रत्नागिरि तिराहे से आसाराम तिराहे तक 16 किमी लंबे अयोध्या बायपास के चौड़ीकरण के लिए एनजीटी से 7,871 पेड़ काटने की अनुमति मिलते ही कटाई शुरू हो गई है। पेड़ों की संख्या के लिहाज से यह पिछले 10 साल में शहर की हरियाली पर सबसे बड़ा वार माना जा रहा है। तुलना करें तो 342 एकड़ की स्मार्ट सिटी परियोजना में 5,000 पेड़ काटे जाने का अनुमान है, जिनमें से 3,000 काटे जा चुके हैं। लगभग 14.4 किलोमीटर लंबे कोलार रोड चौड़ीकरण के लिए 4,105 पेड़ काटे गए, जबकि मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए 2,000 से अधिक पेड़ काटने की अनुमति ली गई है, जिनमें से लगभग आधे काटे जा चुके हैं। पिछले 10 साल का रिकॉर्ड देखें तो नगर निगम द्वारा दी गई अनुमतियों के अलावा एनजीटी में अलग-अलग संस्थाओं द्वारा दी गई रिपोर्ट और भोपाल की हरियाली पर किए गए अध्ययनों के आधार पर हिसाब लगाया जाए तो भोपाल में 47,500 से अधिक पेड़ काटे जा चुके हैं। इसमें 30 सेमी से कम गोलाई वाले पौधे और बिना अनुमति के काट दिए जाने वाले पेड़ों आदि शामिल हैं। मैदान कम… ग्राउंड वॉटर रीचार्ज बंद कोलार, कटारा हिल्स और चूना भट्टी के पहाड़ी हिस्सों में उगने वाली झाड़ियां और घास के मैदान बारिश के पानी को रोककर जमीन के अंदर भेजते थे। इन्हें बुलडोजर से साफ कर कंक्रीट की परत बिछा दी गई। इससे ग्राउंड वॉटर रीचार्ज प्रभावित हुआ है। विशेषज्ञों के मुताबिक कंक्रीट बढ़ने से इन इलाकों में गर्मी और भूजल संकट बढ़ने का खतरा बढ़ रहा है। तितलियां और पक्षी भी अब कम नजर आते हैं। असर: शहर का तापमान 1 डिग्री तक बढ़ा, बढ़ रहे हीट पॉकेट्स
“इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (IISER) भोपाल के अर्थ एंड एनवायरनमेंटल साइंसेज विभाग की रिपोर्ट के अनुसार कंक्रीटीकरण और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के कारण शहर के भीतर कई ‘हीट पॉकेट्स’ एमपी नगर, गोविंदपुरा, होशंगाबाद रोड और कोलार बन गए हैं। पिछले 10 सालों में गर्मियों के महीनों यानी अप्रैल-मई का औसत अधिकतम तापमान 0.8 से 1.0 डिग्री तक बढ़ा है।
