बारिश का पूरा सीजन बीतने वाला है। इस साल जिले के सारे नदी-तालाब खाली हैं। आंकड़ों के हिसाब से भले ही औसत बारिश का 75-80% कोटा पूरा हो गया हो, पर तेज बारिश नहीं होने से एक बार भी शिप्रा नदी उफान पर नहीं आई। छोटे बड़े कुल 54 डेम-तालाबों में भी सिर्फ 37% पानी जमा हो सका। इधर, उज्जैन शहर की प्यास बुझाने वाले गंभीर डेम में तो सिर्फ 110 दिन की सप्लाई का पानी ही बचा है। अगले एक सप्ताह 30 सितंबर को अधिकृत रूप से बारिश का सीजन खत्म हो जाएगा। यदि इस एक सप्ताह में तेज बारिश नहीं हुई तो जिले में इस बार भीषण जलसंकट झेलने की नौबत बनेगी। गंभीर डेम में 2250 एमसीएफटी के बजाय 754 एमसीएफटी पानी ही है। इसमें भी 100 एमसीएफटी डेड स्टोरेज का है, जो सप्लाई योग्य नहीं है। यानी जलप्रदाय के लिए 654 एमसीएफटी पानी ही बचा है, जो रोज 8-9 एमसीएफटी पानी सप्लाई होने से औसतन 110 ही चल सकेगा। बारिश की स्थिति
जिले की सामान्य औसत बारिश 36 इंच (लगभग 910 एमएम) मानी जाती है। इस सीजन में अब तक 693 एमएम 27.3 इंच ही बारिश हुई, जो 75%-80% है। इधर, बारिश का अधिकृत समय 1 जून से 30 सितंबर तक है। इस हिसाब से बारिश के सीजन के सिर्फ 6 दिन शेष बचे है। तेज बारिश नहीं होने से बनी स्थिति
सीजन में तेज बारिश नहीं हो सकी। इससे यह स्थिति बनी। -शुभम अग्रवाल, ईई जल संसाधन विभाग सबसे ज्यादा इंदौख डेम में 69 प्रतिशत पानी भराया
डेम या तालाब की जिले में एक भी वृहद परियोजना नहीं है। बड़े डेम में सिर्फ दो मध्यम योजना के तहत अरनिया बहादुरपुर तालाब में सिर्फ 27 प्रतिशत और इंदौख बैराज में 28.28 मीटर घनमीटर क्षमता में से 69 प्रतिशत पानी जमा हो गया। शेष 52 लघु योजना के स्टॉप डेम व तालाब में भी अब तक सिर्फ 37 प्रतिशत पानी जमा हो सका। 63 प्रतिशत डेम तालाब खाली हैं। आगे क्या : इस साल सीजन के बाद भी होगी बारिश
पश्चिमी विक्षोभ के कारण 26 से 30 सितंबर तक बारिश होने के आसार हैं। जिले में 15-20 एमएम बारिश की उम्मीद हैं। हालांकि अलनीनो के कारण बारिश का सीजन खत्म होने के बाद भी इस साल फरवरी तक बारिश होती रहेगी।- डॉ. एसएस तोमर, तकनीकी अधिकारी व मौसम विशेषज्ञ कृषि महाविद्यालय सीहोर
