सोलह साल पहले एक लाख रुपए में प्लॉट खरीदा। पाई-पाई जोड़कर दो बार में पूरी राशि भी दे दी, लेकिन आज तक न तो प्लॉट मिला और न ही उसकी रजिस्ट्री हुई। इसके लिए जेपी नगर निवासी कमला पत्नी प्रेमनारायण स्वर्णकार पिछले छह साल में 19 बार जनसुनवाई में आवेदन दे चुकी हैं। हर बार शिकायत के बाद जांच होती रही, लेकिन उन्हें न प्लॉट मिला और न ही आरोपी के खिलाफ कार्रवाई हुई। 19वीं बार भी उनकी शिकायत जांच के लिए भेज दी गई। महिला ने मंगलवार को जनसुनवाई में एडीएम सुमित पांडे से कहा कि उसने वर्ष 2010 में विनोद कुशवाह से एक लाख रुपए में प्लॉट खरीदा था। दो बार में पूरी राशि दी, लेकिन 16 साल बाद भी प्लॉट का कब्जा नहीं मिला। न ही बिल्डर ने प्लॉट की रजिस्ट्री कराई। महिला का आरोप है कि सूखीसेवनिया पुलिस आरोपी विनोद कुशवाह को बचाने में लगी है। पुलिस कई बार उसके बयान ले चुकी है। जमा रसीदों की कॉपी, बैंक स्टेटमेंट और अन्य दस्तावेज भी लिए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। कमला ने बताया कि वर्ष 2020 से अब तक वह 19 बार जनसुनवाई में शिकायती आवेदन दे चुकी हैं। मंगलवार को जनसुनवाई में कुल 163 लोगों ने शिकायती आवेदन पेश कर मदद की गुहार लगाई। सभी की जांच के निर्देश दिए गए हैं। ईपीएस से निकाले गए 8 बच्चों का नहीं हुआ री-एडमिशन
मंगलवार को जनसुनवाई में नाजिया हसीब ने शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि वह पिछले दो महीने से डीईओ और कलेक्टोरेट के चक्कर काट रही हैं, लेकिन ईस्टर्न पब्लिक स्कूल से निकाले गए 8 बच्चों का न तो री-एडमिशन किया गया है और न ही स्कूल प्रबंधन पर कोई कार्रवाई हुई है। सीनियर एससी छात्रावास से 4 छात्रों को निकाला, कार्रवाई की गुहार सीनियर अनुसूचित जाति बालक छात्रावास, कोलार रोड के छात्र अमन सिसोदिया और अमित बारेला ने शिकायत में बताया कि 8 अगस्त को चार छात्रों को छात्रावास से निकाल दिया गया। छात्रों का आरोप है कि खाने को लेकर वार्डन ने अपने हिसाब से मेन्यू तय किया है। छात्रों के अनुसार, वार्डन ने उनसे कक्षा 9वीं के छात्रों को पढ़ाने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि वे स्वयं 12वीं के छात्र हैं, इसलिए कक्षा 9वीं के छात्रों को नहीं पढ़ा सकते। इस पर वार्डन ने उन्हें यहां से जाने के लिए कह दिया। आरोप है कि 8 अगस्त की रात करीब 8 बजे उन्हें छात्रावास से बाहर कर दिया गया। छात्रों ने सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज कराई है। इसके पहले वे सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास के यहां भी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
