इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों को लेकर सरकार पैरेंट कंपनी Meta को समन भेजेगी। मंत्रालय Meta से पूछेगा कि इंस्टाग्राम पर ऐसे विज्ञापन कैसे प्रसारित हुए और उन्हें रोकने के लिए प्लेटफॉर्म की ओर से क्या कदम उठाए गए। साथ ही यह भी पूछा जाएगा कि बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों को रोकने के लिए कंपनी की क्या नीतियां और व्यवस्था हैं। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी तरह की आपत्तिजनक या अवैध सामग्री को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। BBC की रिपोर्ट- Meta सस्ता कंटेंट बेच रहा था भास्कर नॉलेज: भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का बनाना, रखना अपराध सवाल: भारत में बच्चों के यौन शोषण (CSAM) से जुड़ी सामग्री पर क्या कानून है?
जवाब: बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बनाना, रखना, देखना, शेयर करना, बेचना या प्रसारित करना अपराध है। सवाल: इस पर कौन-कौन से कानून लागू होते हैं?
जवाब: POCSO Act- बच्चों के यौन शोषण और उससे जुड़ी सामग्री पर कार्रवाई का प्रमुख कानून। इंफार्मेंशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2000 की धारा 67बी के तहत – ऑनलाइन बच्चों के अश्लील/यौन शोषण संबंधी सामग्री प्रकाशित, प्रसारित, डाउनलोड या ब्राउज करने पर सजा का प्रावधान। सवाल: IT Act की धारा 67B में क्या सजा है?
जवाब: पहली बार दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपए तक जुर्माना। दोबारा अपराध करने पर 7 साल तक की जेल और जुर्माना। सवाल: सोशल मीडिया कंपनियों की क्या जिम्मेदारी है?
जवाब: भारत के आईटी, 2021 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अवैध कंटेंट हटाने के लिए त्वरित कार्रवाई करनी होती है। जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना होता है। बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट की पहचान और रोकथाम के लिए उचित तकनीकी उपाय करने होते हैं। सवाल: अगर कोई ऐसा कंटेंट दिखे तो क्या करें?
जवाब: उसे डाउनलोड, शेयर या फॉरवर्ड न करें। संबंधित प्लेटफॉर्म पर तुरंत रिपोर्ट करें। राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। जरूरत पड़ने पर स्थानीय पुलिस या साइबर सेल को सूचना दें। सवाल: सरकार इस मामले में क्या कर सकती है?
जवाब: सोशल मीडिया कंपनी से जवाब मांग सकती है। प्लेटफॉर्म से कंटेंट हटाने का निर्देश दे सकती है। जांच एजेंसियों के जरिए आपराधिक जांच शुरू कर सकती है। नियमों के उल्लंघन पर आईटी कानूनों के तहत कार्रवाई कर सकती है। सवाल: क्या सिर्फ प्लेटफॉर्म ही जिम्मेदार होता है?
जवाब: नहीं। ऐसे कंटेंट को अपलोड करने, खरीदने, बेचने, शेयर करने या जानबूझकर प्रसारित करने वाले व्यक्ति भी भारतीय कानून के तहत आपराधिक कार्रवाई के दायरे में आते हैं। 25 फरवरी: सरकार ने अश्लील कंटेंट दिखाने पर 5 OTT प्लेटफॉर्म को ब्लॉक किया था इससे पहले सरकार ने 5 ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म (OTT) को ब्लॉक किया था। इन प्लेटफॉर्म पर अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट दिखाया जा रहा था। जिन प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई हुई, उनमें मूडएक्सवीआईपी, कोयल प्लेप्रो, डिजी मूवीप्लेक्स, फील और जुगनू शामिल हैं।
