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खंडवा विधायक के जाति प्रमाण-पत्र का मामला:हाईकोर्ट ने कांग्रेस प्रत्याशी के दस्तावेज अमान्य किए; अब दो हेडमास्टर देंगे गवाही

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर खंडवा विधानसभा चुनाव 2023 को लेकर दायर चुनाव याचिका में गुरुवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। यह याचिका कांग्रेस प्रत्याशी रहे कुंदन मालवीय ने भाजपा विधायक कंचन तनवे के खिलाफ दायर की है। दरअसल, याचिकाकर्ता मालवीय ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि विधायक तनवे का जाति प्रमाण पत्र नियमों के अनुरूप नहीं है। उनका कहना है कि जाति प्रमाण पत्र में पिता का नाम होना चाहिए, जबकि संबंधित प्रमाण पत्र पति के नाम से जारी किया गया है। इसी आधार पर उन्होंने चुनाव को शून्य घोषित करने की मांग की थी। अब जान लिजिए कि सुनवाई में क्या हुआ सुनवाई के दौरान डिफेंस विटनेस की जिरह पूरी हुई। इसी दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कुछ दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत कर उन्हें साक्ष्य के रूप में दर्ज करने का अनुरोध किया गया। इस पर हाईकोर्ट ने प्रस्तुत दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने पाया कि ये दस्तावेज आरटीआई के तहत सहायक लोक सूचना अधिकारी द्वारा जारी प्रमाणित प्रतियां हैं, जो प्राथमिक साक्ष्य नहीं मानी जा सकतीं। साथ ही, इन्हें द्वितीयक साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने के लिए न तो कोई औपचारिक आवेदन दिया गया और न ही मौखिक अनुरोध किया गया। इसके चलते एसडीओ द्वारा 29 नवंबर 2007 को जारी जाति प्रमाण पत्र और तनवे का जिला पंचायत चुनाव का नामांकन पत्र को एग्जिबिट के रूप में चिन्हित नहीं किया गया और कोर्ट ने इन्हें साक्ष्य के रूप में पढ़ने से भी इंकार कर दिया। अब दो हेडमास्टर देंगे हाईकोर्ट में गवाही कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई के लिए दो शासकीय स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को गवाह के रूप में तलब करने के निर्देश दिए हैं। इनमें प्राइमरी स्कूल पालसूद माल और मिडिल स्कूल खैगांव के हेडमास्टर शामिल हैं। इन स्कूलों से विधायक ने शिक्षा प्राप्त की थी। इन्हें 6 और 7 मई 2026 को अदालत में उपस्थित होने के लिए समन जारी किए जाएंगे। अगली सुनवाई 6 मई को तय की गई है। यह है पूरा मामला…जाति प्रमाण पत्र में पिता की जगह पति का नाम जानकारी के अनुसार, कंचन मुकेश तनवे जब जिला पंचायत का चुनाव लड़ रही थीं, तब रिटर्निंग ऑफिसर ने उन्हें नोटिस दिया था। बताया गया था कि जाति प्रमाण पत्र प्रॉपर नहीं है। तब उन्होंने शपथ-पत्र दिया। इसमें समय नहीं होने का हवाला दिया। इसे स्वीकार करते हुए चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, उसके बाद वह जिला पंचायत अध्यक्ष बन गईं। इसके बाद जब कंचन तनवे ने विधानसभा चुनाव लड़ा, तो उन्होंने दोबारा वही जाति प्रमाण-पत्र पेश किया। इसके बाद जांच में सामने आया कि यदि महिला विवाहित भी है, तब भी उनकी जाति प्रमाण-पत्र पर पिता के बजाय पति का नाम होना गलत है। जाति प्रमाण-पत्र और पेन कार्ड पर पिता का ही नाम आता है। इस मामले में कांग्रेस प्रत्याशी कुंदन मालवीय ने चुनाव आयोग को शिकायत भी की थी। जनवरी 2024 में जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। इसमें चुनाव को शून्य करने की मांग की गई है।

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