इंदौर के पलासिया थाना क्षेत्र में हुई डॉक्टर के घर लाखों की चोरी अब एक सुनियोजित गैंग की साजिश लग रही है। दिनदहाड़े हुई इस वारदात में बदमाशों ने पहले रेकी की, फिर सूने फ्लैट को टारगेट कर कुछ ही मिनटों में पूरा घर खंगाल दिया। पूरी घटना CCTV में कैद है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस अभी तक आरोपियों की पहचान नहीं कर पाई है। पुलिस जांच में सामने आया है कि बदमाशों को पहले से पता था कि फ्लैट में कोई मौजूद नहीं है। 25 फरवरी की दोपहर आश्रय अपार्टमेंट, मनोरमागंज स्थित फ्लैट नंबर 205 का ताला तोड़कर तीन आरोपी अंदर घुसे और सीधे अलमारी व कीमती सामान तक पहुंचे। इससे साफ है कि उन्हें घर की संरचना और सामान की लोकेशन की जानकारी थी। बदमाश अपने साथ आईफोन, सोने की चेन, झुमके, इयररिंग, ब्रेसलेट, लटकन, मोती का सेट, चूड़ियां, लक्ष्मीजी की सोने की मूर्ति और नगदी समेत लाखों का माल लेकर फरार हो गए। वारदात इतनी तेजी से की गई कि आसपास के लोगों को भनक तक नहीं लगी। मोबाइल में कैद हुए तीनों चेहरे पीड़ित के पति डॉ. रंजन मुखर्जी ने घर के CCTV कैमरे मोबाइल से कनेक्ट कर रखे थे। जब फुटेज देखा गया तो फ्लैट के बाहर और अंदर तीन संदिग्ध साफ नजर आए। ये फुटेज पुलिस को सौंप दिए गए हैं। जांच के दौरान पुलिस टीम संदिग्धों की तलाश में बांक टाडा तक पहुंची। माना जा रहा था कि फुटेज के आधार पर पहचान हो सकती है, लेकिन वहां कोई ठोस जानकारी नहीं मिली और टीम को लौटना पड़ा। बाहर के प्रोफेशनल गैंग पर शक पुलिस सूत्रों के मुताबिक, चोरी का तरीका प्रोफेशनल गैंग की ओर इशारा कर रहा है। आशंका है कि इसमें महाराष्ट्र या खरगोन के सक्रिय गिरोह शामिल हो सकते हैं, जो पहले भी इसी तरह की वारदातों को अंजाम दे चुके हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि CCTV में चेहरे साफ दिखने के बावजूद पुलिस फुटेज सार्वजनिक क्यों नहीं कर रही। अधिकारियों का कहना है कि पहले आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी जरूरी है, ताकि वे सतर्क होकर फरार न हो जाएं।
