रेल लाइन के लिए चोरल से बड़वाह तक करीब ढाई लाख पेड़ों की कटाई की जाना है। इंदौर की शुद्ध हवा के लिए चोरल रेंज का एक-एक पेड़ कीमती है। इसके बावजूद यहां जंगलों में तीन बीट में घावटी (निशान) लगाकर पेड़ों की अवैध कटाई की जा रही है। हाल ही में उमठ, बेका, रसकुंडिया, नयापुरा में अवैध कटाई के प्रमाण मिले हैं। दरअसल, गर्मी में जंगल सूख गए हैं, इसका फायदा उठाकर कटाई की जा रही है। सिमरोल से चोरल के बीच 20 से अधिक छोटे-बड़े ढाबे संचालित हो रहे हैं। कमर्शियल गैस की किल्लत होने से ढाबे वाले जंगल की लकड़ी का उपयोग कर रहे है। हर ढाबे में लकड़ियों का ढेर लगा है। अब तक वन विभाग ने किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। जिन बीटों में अवैध कटाई हो रही है, वहां अकसर तेंदुओं की मूवमेंट होती है। शाम होते ही चिकारा, नीलगाय, जंगली खरगोश जैसे कई जानवर घूमते दिख जाते हैं। ऐसे में जंगल कटने से वन्यजीवन भी प्रभावित होता है। 500 से अधिक पेड़ इन बीटों में हाल ही में काटे जा चुके हैं। डीएफओ लाल सुधाकर सिंह का कहना है कि जिन बीटों में जंगल कटा है, उनकी जांच कराई जाएगी। नुकसानी होने पर बीट गार्ड, रेंजर पर कार्रवाई की जाएगी। वनरक्षक, वनपाल स्पेशल ड्यूटी के नाम पर अटैच चोरल बीट को दो हिस्सों में बांटने की योजना भी बनी थी। इंदौर में वनरक्षक, वनपाल, डिप्टी रेंजर स्पेशल ड्यूटी के नाम पर अटैच हैं। एक दो नहीं, बल्कि पांच-छह सालों से स्पेशल ड्यूटी कर रहे हैं, जबकि इन्हें चोरल भेजा जा सकता है। डीएफओ का कहना है कि ट्रांसफर नीति लागू होने के बाद चोरल में तैनाती और बढ़ाई जाएगी। नवरतन बाग स्थित मुख्यालय में ही एक दर्जन से अधिक वन रक्षक बाबू बनकर बैठे हैं। वनरक्षक से वनपाल का प्रमोशन भी ले लिया। जंगल ड्यूटी के लिए भर्ती हुए थे, लेकिन ट्रेनिंग के बाद कभी जंगल ड्यूटी ही नहीं की।
