ साइकिलें भी नजर नहीं आईं। यात्रा आगे बढ़ने के साथ यह संख्या और कम होती दिखाई दी। उधर, इंदौर में यात्रा के दौरान गंदगी फैलाने के आरोप में नगर निगम ने कांग्रेस पर जुर्माना भी लगाया। हालांकि कांग्रेस ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि जिस नगर निगम के क्षेत्र में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हो चुकी है, वही अब जनहित के मुद्दों को लेकर निकाली जा रही कांग्रेस की यात्रा के दौरान गंदगी के नाम पर कार्रवाई कर रहा है। वर्दी में झूमे जेल के अधिकारी और सुरक्षाकर्मी
उज्जैन की भैरवगढ़ जेल में फिल्म अभिनेता गोविंदा का लोकप्रिय गीत ‘आपके आ जाने से…’ बजा और उस पर जेल कर्मचारी वर्दी में डांस करते नजर आए। दरअसल, यह मौका जेल अधीक्षक मनोज साहू के जन्मदिन के जश्न का था। वीडियो में डिप्टी जेलर सुरेश गोयल भी वर्दी में फिल्मी धुन पर जेल के सुरक्षाकर्मियों और अन्य अधिकारियों के साथ डांस करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद इस पर सवाल उठने लगे हैं। कई लोग इसे सेवा आचरण नियमों के विपरीत बता रहे हैं। उनका कहना है कि डांस, मस्ती और जन्मदिन मनाने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन वर्दी की गरिमा और उस स्थान की संवेदनशीलता का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। आखिर यह जश्न किसी निजी स्थल पर नहीं, बल्कि जेल परिसर में मनाया जा रहा था। और अब अंदर की बात.. बिन बुलाए मेहमान बन रहे एक आईएएस
एक छोटे जिले से ट्रांसफर होकर बड़े जिले में आए एक आईएएस अधिकारी इन दिनों बिन बुलाए मेहमान बनने की आदत को लेकर चर्चा में हैं। वे सीनियर अफसरों को फोन कर कहते हैं कि श्रीमती आपके यहां डिनर पर आना चाहती हैं। सामने से हामी मिलते ही वे पूरे परिवार के साथ पहुंच जाते हैं। बाद में जब अफसरों के यहां हुए डिनर की चर्चा होती है और कोई पूछ बैठता है, तो वे बड़े सहज अंदाज में कहते हैं- हमें तो दावत पर बुलाया गया था। सरकारी गलियारों में चर्चा है कि सीनियर अफसरों से नजदीकियां बढ़ाने का यह उनका अपना खास तरीका है। इनपुट सहयोग – विजय सिंह बघेल (भोपाल), आनंद निगम (उज्जैन) ये भी पढ़ें –
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