देश में अब उन इलाकों में भी बेटियों के जन्म की संभावना बढ़ रही है, जहां पहले बेटे को प्राथमिकता देने की परंपरा ज्यादा मजबूत थी। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के शुरुआती जिलों में हुए बदलावों पर एक रिसर्च में यह बात सामने आई है। रिसर्च के मुताबिक, इस अभियान से हर 1,000 जन्म पर करीब 15 अतिरिक्त लड़कियों के जन्म का अनुमान है। इसका सबसे ज्यादा असर उन परिवारों में दिखा, जिनकी पहली संतान बेटी थी। ग्रामीण भारत में माध्यमिक शिक्षा के बाद की पढ़ाई पूरी करने में लड़कियां अब भी काफी पीछे हैं। यूनेस्को की नई रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में 11वीं-12वीं की पढ़ाई पूरी करने वाले हर 100 लड़कों के मुकाबले सिर्फ 59 लड़कियां यह स्तर पूरा कर पाती हैं। संतानों में लड़की के जन्म की संभावना 2.1% बढ़ी पॉलिसी इंटरवेंशंस एंड द सेक्स रेशियो एट बर्थ: एविडेंस फ्रॉम इंडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरी और उसके बाद की संतानों में लड़की के जन्म की संभावना 2.1% बढ़ी। पहली संतान बेटी होने पर दूसरी संतान भी बेटी होने की संभावना 3.7 से 5.3% अंक तक बढ़ गई। यानी ऐसे परिवारों में हर 1,000 जन्म पर 37 से 53 अतिरिक्त लड़कियों का अनुमान है। पहली संतान बेटा होने वाले परिवारों में कोई बदलाव नहीं मिला। देश में जन्म के समय लिंग अनुपात 2015-16 में प्रति 1,000 लड़कों पर 919 लड़कियां था, जो अब 930 हो गया है। गोवा, त्रिपुरा, अरुणाचल, छत्तीसगढ़ और केरल इस मामले में बेहतर स्थिति में हैं। कई राज्यों में तेजी से सुधर रहा है अनुपात देश के 757 जिलों के आंकड़ों में 26 जिलों में जन्म के समय प्रति 1 हजार लड़कों पर 1 हजार से अधिक लड़कियां दर्ज की गईं। वहीं, 243 जिलों में यह अनुपात 950 से 1 हजार के बीच रहा। इनमें रुद्रप्रयाग, कपूरथला, बारामूला, पुलवामा, उत्तरी गोवा, जैसलमेर और उडुपी शामिल हैं।
शिक्षा तक पहुंच में लैंगिक समानता शीर्षक वाली रिपोर्ट में 31 निम्न और मध्यम आय वाले देशों में शिक्षा के अंतर का अध्ययन किया गया है। भारत में उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के मामले में कुल अनुपात 100 लड़कों पर 89 लड़कियों का है।
