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जेलेंस्की ने प्रधानमंत्री के बाद अब रक्षामंत्री को भी हटाया:ड्रोन हमलों से रूस को पछाड़ा था, फैसले के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतरे

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रक्षा मंत्री मिखाइलो फेदोरोव को नियुक्ति के सिर्फ छह महीने बाद पद से हटा दिया। इस फैसले के बाद गुरुवार को युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए। राजधानी कीव में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। इसके अलावा ओडेसा, ल्वीव और रूस के हमलों का लगातार सामना कर रहे खारकीव शहर में भी लोगों ने प्रदर्शन किया। खारकीव में 300 से ज्यादा लोग हाथों में तख्तियां लेकर सड़कों पर उतरे और “शर्म करो, शर्म करो” के नारे लगाए। 35 साल के फेडोरोव यूक्रेन के ड्रोन युद्ध कार्यक्रम का सबसे बड़ा चेहरा माने जाते थे। उन्हें यूक्रेन में ड्रोन और रोबोट की मदद से युद्ध लड़ने की रणनीति का प्रमुख समर्थक माना जाता था। उनके हटने से अब यह सवाल उठने लगे हैं कि रूस जैसी बड़ी सेना का मुकाबला करने के लिए यूक्रेन की नई तकनीक और ड्रोन पर आधारित रणनीति आगे भी पहले की तरह जारी रहेगी या नहीं। फेडोरोव को हटाया जाना जेलेंस्की सरकार में बड़े बदलाव का हिस्सा है। इसी फेरबदल में प्रधानमंत्री को भी हटाया गया है। पहले डिजिटल मंत्री थे, फिर बने रक्षा मंत्री रक्षा मंत्री बनने से पहले फेडोरोव यूक्रेन के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन (ई-गवर्नेंस) मंत्री थे। वे कई वर्षों तक जेलेंस्की के सबसे भरोसेमंद तकनीकी सलाहकार भी रहे। जनवरी में रक्षा मंत्री बनने के बाद उन्होंने सेना में नई तकनीक, ड्रोन और रोबोट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ाया। उसी दौरान यूक्रेन के कई पुराने ड्रोन प्रोजेक्ट सफल होने लगे। यूक्रेन ने रूस के अंदर सैकड़ों किलोमीटर दूर तक लगातार ड्रोन हमले किए और कब्जे वाले क्रीमिया को निशाना बनाकर वहां रूसी सेना की आपूर्ति और ठिकानों पर हमले किए। इन सफलताओं से यूक्रेन में लोगों का भरोसा बढ़ा कि नई तकनीक के जरिए रूस का मुकाबला किया जा सकता है। शुरुआत से ही सेना के जनरलों से मतभेद रहे कई रिपोर्ट्स के अनुसार, रक्षा मंत्री फेदोरोव को हटाने के पीछे भ्रष्टाचार या नाकामी नहीं, बल्कि सेना के शीर्ष जनरलों और कमांडर-इन-चीफ ओलेक्सांद्र सिरस्की के साथ उनका गहरा मतभेद था। जनवरी में रक्षा मंत्री बनने के तुरंत बाद से ही फेडोरोव की उनसे बहस होने लगी थी। फेडोरोव का मानना था कि भविष्य का युद्ध ड्रोन, रोबोट और नई तकनीक से लड़ा जाएगा। लेकिन सिरस्की का कहना था कि यह सोच पूरी तरह व्यावहारिक नहीं है। उनका मानना था कि युद्ध जीतने के लिए अब भी सैनिकों को मोर्चे पर जाकर लड़ना पड़ेगा। केवल ड्रोन से युद्ध नहीं जीता जा सकता। दोनों के बीच आपसी बातचीत भी बंद हो गई थी। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कमान के इस टकराव को सुलझाने के लिए सेना के जनरलों का पक्ष लिया और फेदोरोव को हटाने का फैसला किया। रक्षा उद्योग की बड़ी कंपनियां भी नाराज हो गईं फेडोरोव ने हथियार खरीदने की व्यवस्था बदलने की कोशिश की। इससे अरबों डॉलर के रक्षा उद्योग से जुड़े कई ठेकेदार उनके विरोधी बन गए। उन्होंने ब्रेव-1 नाम का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू किया, जिसे लोग ‘हथियारों का अमेजन’ कहते थे। इसके जरिए सैनिक अपनी जरूरत के कुछ हथियार और उपकरण खुद ऑनलाइन चुन सकते थे और मंगा सकते थे। इसके अलावा उन्होंने डॉटचेन नाम का एक और प्लेटफॉर्म भी शुरू किया। इन दोनों सिस्टम की वजह से हथियार खरीदने की पारंपरिक सरकारी प्रक्रिया कमजोर होने लगी। इससे हथियार कंपनियों की लॉबिंग और बंद कमरों में होने वाले रक्षा सौदों पर असर पड़ा। यही वजह थी कि कई बड़े रक्षा ठेकेदार उनके खिलाफ हो गए। सेना के भीतर भी विरोध था सेना के कुछ अधिकारियों का कहना था कि फेडोरोव के पास सैन्य अनुभव नहीं था। उनके आलोचकों का कहना था कि वे युद्ध का अनुभव रखने वाले अधिकारी नहीं, बल्कि अच्छी प्रस्तुति (प्रेजेंटेशन) देने वाले व्यक्ति हैं। उनके कई वरिष्ठ सहयोगी भी पहले डिजिटल मंत्रालय में काम करते थे। वे सेना से नहीं आए थे। इस वजह से भी सेना के भीतर उनके नेतृत्व पर सवाल उठते रहे। फेडोरोव के एक वरिष्ठ सहयोगी ने स्केल्या (Skelya) नाम की हमलावर सैन्य यूनिट की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि उस यूनिट को लड़ाई में भारी नुकसान हुआ। इसके जवाब में स्केल्या यूनिट ने तंज कसते हुए कहा कि अगर उन्हें युद्ध की इतनी समझ है तो वे खुद मोर्चे पर जाकर हमला करके दिखाएं। यह विवाद भी काफी चर्चा में रहा। रक्षामंत्री की लोकप्रियता भी परेशानी बन गई राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि फेडोरोव की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही थी। वे ड्रोन कार्यक्रम का चेहरा बन चुके थे और लोगों के बीच काफी लोकप्रिय थे। कीव स्थित स्वतंत्र थिंक टैंक पेंटा सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज के प्रमुख वोलोदिमिर फेसेन्को ने कहा, “जेलेंस्की चाहते हैं कि सरकार में सबसे बड़ा चेहरा वही बने रहें।” फेसेन्को ने यह भी कहा कि फेडोरोव को विपक्षी नेताओं का भी समर्थन मिलने लगा था। संभव है कि जेलेंस्की ने इसे भी अपने लिए राजनीतिक खतरे के रूप में देखा हो। यूक्रेन की समाचार वेबसाइट उक्राइन्स्का प्रावदा के मुताबिक, राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अपने राजनीतिक सहयोगियों से कहा कि फेडोरोव, सेना के वरिष्ठ अधिकारियों और रक्षा उद्योग के बीच बढ़ते विवाद अब उनके लिए संभालना मुश्किल हो गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, यही वजह बनी कि आखिरकार जेलेंस्की ने उन्हें रक्षा मंत्री के पद से हटाने का फैसला किया।

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