मुंबई के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में काम करने वाली एक महिला इंजीनियर ने अपने साथ हुए उत्पीड़न का खुलासा किया है। महिला का दावा है कि ऑफिस में हिंदू धर्म के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की जाती थीं। इंजीनियर के मुताबिक, ट्रेनिंग सेशन के दौरान टीम लीडर उसे गलत तरीके से छूता था। उसके साथ ऑफिस पेंट्री में भी छेड़छाड़ हुई। महिला के मुताबिक, एक आरोपी ने कहा कि महिलाओं के साथ रेप इसलिए होता है क्योंकि वे बुर्का नहीं पहनतीं। महिला इंजीनियर का बयान नौ FIR में से एक का हिस्सा है, जिसकी जांच SIT कर रही है। FIR में महिला कर्मचारियों से शोषण, जबरन धर्म परिवर्तन की कोशिश, धार्मिक भावनाएं आहत करना, छेड़छाड़ और मानसिक उत्पीड़न जैसे आरोप शामिल हैं। फरार आरोपी निदा को अग्रिम राहत से कोर्ट का इनकार मामले में अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक महिला ऑपरेशंस मैनेजर भी शामिल है। एक अन्य आरोपी निदा खान फरार है। निदा ने अग्रिम जमानत के लिए नासिक सेशंस कोर्ट में अर्जी दी थी लेकिन कोर्ट ने सोमवार को उसे 27 अप्रैल तक राहत देने से इनकार कर दिया। निदा के वकील ने अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई तक अंतरिम सुरक्षा के लिए आवेदन दिया था। इसी बीच, पीड़ितों के वकील ने लिखित जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगने वाला आवेदन दायर किया, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए 27 अप्रैल तक का समय दिया। अब अदालत 27 अप्रैल को अग्रिम जमानत याचिका और अंतरिम राहत याचिका दोनों पर सुनवाई करेगी। पीड़ित इंजीनियर बोली- गुड़ी पड़वा के दौरान छेड़छाड़ हुई इधर पीड़ित महिला इंजीनियर ने 5 आरोपियों पर जून 2025 से मार्च 2026 के बीच लगातार यौन उत्पीड़न, पीछा करने (स्टॉकिंग) और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप लगाए हैं। उसने कहा कि एक आरोपी ने हिंदू देवी-देवताओं पर अपमानजनक टिप्पणी की। महिला कर्मचारी ने आरोप लगाया कि उसका टीम लीडर ट्रेनिंग के बहाने उसे गलत तरीके से छूता था। वहीं, एक अन्य आरोपी ने ऑफिस की पेंट्री में गुड़ी पड़वा के दौरान उसके साथ छेड़छाड़ की।पीड़ित ने यह भी कहा कि उसकी शादीशुदा जिंदगी को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। पीड़ित का दावा- आरोपी सोशल मीडिया पर भी परेशान करते थे पीड़ित के मुताबिक, उत्पीड़न सिर्फ ऑफिस तक सीमित नहीं था, बल्कि आरोपी सोशल मीडिया पर भी उसका पीछा कर रहे थे और परेशान कर रहे थे। उसने कई बार आरोपियों को ब्लॉक करने की कोशिश की, लेकिन स्टॉकिंग नहीं रुकी, जिसके बाद उसे कानूनी मदद लेनी पड़ी। TCS ने इस मामले पर कहा है कि कंपनी लंबे समय से किसी भी तरह के उत्पीड़न और दबाव के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाती है। नासिक ऑफिस में यौन उत्पीड़न के आरोपों में शामिल कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। कंपनी ने यह भी कहा कि शुरुआती जांच में उसे अपने एथिक्स या POSH (यौन उत्पीड़न रोकथाम) चैनलों पर किसी महिला कर्मचारी की तरफ से कोई शिकायत नहीं मिली थी। साथ ही, कंपनी ने आंतरिक जांच के लिए एक ओवरसाइट पैनल बनाने और बाहरी एजेंसियों को शामिल करने की घोषणा की है।
