मध्य प्रदेश सरकार की सीएम हेल्पलाइन-181 को आम लोगों की शिकायतों के समाधान का बड़ा मंच माना जाता है। लेकिन मऊगंज में इसी व्यवस्था के रिकॉर्ड की जांच करते हुए दैनिक भास्कर को ऐसे तथ्य मिले हैं, जिन्होंने शिकायतों के दर्ज होने और उनके निपटारे की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया कि शिकायतों के निपटारे से बचने और रैंकिंग सुधारने के लिए पुलिस खुद ही शिकायतकर्ता बन गई। अलग-अलग मोबाइल नंबरों से शिकायतें दर्ज की गईं और बाद में उनका समाधान (निपटारा) भी कर दिया गया। जब शुरुआती स्तर पर मामला सामने आया तो पुलिस ने इससे दूरी बना ली, लेकिन रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो पूरे मामले को संदेह में डालते हैं। डायल-112 चालक प्रवेश चतुर्वेदी, डायल-112 कर्मचारी कृष्णा कुशवाहा और हवलदार विवेक यादव के नाम भी इस रिकॉर्ड में सामने आए हैं। भास्कर की जांच में सामने आए दस्तावेज और शिकायतों के रिकॉर्ड पर पढ़िए यह रिपोर्ट… 233 शिकायतें सिर्फ 21 मोबाइल नंबर से दर्ज हुईं दैनिक भास्कर ने सीएम हेल्पलाइन की 233 शिकायतों के रिकॉर्ड की जांच की। इसमें सामने आया कि ये शिकायतें सिर्फ 21 मोबाइल नंबरों से दर्ज की गई थीं। जब शिकायत नंबर, मोबाइल नंबर, शिकायतकर्ता का नाम और शिकायत दर्ज होने का समय मिलाया गया तो एक ऐसा पैटर्न दिखाई दिया, जो सामान्य नहीं माना जा सकता। कई नामों पर एक जैसी शिकायतें दर्ज मिलीं, जबकि कुछ मामलों में एक ही नंबर से कुछ ही मिनटों के भीतर लगातार कई शिकायतें दर्ज कर दी गईं। पहले पढ़िए ये 16 शिकायतें दर्ज शिकायतें सामान्य प्रक्रिया से अलग मिलीं सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज करने के लिए घटना का विवरण और शिकायतकर्ता की जानकारी देना जरूरी होता है। लेकिन जांच में सामने आया कि कई मामलों में यह सामान्य प्रक्रिया सही तरीके से नहीं अपनाई गई। 4 केस से पैटर्न समझ आया केस-1 : जिस व्यक्ति की शादी नहीं हुई, रिकॉर्ड में उसकी 20 वर्षीय बेटी लापता पड़ताल का सबसे चौंकाने वाला मामला अंकित चौरसिया का सामने आया। उनके नाम पर दर्ज एक शिकायत में दावा किया गया था कि उनकी 20 वर्षीय बेटी अंशिका चौरसिया स्कूल जाने के बाद लापता हो गई है और पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं कर रही है। लेकिन जब दैनिक भास्कर की टीम अंकित चौरसिया तक पहुंची तो उन्होंने बताया कि उनकी अभी तक शादी ही नहीं हुई है। ऐसे में 20 वर्षीय बेटी होने का सवाल ही नहीं उठता। यहीं से रिकॉर्ड और हकीकत के बीच अंतर की पहली बड़ी परत खुली। नाम : अंकित चौरसिया
मोबाइल नंबर : 9151947381 शिकायत क्रमांक : 38673403, 38673355, 38673329, 38673316, 38673289, 37987201, 37987174, 37987134, 37987092, 37987094, 37479005, 37478760 और 37478593 केस-2 : चार मिनट में पांच शिकायतें सौरभ द्विवेदी के नाम पर दर्ज शिकायतों का रिकॉर्ड भी कई सवाल खड़े करता है। रिकॉर्ड के मुताबिक उनके नाम पर महज चार मिनट के भीतर पांच अलग-अलग शिकायतें दर्ज हो गईं। पहली शिकायत सुबह 11:30 बजे दर्ज हुई। इसके बाद अगले तीन मिनट में चार और शिकायतें सिस्टम में अपलोड कर दी गईं। यानी महज चार मिनट के भीतर पांच शिकायतें सिस्टम में अपलोड हो गईं। नाम : सौरभ द्विवेदी
मोबाइल नंबर : 8303851057 शिकायत क्रमांक : 38687509, 38687518, 38687522, 38687533, 38687544 केस-3: 6 मिनट में पांच शिकायतें अनीता साकेत के नाम पर दर्ज शिकायतों में भी इसी तरह का पैटर्न दिखाई दिया। रिकॉर्ड के मुताबिक उनके नाम पर महज छह मिनट के भीतर पांच अलग-अलग शिकायतें दर्ज कर दी गईं। पहली शिकायत सुबह 5:01 बजे दर्ज हुई, जबकि अगले कुछ ही मिनटों में चार अन्य शिकायतें भी सिस्टम में अपलोड हो गईं। नाम : अनीता साकेत
मोबाइल नंबर : 6387975351 और 9399069926 शिकायत क्रमांक : 38617942, 38617944, 38617947, 38617950 और 38617952 केस-4 : रिकॉर्ड में सामने आए पुलिसकर्मी और कर्मचारियों के नाम जांच के दौरान पुलिस विभाग से जुड़े कुछ कर्मचारियों के नाम भी रिकॉर्ड में सामने आए। इनमें हवलदार विवेक यादव के नाम पर पांच शिकायतें दर्ज मिलीं। इसके अलावा डायल-112 से जुड़े कर्मचारी प्रवेश चौबे और कृष्णा कुशवाहा के नाम भी दस्तावेजों में दर्ज हैं। वहीं थाना प्रभारी की सरकारी गाड़ी चलाने वाले निजी चालक दयाशंकर तिवारी की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। रिकॉर्ड के अनुसार कुछ मामलों में वह गवाह के रूप में भी सामने आया है नाम : विवेक यादव (हवलदार)
मोबाइल नंबर : 8004277276 और 9425906016 शिकायत क्रमांक : 38686662, 38686680, 38686696, 38686732 और 38686716 16 नामों का रिकॉर्ड खंगालने पर नाम बदलते रहे, लेकिन पैटर्न नहीं (नोट : इन सभी बिंदुओं की जांच जारी है।) हवलदार विवेक यादव को किया लाइन अटैच दैनिक भास्कर द्वारा मामला सामने लाए जाने के बाद पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र कुमार जैन ने हवलदार विवेक यादव को लाइन हाजिर कर दिया है। वहीं रीवा जोन के पुलिस महानिरीक्षक गौरव राजपूत ने पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है। उनका कहना है कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
