मध्यप्रदेश के रेल यात्रियों को 2026 के अंत तक एक बड़ी सौगात मिलने जा रही है। भोपाल-रामगंज मंडी नई रेल लाइन परियोजना तेजी से अंतिम चरण में पहुंच रही है, जिसके पूरा होने पर प्रदेश के कई हिल और दूरदराज इलाकों में पहली बार ट्रेन पहुंचेगी और राजस्थान से सीधा रेल संपर्क स्थापित होगा।हाल ही में कोटा मंडल के अंतर्गत खिलचीपुर-राजगढ़ सिटी (17.8 किमी) रेलखंड पर रेल संरक्षा आयुक्त द्वारा विस्तृत निरीक्षण किया गया। इस दौरान 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से सफल स्पीड ट्रायल भी किया गया। यह ट्रायल इस रूट पर जल्द यात्री सेवा शुरू होने का संकेत माना जा रहा है। कितना काम हुआ, कितना बाकी
करीब 276 किलोमीटर लंबी इस रेल परियोजना में अब तक 187 किलोमीटर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसमें शेष 89 किलोमीटर का कार्य मार्च 2026 तक वित्तीय वर्ष 2026-27 से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। पहली बार रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे कई स्टेशन
इस परियोजना के तहत मध्यप्रदेश के राजगढ़ और सीहोर जिले के कई स्टेशन पहली बार रेल नक्शे पर आएंगे। इनमें पिपलहेड़ा, सोनकच्छ, नरसिंहगढ़, जमुनियागंज, कुरावर, श्यामपुर, दुराहा, झारखेड़ा, मुगलियाहाट, आदि शामिल हैं। इन क्षेत्रों के लोग अब तक सड़क मार्ग पर निर्भर थे, लेकिन रेल सेवा शुरू होने के बाद भोपाल और राजस्थान के शहरों तक पहुंच आसान हो जाएगी।
दूरी 100 किमी घटेगी, समय में 2-3 घंटे की बचत
नई रेल लाइन शुरू होने के बाद भोपाल-कोटा के बीच करीब 100 किलोमीटर दूरी कम होगी और यात्रियों का 2 से 3 घंटे समय बचेगा।
राजगढ़ और सीहोर के कई इलाके पहाड़ी और ग्रामीण हैं, जहां रेल सुविधा नहीं थी। नई लाइन इन क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ेगी, जिससे रोजगार, व्यापार और शिक्षा के नए अवसर खुलेंगे।रेलवे अधिकारियों का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। पहली बार रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे कई स्टेशन यह रहेगा संभावित किराया स्लीपर कैटेगिरी का
भोपाल रेल मंडल के प्रवक्ता नवल अग्रवाल ने बताया कि- इस परियोजना के तहत मध्यप्रदेश के राजगढ़ और सीहोर जिले के कई स्टेशन पहली बार ट्रेन पहुंचेगी, इस दौरान 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से सफल स्पीड ट्रायल भी किया गया। 2026 तक वित्तीय वर्ष 2026-27 से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
