इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक 2 नवंबर से डेली कॉलेज में शुरू होगी। तीन दिन तक चलने वाली इस बैठक में संघ के अगले चरण की कार्ययोजना पर मंथन होगा। इसमें शताब्दी वर्ष के दौरान हुए कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ संगठन विस्तार, सामाजिक मुद्दों और भविष्य के अभियानों की दिशा तय की जाएगी। 2 से 4 नवंबर तक होने वाली बैठक में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और सभी छह सह सरकार्यवाह सहित देशभर के करीब 408 प्रमुख पदाधिकारी शामिल होंगे। संघ के 11 क्षेत्र और 46 प्रांतों से संघचालक, सह संघचालक, कार्यवाह, सह कार्यवाह, प्रचारक और सह प्रचारक भी मौजूद रहेंगे। बैठक को लेकर शनिवार को डेली कॉलेज में आयोजित पत्रकार वार्ता में अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने एजेंडे और शताब्दी वर्ष के दौरान हुए कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अंतिम दिन विभिन्न विषयों की विस्तृत जानकारी और आंकड़े साझा किए जाएंगे। 13 हजार से ज्यादा नई शाखाएं जुड़ीं सुनील आंबेकर ने बताया कि देशभर में संघ की दैनिक शाखाओं की संख्या बढ़कर 1 लाख 1 हजार 151 हो गई है। साप्ताहिक मिलन और मासिक मिलन को मिलाकर संघ का काम अब 1 लाख 10 हजार 849 स्थानों तक पहुंच गया है। पिछले साल अक्टूबर की तुलना में शताब्दी वर्ष के दौरान 13 हजार से अधिक नई दैनिक शाखाएं जुड़ी हैं। बैठक में कार्य विस्तार के लिए किए गए प्रयासों के परिणाम और अनुभवों की समीक्षा होगी। शाखाओं के साथ साप्ताहिक और मासिक मिलन की गतिविधियों को मजबूत करने पर भी चर्चा की जाएगी। 65 हजार से ज्यादा हिंदू सम्मेलन शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर में 65 हजार 660 हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया गया। आंबेकर ने बताया कि शहरों में बस्ती स्तर पर और ग्रामीण क्षेत्रों में आठ-दस गांवों को मिलाकर बनाए गए मंडल स्तर पर ये सम्मेलन हुए। कई जगह दो-तीन मंडलों को मिलाकर भी आयोजन किए गए। इन सम्मेलनों में कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा और समाज की ओर से समर्थन मिला। लोगों ने संघ की शाखाओं से जुड़ने की इच्छा जताई। सामाजिक संस्थाओं और संगठनों ने भी अपने कार्यक्रमों में स्वयंसेवकों के अनुभवों का सहयोग लेने की इच्छा व्यक्त की है। बैठक में इन सम्मेलनों से मिले अनुभवों और सामाजिक सहभागिता की समीक्षा होगी। महिलाओं और युवाओं की भागीदारी शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में महिलाओं की भी अच्छी भागीदारी रही। अब इस अनुभव के आधार पर महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने के लिए नए कार्यक्रमों और उपक्रमों पर विचार किया जाएगा। युवाओं को जोड़ने के लिए शहरों, गांवों और कॉलेज कैंपस में कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और अन्य युवाओं ने हिस्सा लिया। बैठक में इन प्रयासों को आगे बढ़ाने की योजनाओं पर चर्चा होगी। युवाओं को नशे से दूर रखने की तैयारी संघ की पिछली दो-तीन बैठकों में नशीली दवाओं के बढ़ते चलन पर चिंता जताई गई है। इस बार भी यह विषय एजेंडे में शामिल रहेगा। आंबेकर के अनुसार नशे की समस्या से निपटने के लिए सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर प्रयास जरूरी हैं। विशेष रूप से युवाओं को नशीली दवाओं से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान चलाने पर विचार होगा। इसके लिए सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं के माध्यम से काम करने की योजना बनाई जाएगी। पिछली समन्वय बैठक में संघ से प्रेरित विभिन्न संगठनों ने भी अपने क्षेत्रों में नशे के खिलाफ अभियान शुरू करने की जानकारी दी थी। पंच परिवर्तन के पांच विषयों पर अभियान शताब्दी वर्ष में संघ ने पंच परिवर्तन के पांच विषय समाज के सामने रखे थे। इनमें सामाजिक समरसता, पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली, कुटुंब प्रबोधन, स्व का भाव और नागरिक कर्तव्य शामिल हैं। इन विषयों को समाज तक पहुंचाने के लिए गृह संपर्क अभियान, सम्मेलन और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। अब बैठक में इन पांचों विषयों के आधार पर आगे की कार्ययोजना बनाई जाएगी। विभिन्न प्रांतों के पदाधिकारी अपने क्षेत्रों में हुए कार्यों और आगामी योजनाओं की जानकारी देंगे। सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर नए अभियान चलाने पर भी विचार होगा। समाज तक तथ्यात्मक जानकारी पहुंचाने पर जोर बैठक में सामाजिक और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर जन-जागरण को लेकर भी चर्चा होगी। संघ का प्रयास रहेगा कि समाज के सभी वर्गों तक तथ्यात्मक जानकारी सही परिप्रेक्ष्य में पहुंचे। इसके लिए उचित दृष्टिकोण पहुंचाने की जरूरत पर विचार किया जाएगा। अमेरिका-कनाडा प्रवास के अनुभव भी साझा होंगे बैठक में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के विदेश प्रवास और वहां मिले अनुभवों पर भी चर्चा होगी। शताब्दी वर्ष के संदर्भ में अगस्त और सितंबर में वे अमेरिका, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम गए थे। इस दौरान उन्होंने वहां के प्रमुख लोगों से संवाद किया और विभिन्न सम्मेलनों में विचार रखे। उन्होंने हिंदुत्व की सही अवधारणा और भारत की उस दृष्टि को सामने रखा, जिसमें दुनिया के सभी लोग एक साथ सुखपूर्वक रह सकते हैं। भारत की शक्ति बढ़ने का उद्देश्य दुनिया का कल्याण होना चाहिए, इस विचार को भी उन्होंने प्रमुखता से रखा। बोले- आंदोलन देशहित में होना चाहिए जेन-जी के आंदोलन से जुड़े सवाल पर आंबेकर ने कहा कि देश में कोई आवाज उठाता है तो संघ को पक्ष-विपक्ष के नजरिए से क्यों देखा जाता है। सभी लोगों को ध्यान रखना चाहिए कि आंदोलन देशहित में हो। सभी को इसमें सतर्क रहना चाहिए। संघ इसका ध्यान रखता है और आगे भी रखेगा।
