वैलेंटाइन डे नजदीक है। हर साल की तरह इस बार भी बजरंग दल की सक्रियता चर्चा में है। प्रेम, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, लव जिहाद, ओयो होटल और क्रिसमस जैसे मुद्दों पर संगठन का क्या रुख है? दैनिक भास्कर ने मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ बजरंग दल संयोजक विश्व वर्धन भट्ट से विस्तार से बातचीत की। सवाल: वैलेंटाइन डे आते ही बजरंग दल सक्रिय हो जाता है। इस बार इसे किस रूप में देख रहे हैं? जवाब: सामान्यता देखिए वैलेंटाइन डे बजरंग दल के लिए कोई बहुत बड़ा विषय नहीं है। परंतु यदि आप प्रश्न करते हैं तो पहले समझना पड़ेगा कि वैलेंटाइन डे कौन थे, क्या है और क्यों मनाने की आवश्यकता है। इटली में जन्मा हुआ कोई व्यक्ति, जिसने प्रेम विवाह किया, शासक को नागवार गुजरा, उसे कैद किया गया और 14 तारीख को मार दिया गया। अब वह कौन था? क्या हमारा कोई व्यक्ति था? क्या हमारे देश का नागरिक था? अनावश्यक रूप से प्रोपोगेंडा करके बाजारीकरण को बढ़ावा देने और अर्थव्यवस्था की जड़ पर प्रहार करने के लिए युवाओं को इस ओर धकेला जाता है। यदि किसी दिवस को स्मरण करना है तो 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में 40 जवान बलिदान हुए थे, उनका स्मरण करना चाहिए, न कि वैलेंटाइन डे मनाना चाहिए। सवाल: क्रिसमस हो या वैलेंटाइन वीक इनसे दिक्कत क्या है? क्या प्रेम भारतीय संस्कृति के खिलाफ है? जवाब: प्रेम से कोई आपत्ति नहीं है। पति पत्नी का प्रेम होता है और भारतीय संस्कृति में प्रेम के लिए बड़े-बड़े युद्ध लड़े गए। राम और सीता का उदाहरण सबको पता है। मीराबाई ने प्रेम के माध्यम से प्रभु कृष्ण से आत्मा-परमात्मा का मिलन प्राप्त किया। रामसेतु का निर्माण भी प्रेम की शक्ति से हुआ। हम प्रेम का विरोध नहीं करते। प्रेम के नाम पर जो प्रोपोगेंडा रचा जाता है, उसका विरोध है। सवाल: एक निजी सवाल क्या आपने कभी प्यार किया है? जवाब: विश्व वर्धन भट्ट (हंसते हुए) अरे भैया, मेरी पत्नी है, बच्चे हैं… प्रेम की भावना हर व्यक्ति के जीवन में होती है। लेकिन प्रेम को केवल वैलेंटाइन डे के माध्यम से प्रचारित या प्रसारित किया जाए, ऐसा हम नहीं मानते। प्रेम त्याग, समर्पण और मर्यादा से जुड़ा विषय है। हमारी संस्कृति में प्रेम का बहुत ऊंचा स्थान है, उसे बाजारीकरण के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। सवाल: ओयो होटलों में बजरंग दल कार्यकर्ताओं द्वारा लोगों को पकड़ने की घटनाएं सामने आईं। इसे कितना सही मानते हैं? जवाब: देखिए, ओयो होटल्स के चैन में यदि लव जिहाद करने वाले लोग पाए जाएंगे तो उन्हें रोका भी जाएगा, टोका भी जाएगा और समय आने पर ठोका भी जाएगा। भोपाल किस प्रकार से लव जिहाद का अखाड़ा बनता जा रहा है, यह सब देख रहे हैं। सवाल यह है कि लव जिहाद केवल हिंदू बहन-बेटियों को ही क्यों टारगेट करता है? अब तो यह मेल फीमेल तक सीमित नहीं रहा, किन्नरों तक को कन्वर्ट करने के प्रयास किए जा रहे हैं। यदि ओयो की आड़ में यह सब पनपेगा तो बजरंग दल के राष्ट्रभक्त युवा उसे रोकेंगे। सवाल: क्रिसमस के दौरान हनुमान चालीसा पाठ और विरोध की घटनाएं सामने आईं। क्या संगठन को क्रिसमस से भी आपत्ति है? जवाब: क्रिसमस उनका व्यक्तिगत विषय है। वे अपना तीज-त्योहार मनाने के लिए स्वतंत्र हैं। परंतु क्रिसमस की आड़ में वनवासी, गिरवासी, अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों को सेवा के माध्यम से जोड़कर ब्रेनवॉश कर कन्वर्जन किया जाता है। उसे रोकने का काम बजरंग दल करता है। क्रिसमस को रोकना हमारा उद्देश्य नहीं है, कन्वर्जन को रोकना है। सवाल: सोशल मीडिया पर आरोप है कि बजरंग दल युवाओं के निजी जीवन में दखल देकर डर का माहौल बना रहा है? जवाब: मुझे तो ऐसा डर का माहौल कहीं दिखाई नहीं देता। जो लोग समाज की मर्यादा के खिलाफ काम करेंगे, उन्हें रोकना समाज का दायित्व है। बजरंग दल वही दायित्व निभा रहा है। सवाल: उत्तराखंड में मोहम्मद दीपक को लेकर माहौल बना हुआ है। लगातार बजरंग दल इस पर टिप्पणी कर रहा हैं। जवाब: “देखिए, ऐसा है कि जब क्रिया होती है तो उसकी प्रतिक्रिया भी होती है। है ना? और सबका अपना-अपना सोचने, समझने और काम करने का तरीका होता है। यदि आप एक पक्ष की बात सुनेंगे तो आपको वही पक्ष सही लगने लगता है, जब तक हम दूसरे पक्ष को समझने का प्रयास नहीं करते। किसी भी समय यह ध्यान रखना चाहिए कि हम बोल क्या रहे हैं और उसके पीछे हमारा उद्देश्य क्या है। यदि उद्देश्य विघटन करना है, समाज को तोड़ना है, तो फिर दीपक को जो सामना करना पड़ रहा है, उसे फेस करना पड़ेगा। सीधी सी बात है। 80 करोड़ से ज्यादा हिंदू बाहुल्य देश में यदि हिंदू मान्यताओं की बात करने वाले मुखर नहीं होंगे, तो फिर जो स्थिति बनी है, वह उसी का परिणाम है। यह उसके लिए भी एक प्रकार से सबक है कि क्या बोलना चाहिए और क्या नहीं बोलना चाहिए।” सवाल: लेकिन यह लंबा खिंच गया है। इसका अंत कब होगा? जवाब: अंत तो तब होगा जब विचारों की स्पष्टता होगी और सही मायने में अपने मन को ठीक किया जाएगा। बिना मन को ठीक किए यह सब संभव नहीं है।
