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गूगल से फोटो बनाई, रेलवे में नौकरी हासिल की:सीबीआई ने बिहार के दो जालसाजों को पकड़ा, जबलपुर मंडल की बायोमैट्रिक जांच में खुलासा

रेलवे में फर्जीवाड़ा और जालसाजी करते हुए नौकरी पाने वाले दो युवकों को जबलपुर सीबीआई की टीम ने गिरफ्तार किया है। दोनों युवक बिहार के मुंगेर जिले के रहने वाले हैं। युवकों के बीच नौकरी को लेकर 6 लाख रुपए का सौदा हुआ था। जबलपुर सीबीआई ने धोखाधड़ी और जालसाजी करने वाले दोनों आरोपियों को बिहार से गिरफ्तार कर जबलपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया है। 2024 में निकली थी भर्ती
भारतीय रेलवे में 2024 में अलग-अलग पदों के लिए करीब 8 हजार से अधिक भर्तियां निकली थी। इसमें देश भर से अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इसमें टेक्नीशियन का पद भी था। मुंगेर निवासी मुकेश कुमार ने इस पोस्ट के लिए फार्म भरा। मुकेश ने पड़ोस के ही रंजीत कुमार जो कि कोचिंग पढ़ाया करता है, उससे संपर्क किया। मुकेश ने डील की कि उसकी नौकरी लग जाती है, तो 6 लाख रुपए नकद देगा। रुपए की लालच में आ गया रंजीत
मुकेश ने रंजीत कुमार से परीक्षा में बैठने से लेकर नौकरी लग जाने तक के लिए 6 लाख रुपए देने की बात कही। वह लालच में आ गया और मुकेश के स्थान पर बैठने के लिए तैयार हो गया। अप्रैल 2024 में फार्म भरा गया। जहां दिसंबर में पटना सीबीटी में परीक्षा हुई। एग्जाम पास करन के बाद दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल के लिए भोपाल बुलाया गया। यहां पर भी रंजीत कुमार, मुकेश बनकर पहुंचा। मेडिकल कोटा अस्पताल में हुआ। जुलाई 2025 में पैनल बैठी। जहां मुकेश का सिलेक्शन हो गया। सेक्शन इंजीनियर ऑफिस में हुई ज्वाइनिंग
मुकेश की टेक्नीशियन के पद पर नौकरी लग चुकी थी। सितंबर 2025 में उसकी ज्वाइनिंग हो गई। इस दौरान मुकेश कुमार ने दमोह, सागर और जबलपुर में काम किया। अक्टूबर 2025 में ट्रेनिंग के लिए मुकेश कुमार को प्रयागराज भेज दिया गया। बायोमैट्रिक में हुआ फेल
रेलवे में नियम है कि नई भर्ती वाले कर्मचारियों का एक साल के भीतर बायोमैट्रिक के जरिए सत्यापन होता है। 14 नवंबर 2025 को जब टेस्ट हुआ तो उसमें मुकेश के अंगूठे और चेहरे का मिलान नहीं हो पाया और वह फेल हो गया। इसके बाद बिना जबलपुर में रुके मुकेश वहां से गायब हो गया और सीधे बिहार आ गया। जबलपुर मंडल की ओर से इस फर्जीवाड़े में सीबीआई को लिखित में शिकायत दी गई, जिसके बाद 2 दिसंबर 2025 को मुकेश कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। गांव में मिले दोनों
रेलवे की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने के बाद सीबीआई ने फर्जीवाड़े की जांच शुरू की। एसपी एसके राठी के निर्देश पर डीएसपी ए.के मिश्रा की टीम ने जांच करना शुरू किया। लोकेशन के आधार पर जबलपुर सीबीआई की टीम बिहार के मुंगेर पुहंची, जहां पर मुकेश हाथ लगा। पूछताछ के दौरान उसने बताया कि रंजीत कुमार जो पड़ोस में ही रहता है। उससे इस नौकरी के लिए 6 लाख रुपए में सौदा हुआ था। मुकेश की निशानदेही पर सीबीईआई ने रंजीत कुमार को भी मुंगेर से पकड़कर जबलपुर लेकर आई। 2 मार्च 2026 में दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। गूगल से तैयार की फोटो
नौकरी के इस फर्जीवाड़े में सीबीआई को सबसे चौंकाने वाली जानकारी तब हाथ लगी, जब फाॅर्म में लगी फोटो देखी। पूछताछ के दौरान रंजीत ने बताया कि जो फोटो लगाई गई थी, उसे गूगल से तैयार किया था, जिसमें रंजीत-मुकेश की मिक्सिंग की थी। प्लान था कि अगर पहचान में आते तो कह सकते थे कि ये पुरानी फोटो है और पहले इसी तरह से नजर आते थे।
सीबीआई ने जांच में पाया कि मुंगेर निवासी मुकेश कुमार की कोचिंग चलती है, जहां वह कई लोगों को पढ़ाया करता है। सीबीआई अब यह भी जांच कर रही है, कि क्या मुकेश कुमार ने किसी और शख्स की भी परीक्षा में बैठकर मदद करते हुए नौकरी लगवाई है। ये खबर भी पढ़ें… एमपी में पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में व्यापमं जैसा घोटाला मध्यप्रदेश में जिस तरह से व्यापमं की परीक्षाओं में असली कैंडिडेट्स की जगह सॉल्वरों ने पेपर दिया था, उसी तर्ज पर दो साल पहले हुई पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में भी सॉल्वर शामिल हुए हैं। इसका खुलासा एग्जाम देने वाले कैंडिडेट्स के दस्तावेजों की जांच के बाद हुआ है। अब तक अलग-अलग जिलों में फर्जीवाड़ा करने वाले 19 आरक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं।पूरी खबर पढ़ें

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