इंदौर नगर निगम ने शनिवार को शहर में पर्यावरण संरक्षण, जल बचाव और आग से सुरक्षा को लेकर एक साथ बड़ी कार्रवाई की। निगम ने जहां अवैध रूप से पेड़ काटने पर एक व्यक्ति पर एक लाख रुपए का स्पॉट फाइन लगाया, वहीं रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाने वाले 69 भवन मालिकों पर करीब 1.96 लाख रुपए का जुर्माना किया। इसके अलावा फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं करने पर अब तक 102 भवनों को सील किया जा चुका है। निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई। बंद फैक्ट्री में पेड़ कटते मिले, एक लाख का जुर्माना नगर निगम की टीम को सूचना मिली थी कि जोन क्रमांक 18 के वार्ड 64 में चितावद रोड स्थित एक बंद फैक्ट्री परिसर में अवैध रूप से पेड़ काटे जा रहे हैं। सूचना मिलते ही निगम की टीम मौके पर पहुंची और जांच की। वहां पेड़ काटने में इस्तेमाल हो रहे औजार और सामान जब्त कर लिए गए। इस मामले में राघव गोयल पर निगम ने एक लाख रुपए का स्पॉट फाइन लगाया। निगम ने साफ किया है कि शहर में हरियाली को नुकसान पहुंचाने वालों पर आगे भी सख्त कार्रवाई होगी। 69 भवनों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग नहीं, लगा जुर्माना जल बचाने और भूजल स्तर बढ़ाने के लिए निगम ने रेन वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर भी सख्ती दिखाई है। अपर आयुक्त प्रखर सिंह ने बताया कि जिन भवन मालिकों को पहले नोटिस दिए गए थे और फिर भी उन्होंने रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाया, उन पर कार्रवाई की गई। कुल 69 भवनों पर 1 लाख 96 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। निगम ने सभी भवन मालिकों को जल्द सिस्टम लगाने के निर्देश दिए हैं। फायर सेफ्टी में लापरवाही पर 102 भवन सील गर्मी के मौसम में आगजनी की घटनाओं को देखते हुए नगर निगम की फायर टीम और भवन शाखा लगातार जांच कर रही है। जांच में कई इमारतों में फायर सेफ्टी के जरूरी इंतजाम नहीं मिले। ऐसे में अब तक कुल 102 भवन सील किए जा चुके हैं। शनिवार को जोन क्रमांक 10 में कार्रवाई करते हुए एसके जिम, नफीस रेस्टोरेंट, रोबोटवाला कोचिंग, एआई एंड रोबोटिक्स कोचिंग, ज्ञानम कोचिंग, अपोलो आर्केड और अपोलो एवेन्यू को सील किया गया। 29 भवनों में शुरू कराया फायर सेफ्टी का काम निगम ने 29 ऐसे भवनों की भी पहचान की है, जहां फायर सेफ्टी के काम शुरू कराए गए हैं। इनमें होटल, रेस्टोरेंट, हॉस्पिटल और कोचिंग संस्थान शामिल हैं। निगम ने सभी भवन संचालकों से कहा है कि आग बुझाने के यंत्र, अलार्म सिस्टम और इमरजेंसी निकास जैसी व्यवस्थाएं दुरुस्त रखें, ताकि किसी हादसे में जान-माल का नुकसान रोका जा सके।
