कड़क मिजाज, गंभीर चेहरे और टेबल पर रखी फाइलों के ढेर…आमतौर पर किसी IAS या प्रशासनिक अधिकारी की यही छवि दिमाग में बनती है। लेकिन मध्य प्रदेश कैडर की 10 महिला सिविल सेवा अधिकारियों (IAS, राज्य प्रशासनिक सेवा और पुलिस अफसर) ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। इन्हीं में से एक 2015 बैच की IAS अधिकारी और श्योपुर कलेक्टर शीला दाहिमा का म्यूजिक वीडियो सोशल मीडिया पर इन दिनों तेजी से वायरल हो रहा है। 1956 की क्लासिक फिल्म ‘सीआईडी’ के सुपरहिट गाने ‘लेके पहला-पहला प्यार’ के इस नए वर्जन में अफसरों ने अपना टैलेंट दिखाया है। इसमें न सिर्फ IAS दाहिमा की आवाज है, बल्कि कई महिला अफसर अपनी हॉबीज और कलात्मक अंदाज को खुलकर पेश करती नजर आ रही हैं।
भोपाल की नर्सरी में एक दिन में शूट हुआ पूरा वीडियो यह वीडियो ‘Live Your Love’ थीम पर तैयार किया गया था, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक व्यस्तताओं और तनाव के बीच अधिकारियों की व्यक्तिगत रुचियों और रचनात्मकता को सामने लाना था। इस वीडियो की मुख्य गायिका और कंपोजर IAS शीला दाहिमा हैं। ये वीडियो भोपाल की एक नर्सरी में शूट किया गया है। शूटिंग एक दिन में कंप्लीट कर ली गई थी। वीडियो वायरल होने की 3 बड़ी वजहें श्योपुर कलेक्टर बनने के बाद बढ़ी उत्सुकता: 11 अप्रैल 2026 को IAS शीला दाहिमा ने श्योपुर जिले की 26वीं कलेक्टर के रूप में पदभार संभाला। कलेक्टर बनते ही वे मीडिया और जनता की सुर्खियों में आ गईं। हजारेश्वर महादेव मेले में लाइव गायकी: श्योपुर के हजारेश्वर महादेव मेला में आयोजित ‘सावन संध्या’ के दौरान जब मंच से कलेक्टर शीला दाहिमा ने गीत गाए, तो लोगों ने इंटरनेट पर उनकी आवाज और पुराने वीडियोज को तलाशना शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर गलत संदर्भ में शेयरिंग: कई सोशल मीडिया ग्रुप्स और प्लेटफॉर्म्स पर इसे हालिया सरकारी कार्यक्रम का वीडियो बताकर री-सर्कुलेट किया गया, जिससे यह दोबारा ट्रेंड करने लगा। पहले भी गा चुकी हैं कई चर्चित गाने IAS शीला दाहिमा केवल एक प्रशासनिक अधिकारी ही नहीं, बल्कि एक मंझी हुई गायिका भी हैं। उनके यूट्यूब चैनल पर कई गाने पहले से मौजूद हैं। वर्ष 2023 में इनका गाया रुद्राष्टकम काफी पसंद किया गया था। वे बॉलीवुड कवर्स और सिंगल्स जैसे ‘दिल्ली वाली गर्लफ्रेंड’, ‘तेरे बिन सब सूना है’, ‘वो बारिश वाला मौसम’ और ‘सांसों की माला पे सिमरूं मैं’ जैसे गानों को भी वे अपनी आवाज दे चुकी हैं। सोशल मीडिया पर तारीफ के साथ सवाल भी
पॉजिटिव पक्ष: बड़ी संख्या में लोगों और सिविल सेवा अभ्यर्थियों ने इसे “वर्क-लाइफ बैलेंस” का बेहतरीन उदाहरण बताया। लोगों का कहना है कि उच्च पदों पर बैठी महिलाएं 24 घंटे की कठिन प्रशासनिक ड्यूटी के बीच अपनी कला और हॉबीज को जिंदा रखकर समाज को सकारात्मक संदेश दे रही हैं। क्रिटिकल पक्ष: वहीं, कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने प्रशासनिक प्रोटोकॉल और पद की गरिमा का हवाला देते हुए सवाल उठाए कि अधिकारियों को मीडिया लाइमलाइट और रील्स के बजाय मैदानी प्रशासनिक कामकाज पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। UPSC एस्पिरेंट्स में क्रेज: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र इसे “सफलता के बाद का असली जीवन” और स्ट्रेस-फ्री लाइफ का मोटिवेशन मानकर शेयर कर रहे हैं।
