बंगाल की तृणमूल कांग्रेस के बाद अब पंजाब कांग्रेस में टूट के आसार हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष न बनाए जाने से नाराज पूर्व सीएम और जालंधर सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने अपने घर मोरिंडा में कांग्रेस नेताओं के साथ इमरजेंसी मीटिंग की। इसमें 3 मौजूदा विधायक समेत 50 नेता शामिल हुए। मीटिंग के बाद MLA तृप्त राजिंदर बाजवा ने कहा कि सभी ने चन्नी से कहा कि वो हाईकमान से बात करें। वो चाहते हैं पंजाब में कांग्रेस की सरकार बने। हाईकमान से कोई लड़ाई नहीं है। जो फैसला लिया गया है उससे नाराजगी है। वड़िंग प्रधान मंजूरी नहीं। हाईकमान इस फैसले को रिकंसीडर करे। भाजपा के पंजाब प्रधान केवल ढिल्लों ने कहा कि चन्नी अगर BJP में आते हैं तो उनका स्वागत है। भाजपा में जो भी आएगा, वह खुश रहेगा। इधर, गुरदासपुर सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस दौरान वे भाजपा के राज्यसभा सांसद तरूण चुघ के साथ नजर आए। शाह से मिलने के बाद रंधावा ने कहा- पंजाब कांग्रेस के हालात के बारे में चन्नी व राजा वडिंग से पूछें। इतनी मीटिंग करने के बाद भी यह स्थिति आ गई, दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं उन्होंने शाह से मीटिंग पर कहा कि ये पहले से शेड्यूल थी। कांग्रेस आलाकमान ने लुधियाना सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का प्रदेश कांग्रेस प्रमुख का पद बरकरार रखा है। इस फैसले से नेताओं में नाराजगी है। फरवरी 2027 में पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं। चन्नी की मीटिंग में ये बड़े नेता पहुंचे
चन्नी के बुलावे पर MLA तृप्त राजिंदर बाजवा, बरनाला के विधायक काला ढिल्लों, कपूरथला के विधायक राणा गुरजीत, पूर्व डिप्टी सीएम ओपी सोनी, पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू, गुरकीरत कोटली, पूर्व MLA गुरप्रीत कांगड़, नाजर सिंह मानशाहिया, पूर्व विधायक परमिंदर सिंह पिंकी, दविंदर सिंह घुबाया, इंद्रबीर सिंह बुलारिया, लखबीर लक्खा, तरसेम डीसी, दर्शन बराड़, हरमिंदर सिंह गिल, मदनलाल जलालपुर, यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष बरिंदर ढिल्लो, कमलजीत कड़वल और पूर्व सांसद मोहम्मद सदीक, पूर्व विधायक जोगगिंदर पाल, दिनेश बस्सी, दलबीर गोल्डी, पूर्व विधायक पिरमल सिंह और सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह चन्नी के घर पहुंचे। चन्नी की मीटिंग में आए नेताओं ने क्या कहा पूर्व CM चरणजीत चन्नी नाराज क्यों हैं?
