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एमपी में वसूलीबाज अफसरों पर मेहरबान ‘सरकार’:परिवहन चेक पॉइंट के अफसर-कॉन्स्टेबल सस्पेंड नहीं हुए, उनका तबादला किया; भास्कर के कैमरे में हुए थे कैद

एमपी में सरकारी अफसर रिश्वत और वसूली की डील करते हुए कैमरे में कैद हो जाएं, लेकिन सरकार को इससे फर्क नहीं पड़ता। इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती। भास्कर ने मप्र के परिवहन चेक पॉइंट्स पर तैनात कर्मचारियों और अफसरों से अवैध वसूली की डील की थी। इन्हें सस्पेंड करने के बजाय परिवहन विभाग ने केवल अटैच्ड किया, जबकि ये 20 से 60 हजार की डील करते हुए कैमरे में कैद हुए थे। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की थी। एसोसिएशन ने लिखा था कि इससे सरकार और प्रदेश की छवि धूमिल हो रही है। राजस्थान का ट्रांसपोर्टर बनकर किया था स्टिंग ऑपरेशन भास्कर ने राजस्थान का ट्रांसपोर्टर बनकर प्रदेश के चार चेक पॉइंट्स खिलचीपुर, मुलताई, नीमच और सेंधवा से गाड़ियां निकालने के लिए स्टाफ से डील की थी। खिलचीपुर चेक पाइंट पर कॉन्स्टेबल आर पी सिंह हनोतिया और अमित झरवड़े ने 15 गाड़ियों के लिए 60 हजार की डील की थी। नीमच चेक पॉइंट पर आरटीओ पीएस भिलाला ने 10 गाड़ियों के लिए 20 हजार की डील की थी। तीनों का परिवहन विभाग ने ट्रांसफर कर दिया है। मंत्री की मंजूरी के बाद हुआ भिलाला का ट्रांसफर मंदसौर आरटीओ पीएस भिलाला के एक्सपोज होने के बाद परिवहन आयुक्त उमेश जोगा ने तत्काल कार्रवाई नहीं की। आरटीओ अधिकारी राजपत्रित होता है, इसलिए कार्रवाई के लिए सरकार की सिफारिश जरूरी होती है। भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन के बाद विभाग ने कार्रवाई के लिए मंत्री को पत्र भेजा। 17 अप्रैल को मंत्री ने अनुमोदन किया। इसके बाद 18 अप्रैल को पीएस भिलाला को जबलपुर डिप्टी ट्रांसपोर्ट अधिकारी कार्यालय में पदस्थ करने का आदेश जारी हुआ। उनके पास मंदसौर के साथ नीमच चेक पॉइंट का प्रभार भी था। स्टिंग ऑपरेशन में भिलाला ने कहा था कि उज्जैन से सेंधवा तक उनका सिक्का चलता है। उन्होंने भरोसा दिया था कि कहीं कोई तकलीफ नहीं आएगी। खिलचीपुर पॉइंट के दोनों कॉन्स्टेबल को हटाया राजगढ़ जिले के खिलचीपुर चेक पॉइंट पर तैनात आरक्षक आरपी सिंह हनोतिया और अमित झरवड़े डील करते हुए खुफिया कैमरे में कैद हुए थे। परिवहन आयुक्त ने दोनों को तत्काल हटाकर ग्वालियर परिवहन कार्यालय में अटैच किया है। परिवहन विभाग के आदेश में दैनिक भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन का प्रमुखता से जिक्र किया गया है। शिवपुरी चेक पॉइंट के एसआई और आरक्षक पर भी एक्शन शिवपुरी चेकिंग पॉइंट की घटना का वीडियो वायरल होने के बाद परिवहन विभाग ने शैलेंद्र राजपूत को ग्वालियर परिवहन आयुक्त कार्यालय में आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से अटैच किया है। शिवपुरी चेक पोस्ट पर पदस्थ परिवहन उप निरीक्षक सुमन दीक्षित को भी ग्वालियर परिवहन कार्यालय अटैच किया गया है। सिकंदरा बैरियर पर परिवहन अमले ने यात्री बस रोककर एंट्री फीस मांगी थी। ड्राइवर के इनकार पर उसके साथ मारपीट की गई और बस में सवार महिलाओं व बच्चों से बदसलूकी की गई थी। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने सीएम को लिखा पत्र दैनिक भास्कर के खुलासे के बाद ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा। इसमें कहा गया कि चेक पॉइंट्स में वसूली से मप्र की छवि धूमिल हो रही है और इसे तुरंत बंद किया जाए। एसोसिएशन ने भास्कर की खबर का जिक्र करते हुए कहा कि परिवहन नियमों में अवैध वसूली या जबरन कार्रवाई का प्रावधान नहीं है। यह स्थिति चेकिंग पॉइंट्स की कार्यप्रणाली की निगरानी न होने से पैदा हुई। 1 जुलाई 2024 को चेक पोस्ट बंद करने का मकसद भ्रष्टाचार पर रोक लगाना था, लेकिन चेकिंग पॉइंट्स मूल मकसद से भटक गए। एसोसिएशन ने सुशासन के लिए 6 सुझाव भी दिए। चेक पॉइंट से सालाना 1700 करोड़ की वसूली चेक पॉइंट 1 जुलाई 2024 से शुरू हुए थे। एक साल 9 महीने में यहां से 3 हजार करोड़ से ज्यादा की वसूली हो चुकी है। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के मुताबिक एमपी से रोजाना 70 हजार ट्रक गुजरते हैं। चेक पॉइंट्स पर एक ट्रक से 700 रुपए वसूले जाते हैं। इससे एक दिन में 4 करोड़ से ज्यादा की कमाई होती है। महीने में यह आंकड़ा 147 करोड़ रुपए होता है। इस तरह एक साल में चेक पॉइंट्स से 1764 करोड़ रुपए की वसूली होती है। यह मप्र सरकार के 27 विभागों के सालाना बजट से ज्यादा है। परिवहन विभाग का बजट 230 करोड़ रुपए है, जबकि इसी विभाग के चेक पॉइंट्स से सात गुना ज्यादा वसूली हो रही है। 15 अप्रैल को दैनिक भास्कर एप पर ये खबर पब्लिश हुई थीं…. MP के चेक पॉइंट पर वसूली का ‘फूल प्रूफ’ सिस्टम: हर साल 1700 करोड़ की कमाई, ये सरकार के 27 विभागों के बजट से ज्यादा मध्य प्रदेश सरकार ने 1 जुलाई 2024 को 47 परिवहन चेकपोस्ट बंद किए थे, दावा था कि इससे भ्रष्टाचार रुकेगा। लेकिन भास्कर की एक महीने की पड़ताल में यह दावा गलत साबित हुआ। अब उनकी जगह 45 ‘चेक पॉइंट्स’ पर पहले से अधिक संगठित तरीके से वसूली हो रही है। पढ़ें पूरी खबर…

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