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TMC ने राज्यसभा के लिए 4 कैंडिडेट का ऐलान किया:इनमें सुप्रीम कोर्ट के वकील मेनका गुरुस्वामी का नाम; जीते तो पहले LGBTQ सांसद होंगे

तृणमूल कांग्रेस ने शुक्रवार शाम को राज्यसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया। इनमें मंत्री बाबुल सुप्रियो, बंगाल के पूर्व DGP राजीव कुमार, सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी और एक्ट्रेस कोयल मल्लिक का नाम शामिल है। TMC ने X पर एक पोस्ट में लिखा- हम इन उम्मीदवारों को दिल से बधाई और शुभकामनाएं देते हैं। वे तृणमूल की मजबूती की विरासत और हर भारतीय के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए उसके पक्के वादे को बनाए रखेंगे। पश्चिम बंगाल समेत महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना से चुने गए 37 सदस्यों का टर्म अप्रैल महीने में खत्म हो जाएगा। इन खाली सीटों पर 16 मार्च को वोटिंग होगी। बंगाल से 2026 में राज्यसभा की पांच सीटें खाली हो रही हैं। इनमें से चार TMC के पास थीं। 294 सदस्यों वाली विधानसभा में मजबूत संख्या के साथ TMC पांच में से चार राज्यसभा सीटें जीतने वाली है, जबकि विपक्षी BJP को एक सीट मिलने की उम्मीद है। TMC ने जिस सीनियर एडवोकेट मेनका अपना उम्मीदवार बनाया है, वे LGBTQ से हैं। अगर वे जीत जाते हैं तो संसद के इतिहास में पहला मौका होगा, जब कोई LGBTQ सदस्य सांसद बनेगा। 10 राज्यों में राज्यसभा चुनाव का शेड्यूल इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) ने बुधवार को चुनाव प्रोसेस शुरू करने के लिए 26 फरवरी को नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। नॉमिनेशन की आखिरी तारीख 5 मार्च है। 6 मार्च को स्क्रूटनी होगी। उम्मीदवार 9 मार्च तक नॉमिनेशन वापस ले सकते हैं। वोटिंग 16 मार्च को होगी। वोटों की गिनती उसी दिन शाम 5 बजे होगी। चुनाव का प्रोसेस 20 मार्च तक पूरा हो जाएगा। जानिए TMC के उम्मीदवारों के बारे में … जानिए मेनका के बारे में… 50 साल की मेनका ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, हार्वर्ड लॉ स्कूल और नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया से पढ़ाई की है। वे कॉमन लॉ, संवैधानिक कानून, कॉर्पोरेट और सफेदपोश अपराध (White-Collar) के क्षेत्र में विशेषज्ञ हैं। मेनका और उनकी पार्टनर अरुंधति काटजू दोनों ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि वे एक कपल हैं। यह कदम LGBTQ समुदाय के लिए एक बड़ा संदेश रहा। 2019 में TIME मैगज़ीन ने इन्हें दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में भी शामिल किया था, उनके LGBTQ अधिकारों के काम और प्रभाव के लिए। गुरुस्वामी ने सेक्शन 377 के खिलाफ लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटाते हुए संविधान के तहत मौलिक अधिकारों के तौर पर मान्यता दी थी। उन्होंने यह कहा था कि संविधान को सिर्फ यौन कृत्यों तक नहीं बल्कि प्रेम और समान अधिकारों तक भी मान्यता देनी चाहिए।

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