भोपाल गांधी मेडिकल कॉलेज के इंटर्न डॉक्टर सोमवार को स्टाइपेंड 14,337 रु. से 30 हजार रु. करने की मांग लेकर मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च कर रहे थे। हमीदिया परिसर में पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया।
आगे बढ़ने पर इंटर्न और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद वाटर कैनन चलाया गया। लाठीचार्ज भी हुआ। इसमें 4 डॉक्टर गंभीर रूप से घायल हो गए। एक डॉक्टर की आंख में चोट आई है, दूसरे को इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। तीसरे के पैर में फैक्चर और चौथे के कान के पर्दे को नुकसान पहुंचा है। इंटर्न ने कहा- हम अपराधी नहीं हैं, जो हम पर इतनी बर्बरता दिखाई जा रही है। देर शाम कुछ इंटर्न डॉक्टरों ने हमीदिया में बैरिकेड तोड़कर बाहर निकलने का प्रयास किया। रोकने पर फतेहगढ़ की मुख्य सड़क पर धरने पर बैठ गए। इस बीच, चिकित्सा शिक्षा आयुक्त धनराजू एस. इंटर्न से बात करने कमला पार्क पहुंचे। शेष |
इधर, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने मामले को लेकर स्वास्थ्य कमिश्नर, डीन तथा इंटर्न और जूडा के प्रतिनिधियों को 10 बजे चर्चा के लिए बुलाया है। बैठक में डॉक्टरों की मांग और पुलिस कार्रवाई को लेकर पक्ष रखा जाएगा।
मांग जायज, बर्बरता नहीं दिखानी थी मांग : स्टाइपेंड 30 हजार रुपए करें
इंटर्न स्टाइपेंड 30 हजार रुपए करने की मांग कर रहे हैं। सरकार डेढ़ माह पहले आश्वासन दिया, लेकिन पूरा नहीं किया। मार्च: GMC से मोती मस्जिद तक
मोती मस्जिद चौराहे पर पुलिस ने डॉक्टरों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। भारी संख्या पुलिस बल तैनात किया था। समझाइस बेअसर: लिखित पर अड़े
कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने इंटर्न से बात की। वे नहीं माने। कमला पार्क के पास लिखित आश्वासन को लेकर प्रदर्शन शुरू किया। असर : पुराने शहर की हर गली जाम
लालघाटी, वीआईपी रोड, कमला पार्क होते हुए न्यू मार्केट तक लंबा जाम रहा। करीब 4 घंटे तक वाहन रेंगते रहे।
डॉक्टरों से दिन-रात मरीजों की सेवा की उम्मीद की जाती है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों पर वाटर कैनन और लाठीचार्ज करना गलत है।- डॉ शंकुल द्विवेदी, सदस्य, स्टैंडिंग कमेटी, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन जूडा ने किया हड़ताल का समर्थन
विरोध… इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेंगी
सरकार की कार्रवाई के विरोध में मंगलवार से नियमित ओपीडी और एलेक्टिव ओटी सेवाएं बंद रहेंगी, जबकि मरीजों के हित में इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर सेवाएं जारी रहेंगी।- डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह, अध्यक्ष, जूडा यह घटना हमारे लिए ब्लैक-डे जैसी
अधिकारियों के असंवेदनशील रवैए और पुलिस के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार से यह स्थिति बनी। उन्होंने घटना को डॉक्टरों के लिए ब्लैक डे बताया। दोषियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई करें। -डॉ. राकेश मालवीया, प्रदेश अध्यक्ष पीएमटीए