अमरिंदर राजा वड़िंग की प्रधान रहने के दौरान कांग्रेस तरनतारन उपचुनाव हारी। फिर निकाय चुनावों में भी कांग्रेस को हार मिली। इसके बाद वड़िंग को हटाने की मांग उठी। इसके बाद कांग्रेस की मीटिंग में चरणजीत चन्नी का नाम चुनाव से पहले प्रदेश में कांग्रेस प्रमुख पद के लिए फाइनल हो गया था। मगर, अचानक इसे बदलते हुए अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को इस पद पर बरकरार रखा गया। चन्नी को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बना दिया गया। चन्नी इससे नाराज हो गए और उन्होंने कांग्रेस हाईकमान का धन्यवाद तक नहीं किया। चन्नी के एक करीबी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया- प्रदेश प्रमुख न बनाए जाने से चन्नी बहुत खफा हैं और अब उन्होंने आर-पार की लड़ाई का फैसला कर दिया है। चन्नी के शक्ति प्रदर्शन के 2 मकसद, एक्सपर्ट से समझें 1. वड़िंग हटाओ, कैप्टन की तरह प्रदेश प्रमुख बनाओ
पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि पंजाब कांग्रेस में एक प्रचलन रहा है कि जो पार्टी प्रमुख होता है, वही सीएम बनता है। कैप्टन अमरिंदर सिंह दोनों बार चुनाव से पहले अध्यक्ष बनाए गए और जब पार्टी ने चुनाव जीता तो उन्हें ही सीएम बनाया गया। इसी कुर्सी पर नजर रखते हुए चन्नी गुट लंबे समय से राजा वड़िंग के विरोध में रहा है, यह किसी से छिपा नहीं है। पार्टी की इंटरनल मीटिंग हो या फिर हाईकमान के सामने सब जगह चन्नी राजा वड़िंग को फेल लीडर बता चुके हैं और उन्हें प्रदेश प्रमुख पद से हटाने की वकालत भी कर चुके हैं। 2017 में जब कांग्रेस की सरकार आई तो इसी तरह कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी कांग्रेस हाईकमान पर दबाव बनाया था कि उन्हें प्रदेश प्रमुख बनाएं। जब प्रताप बाजवा को प्रदेश प्रमुख पद से हटाया गया था। प्रदेश प्रमुख बनने का मकसद साफ होता है कि टिकट बंटवारे में उनकी ही चले और जब विधायक जीतकर आएं तो ज्यादातर विधायक उनके समर्थक हों और उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी का रास्ता साफ रहे। कैप्टन ने इसके लिए जाट महासभा तक को एक्टिव कर दिया था। चन्नी भी कैप्टन के रास्ते पर हैं। वह चाहते हैं कि हाईकमान उन्हें प्रदेश प्रमुख बनाए ताकि अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो राजा वड़िंग ये क्रेडिट न ले सकें कि प्रदेश प्रमुख होने के नाते यह जीत उनकी अगुआई में हुई है। फिर वह सीएम कुर्सी पर भी दावा ठोक सकते हैं। 2. प्रदेश प्रमुख नहीं तो मुझे ‘सीएम चेहरा’ घोषित करो
2022 में नवजोत सिद्धू कांग्रेस के प्रदेश प्रमुख थे और चरणजीत चन्नी मुख्यमंत्री, इसीलिए तब हाईकमान पर दबाव डाला गया कि सीएम चेहरा घोषित करें। इसकी वजह ये थी कि प्रदेश प्रमुख सिद्धू थे और सीएम चन्नी। चन्नी पंजाब कांग्रेस के ट्रेंड से वाकिफ थे कि अगर सिद्धू की प्रदेश प्रमुखगी में चुनाव जीते तो सीएम कुर्सी मिलनी मुश्किल है। इसलिए सिद्धू को उकसाया गया और अंदरूनी तौर पर चन्नी लॉबिंग करते रहे। फिर पहली बार कांग्रेस ने पंजाब में औपचारिक तौर पर चन्नी को सीएम चेहरा घोषित करना पड़ा। माना जा रहा है कि चन्नी उसी पैटर्न पर चल रहे हैं। वह चाहते हैं कि हाईकमान उन्हें प्रदेश प्रमुखगी की कुर्सी दे। अगर ऐसा नहीं होता तो चाहे राजा वड़िंग प्रदेश प्रमुख रहें लेकिन पिछली बार की तरह उन्हें CM चेहरा घोषित किया जाए। पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि कांग्रेस जट्टसिखों को नाराज नहीं करना चाहती थी। इसलिए वड़िंग को नहीं हटाया। इसलिए चन्नी अब पार्टी हाईकमान पर उन्हें सीएम फेस घोषित करने का दबाव बना रहे हैं। चन्नी के पास समर्थक नेताओं की लंबी फौज है। ऐसे में समर्थकों और 31% दलित वोट बैंक के जरिए वह हाईकमान पर दबाव बनाने की कोशिश करेंगे। चन्नी की दोनों मांगें दरकिनार तो क्या रास्ता बचा?
पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि चरणजीत चन्नी पहले तो कांग्रेस पर पूरा दबाव बनाएंगे कि या तो उन्हें अध्यक्ष बनाया जाए या फिर सीएम फेस घोषित किया जाए। अगर दोनों में से कुछ भी नहीं हुआ तो उनके पास प्लान बी है। प्लान बी के तहत वो अपने समर्थकों के साथ नई पार्टी का गठन कर सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो यह कांग्रेस के लिए बड़ा नुकसान माना जाएगा। उनका कहनना है कि चन्नी के साथ एक बड़ा दलित वर्ग जुड़ा है। 2021 में उनके 111 दिन के कार्यकाल से भी अच्छी छवि बनी है। अगर चन्नी बगावत करते हैं या अलग पार्टी बनाते हैं, तो कांग्रेस के पारंपरिक दलित और गरीब तबके में मैसेज जाएगा कि उनके नेता की सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में यह वोट बैंक पूरी तरह से खिसक जाएगा, जिसका सीधा फायदा विरोधी दलों को मिलेगा। चन्नी गुट के दिग्गज नेताओं का इस फैसले पर क्या रवैया
चन्नी गुट के किसी भी नेता ने हाईकमान के फैसले पर कोई धन्यवाद नहीं किया। इनमें MLA राणा गुरजीत, MLA परगट सिंह, पूर्व डिप्टी सीएम ओपी सोनी, पूर्व MLA भारत भूषण आशू प्रमुख नेता हैं। कपूरथला से MLA राणा गुरजीत की एक रील भी सुर्खियों में है, जिसमें उन्होंने ‘पातशाही दा वा रखदे हां, खंडियां दी धार ते नचदे हां, सानू औंदा है बदला लैंणा’ सॉन्ग लगा रखा है। इससे ये कयास लगाए जा रहे हैं कि वह भी चन्नी की लड़ाई में उनके साथ हैं। राणा गुरजीत ने 2022 में AAP की आंधी के बावजूद न केवल अपनी सीट जीती बल्कि अपने बेटे राणा इंदरप्रताप को भी सुल्तानपुर लोधी से निर्दलीय जिता दिया। ******************* ये खबरें भी पढ़ें… पंजाब कांग्रेस में बड़ी बगावत के आसार, चन्नी ने मीटिंग बुलाई, सवाल- क्या पार्टी छोड़ेंगे?; रंधावा भी चुप पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले किए बदलाव को लेकर कांग्रेस में बगावत के आसार बन गए हैं। पूर्व CM चरणजीत चन्नी और सांसद सुखजिंदर रंधावा अमरिंदर राजा वड़िंग के प्रदेश प्रमुख पद में बदलाव न होने से नाराज हैं। यही वजह है कि दोनों नेताओं ने अभी तक हाईकमान से पद मिलने के बाद धन्यवाद तक नहीं कहा। यहां तक कि सोशल मीडिया पोस्ट तक नहीं डाली (पढ़ें पूरी खबर) चंडीगढ़ सांसद मनीष तिवारी कांग्रेस छोड़ सकते हैं, संगठन में बदलाव से नाराज पंजाब कांग्रेस को संगठनात्मक फेरबदल के बाद बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान की ओर से गठित की गईं चुनावी समितियों से चंडीगढ़ के मौजूदा सांसद मनीष तिवारी को बाहर रखा गया है। इस पर मनीष तिवारी की नाराजगी खुलकर बाहर आई है। तिवारी ने साफ तौर पर कहा है कि उन्होंने अपनी जिंदगी के 45 साल इस पार्टी को दिए हैं, लेकिन आज कुछ लोगों की असुरक्षा की भावना के कारण ऐसा फैसला लिया गया है।(पढ़ें पूरी खबर)
