मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में 8 मई से समाप्त हो रही इंस्टाग्राम की एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सेवा को लेकर एक जनहित याचिका लगी है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इससे उपभोक्ता की निजता का हनन हो सकता है। हाईकोर्ट ने प्रारंभिक तर्क सुनने के बाद याचिकाकर्ता को डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड ऑफ इंडिया (डीपीबीआई) के समक्ष 7 दिन में अभ्यावेदन प्रस्तुत करने के दिए हैं। साथ ही बोर्ड को 15 दिन के अंदर इस पर सुनवाई पूरी कर आदेश पारित करने के लिए कहा है। आदेश की प्रति कोर्ट में भी प्रस्तुत की जाएगी। अगली सुनवाई 6 मई को होगी। याचिकाकर्ता एडवोकेट पार्थ शर्मा ने बताया कि इंस्टाग्राम ने अपने प्लेटफॉर्म से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सेवा समाप्त करने की सूचना जारी की है। ऐसा होने से यूजर्स के डेटा को प्लेटफॉर्म की कर्ताधर्ता कंपनी मेटा सहित अन्य भी देख सकेंगे। यह निजता को लेकर दिए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन होगा। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने किया विरोध केंद्र शासन की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने सीधे जनहित याचिका प्रस्तुत कर दी है, जबकि इसके लिए शासन ने नए अधिनियम के तहत व्यवस्था की है। याचिकाकर्ता के पास डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड ऑफ इंडिया के समक्ष अपना पक्ष रखने का अधिकार है। यह बोर्ड अधिनियम के तहत ऐसे मामलों में निर्णय लेने के लिए सक्षम है। एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन को ऐसे समझिए जब आप किसी को मैसेज भेजते हैं, तो वह सीधे सामने वाले तक नहीं जाता, पहले सर्वर पर जाता है। जबकि एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन होने पर मैसेज को एक खास कोड में बदल दिया जाता है। यह कोड सिर्फ सेंडर और रिसीवर के पास मौजूद की से ही खुल सकता है। बीच में कोई भी, यहां तक कि कंपनी भी मैसेज नहीं पढ़ सकती। इसे ऐसे समझें कि जैसे आपने दोस्त को ताला लगा बॉक्स भेजा, जिसकी चाबी सिर्फ आप दोनों के पास है। कुरियर बॉक्स ले जा सकता है, खोल नहीं सकता। 8 मई से होंगे ये बदलाव क्यों हटा रहे फीचर? मेटा के अनुसार बहुत कम लोग एन्क्रिप्टेड चैट इस्तेमाल कर रहे थे। प्राइवेट चैट के लिए वॉट्सएप पहले से उपलब्ध है। एक तर्क है कि इसमें अतिरिक्त तकनीकी लागत भी होती है। दूसरी ओर कई सरकारें लंबे समय से मांग कर रही हैं कि जरूरत पड़ने पर निजी चैट तक पहुंच मिलनी चाहिए। क्या करें यूजर्स?
