Homeमध्यप्रदेशग्वालियर की खादी से लाल किले तक तिरंगे का सफर:1930 में चरखे...

ग्वालियर की खादी से लाल किले तक तिरंगे का सफर:1930 में चरखे से शुरू हुआ, अब 18 राज्यों में पहुंच रहा राष्ट्रीय ध्वज

महात्मा गांधीजी के चरखा आंदोलन और स्वदेशी की भावना से वर्ष 1930 में शुरू हुआ ग्वालियर की मध्यभारत खादी संघ का सफर आज राष्ट्रीय ध्वज तक पहुंच चुका है। यहां तैयार तिरंगा लाल किले की प्राचीर के साथ देश के कई महत्वपूर्ण सरकारी भवनों पर भी फहराया जा चुका है। 2016 में संस्था को निर्धारित मानकों के अनुरूप राष्ट्रीय ध्वज बनाने की मंजूरी मिली थी। अब ग्वालियर में तैयार तिरंगे की सप्लाई देश के करीब 18 राज्यों में हो रही है। 2016 में मिली मंजूरी, पहला तिरंगा पहुंचा लाल किले मध्य भारत खादी संघ की शुरुआत 1930 में गांधीजी के चरखा आंदोलन से प्रभावित होकर हुई थी। संस्था का उद्देश्य खादी, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के विचार को बढ़ावा देना था। इसी दौरान यहां कपड़े और झंडे तैयार किए जाने लगे। संस्था के अध्यक्ष वासुदेव शर्मा के मुताबिक राष्ट्रीय ध्वज को निर्धारित मानकों के अनुरूप बनाने के लिए पहले भी प्रयास हुए, लेकिन अनुमति नहीं मिल सकी। लगातार कोशिशों के बाद वर्ष 2016 में मंजूरी मिली। इसके बाद तैयार किया गया पहला मानकों वाला तिरंगा लाल किले पर फहराया गया। ग्वालियर में बने झंडे सचिवालय और हाईकोर्ट जैसी इमारतों पर भी लगाए जा चुके हैं। राष्ट्रीय पर्वों पर एक करोड़ से ज्यादा का कारोबार राष्ट्रीय ध्वज की मांग बढ़ने के साथ संस्था का कारोबार भी बढ़ा है। शुरुआती दौर में कारोबार करीब 15 से 20 लाख रुपए का था। अब स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस को मिलाकर यह एक करोड़ रुपए से ज्यादा पहुंच जाता है। इस साल अब तक करीब 60 लाख रुपए के तिरंगे बेचे जा चुके हैं। 18 राज्यों में सप्लाई, इस बार 70-80 ऑर्डर संस्था के मुताबिक ग्वालियर में तैयार तिरंगे अब मध्यप्रदेश के अलावा करीब 18 राज्यों में भेजे जा रहे हैं। इस स्वतंत्रता दिवस पर करीब 70 से 80 ऑर्डर मिले हैं। त्योहार नजदीक होने के कारण इन्हें समय पर पूरा करना चुनौती बना हुआ है। संस्था का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार मांग बढ़ी है। ‘हर घर तिरंगा’ जैसे अभियानों से भी राष्ट्रीय ध्वज के प्रति लोगों की रुचि बढ़ी है। ग्वालियर के इतिहास से जुड़ी है संस्था मध्य भारत खादी संघ की नींव रखने वालों में बाबू तख्तमल जैन का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। वे मध्यभारत के प्रथम मुख्यमंत्री भी रहे। संस्था के शुरुआती दौर से ही खादी और स्वदेशी को बढ़ावा देने का काम किया गया। आज जब ग्वालियर में तैयार तिरंगा लाल किले की प्राचीर पर लहराता है, तो उसके साथ शहर की पहचान भी देशभर में पहुंचती है। चरखे से शुरू हुआ यह 86 साल का सफर अब अशोक चक्र वाले तिरंगे तक पहुंच चुका है। ये खबर भी पढ़ें… MP में तिरंगा यात्रा, भोपाल में 350 नावों पर लहराया स्वतंत्रता दिवस से पहले मध्य प्रदेश देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत गुरुवार को भोपाल, इंदौर, ओंकारेश्वर, उज्जैन, मंडला, डिंडोरी, बैतूल, मैहर, बालाघाट समेत कई जिलों में तिरंगा यात्राएं निकाली गईं। भोपाल के बड़ा तालाब स्थित बोट क्लब पर विशाल ‘नौका तिरंगा यात्रा’ निकाली गई। 350 से अधिक तिरंगा सजी नावों के साथ जल, थल और आसमान में राष्ट्रध्वज की छटा दिखाई दी।पूरी खबर पढ़ें

Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
Related News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here