ग्वालियर नगर निगम के अफसर बड़े मेहरबान हैं। कंचरा उठाने का कंपनी को ठेका दिया, पूरा काम नहीं करने के बावजूद 8.28 करोड़ का भुगतान कर दिया। फिर पेनॉल्टी लगाने की याद आई तो 2.28 करोड़ का जुर्माना प्रस्तावित किया लेकिन वसूला नहीं। अब उसी कंपनी को 47.86 लाख रुपए बांटने में जुट गए है। नगर निगम के अफसरों ने भुगतान की फाइल ऑडिट के लिए भेजी तो मिली भगत का खुलासा हुआ। मामला केदारपुर और बुद्धा पार्क लैंडफिल साइट का है, जहां कचरे के पहाड़ खत्म करने का जिम्मा संभालने वाली दया चरण कंपनी JV श्री बांके बिहारी उद्योग, आगरा (ज्वाइंट वेंचर) की गड़बड़ियों पर पर्दा डालकर उसे करोड़ों का फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। हद तो यह है कि स्वच्छ भारत मिशन शाखा के सहायक यंत्री से लेकर वित्त विभाग तक ने इस फाइल को हरी झंडी दे दी थी, लेकिन ऑडिटर्स ने फाइल में 6 गंभीर आपत्तियां दर्ज करते हुए इसे वापस लौटा दिया है। ऑडिट ने इन 6 बिंदुओं पर घेरा EOW ने मांगी जानकारी इस मामले में अब आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) सक्रिय हो गया है। ईओडब्ल्यू ने निगम को पत्र लिखकर इस प्रोजेक्ट और भुगतान से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी है। जिम्मेदार बोले- आरएडी ने आपत्तियां लगाई हैं
हां, आरएडी द्वारा आपत्ति लगाने के बाद 47.86 लाख का भुगतान नहीं हुआ है। चूंकि दया चरण कंपनी द्वारा काम बंद करने के बाद निगम ने दूसरे विकल्प तलाश लिए, इसलिए आपत्ति का निराकरण नहीं कराया गया है।
-संघ प्रिय, आयुक्त ननि फाइल ऑडिट भेजी थी कंपनी पर ₹~2.82 करोड़ की पेनाल्टी का प्रस्ताव है। हाल ही में 47.86 लाख के भुगतान की फाइल चली थी, जिसे ऑडिट विभाग ने आपत्तियां लगाकर लौटा दिया। -शैलेंद्र सक्सेना, सहायक यंत्री स्वच्छ भारत मिशन ननि
