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MP में ‘वीआईपी कल्चर’ का अवैध बाजार:हूटर केवल कागजों में बैन, दुकानदार बोला- बोनट के अंदर लगा लो, पुलिस को पता नहीं चलेगा

केंद्र सरकार के आदेश के बाद मप्र में भी साल 2017 से ही गाड़ियों पर लगाए जाने वाले हूटर और सायरन पर प्रतिबंध है। केंद्र ने ये कदम वीआईपी कल्चर को खत्म करने के लिए उठाया था, मगर हकीकत ये है कि नियमों को तोड़कर न केवल गाड़ियों पर हूटर लगे हैं बल्कि धड़ल्ले से इनका इस्तेमाल भी हो रहा है। इसके अलावा प्रतिबंधित हूटर न केवल खुलेआम बिक रहे हैं, बल्कि दुकानदार खुद इन्हें पुलिस की नजरों से छिपाकर लगाने के तरीके भी सिखा रहे हैं। भास्कर टीम ने जब भोपाल के सबसे व्यस्ततम इलाकों में से एक, एमपी नगर में कार एसेसरीज की दुकानों का जायजा लिया, तो पाया कि वहां बिना किसी खौफ के हूटर की बिक्री और उसे लगाने की डील हो रही है। कोई दुकानदार गाड़ी की छत पर 15 वॉट का वीआईपी सायरन फिट करने का ऑफर दे रहा, तो कोई पुलिस के 5 हजार रुपए के चालान से बचाने के लिए बोनट के अंदर छोटा हूटर लगाने की सलाह दे रहा है। कोई तो ये कह रहा कि ‘ऊपर लगाओगे तो दिखेगा, अंदर लगवा लो… पुलिस को पता भी नहीं चलेगा।’ खास बात ये है कि प्रतिबंधित हूटर लगाने पर 5,000 रुपये तक के चालान का प्रावधान है । ट्रैफिक पुलिस समय समय पर कार्रवाई करने का दावा करती है, लेकिन हकीकत में ऐसा हो नहीं रहा। पढ़िए रिपोर्ट अब जानिए राजधानी में कैसे हो रहा है हूटर का सौदा
आखिर राजधानी भोपाल में प्रतिबंधित हूटर गाड़ियों पर कैसे लगाए जा रहे हैं? इसे उजागर करने के लिए भास्कर ने दो तरीकों से पड़ताल की। हमारे रिपोर्टर एक आम ग्राहक बनकर कार एसेसरीज की दुकानों पर पहुंचे और अपनी गाड़ी पर हूटर लगाने की डील की। 24 फरवरी को भास्कर रिपोर्टर एमपी नगर स्थित टिआ कार डेकोर पर पहुंचा। रिपोर्टर ने दुकान के कर्मचारियों से अपनी नई स्कॉर्पियो पर हूटर लगाने की बात की। कर्मचारी तुरंत तैयार हो गए और बताया, ‘लग जाएगा, 8 हजार 500 रुपए का खर्चा आएगा। ये गाड़ी के ऊपर लगेगा।’ जब रिपोर्टर ने हूटर दिखाने को कहा, तो कर्मचारी ने चालाकी से कहा, ‘आपको पीछे गली में रॉयल ग्रुप ऑफ इंजीनियरिंग एंड कंपनी (अहूजा शॉप) पर जाना होगा। वे आहूजा के सबसे बड़े सप्लायर हैं। हूटर वहां मिलेगा और हम यहां उसे गाड़ी पर फिट कर देंगे।’ रिपोर्टर बताए गए पते पर अहूजा स्टोर गया और वापस कार डेकोर शोरूम पहुंचा। कर्मचारी ने स्पष्ट किया, ‘हमारे पास हूटर रखने की परमिशन नहीं है, इसलिए हम सीधे ग्राहक को वहीं भेजते हैं। हम सिर्फ लगाने का काम करते हैं, जिसमें 1000 रु. की रॉड और 500 रु. लगाने का चार्ज शामिल है।’ यह कंपनी खुद को गवर्नमेंट और आर्मी का जनरल ऑर्डर सप्लायर बताती है। यहां रिपोर्टर की मुलाकात दुकान में बैठे सोनी जी से हुई। रिपोर्टर: गाड़ी पर हूटर लगाना है। सोनी: गाड़ी के ऊपर लगाना है या बोनट पर? रिपोर्टर: दोनों के रेट बता दीजिए। सोनी: बड़े वाले दो माइक सेट गाड़ी के ऊपर लगेंगे, इसका 7 हजार लगेगा। लगाने वाला मिस्त्री 2000-2500 रु. अलग से लेगा। इसमें दो तरह के सायरन बजेंगे- एक एंबुलेंस वाला और दूसरा वीआईपी वॉइस वाला। (इतना कहने के बाद सोनी जी ने दुकान में रखे माइक से दोनों तरह की आवाजें निकालकर रिपोर्टर को सुनाईं) रिपोर्टर: ऊपर लगाने में पुलिस के चालान का डर रहता है। सोनी: तो फिर आप बोनट के अंदर छोटा वाला 10 वॉट का माइक लगवा लो। उसका खर्चा भी कम आएगा। एक छोटा हूटर 4 हजार में लग जाएगा। मिस्त्री भी 500 रु. ही लेगा। बोनट के अंदर लगेगा तो पुलिस को दिखेगा भी नहीं। स्टीयरिंग के पास एक बटन लग जाएगा, जब जरूरत हो तब चला लेना। सोनी जी ने रिपोर्टर को अपना विजिटिंग कार्ड दिया और कहा कि कभी भी आकर लगवा लो। यह बातचीत इस बात का पुख्ता सबूत थी कि इस दुकान पर बिना किसी डर के प्रतिबंधित हूटर बेचे और लगाए जा रहे हैं। यहां रिपोर्टर की मुलाकात शॉप संचालक निखिल होटवानी से हुई। रिपोर्टर: गाड़ी पर हूटर लगवाने हैं। निखिल: पहले यह बताइए, हूटर गाड़ी के बाहर लगवाने हैं या बोनट के अंदर? अंदर एक माइक और मशीन के साथ 4500 रुपए लगेंगे। अगर दो सायरन वाले दो माइक लगवाने हैं तो 6000 रुपए लगेंगे। रिपोर्टर: और गाड़ी के ऊपर? निखिल: ऊपर दो बड़े माइक, मशीन और रॉड लगेगी। वायरिंग-फिटिंग मिलाकर 8500 रुपए लगेंगे। आप गाड़ी लेकर आ जाइए, हैंड-टू-हैंड काम हो जाएगा। जब माननीय ही तोड़ रहे कानून
हैरानी की बात यह है कि इस कानून का उल्लंघन करने वाले सिर्फ आम लोग नहीं हैं। मध्य प्रदेश विधानसभा सत्र के दौरान कई विधायकों और माननीयों की गाड़ियों में भी हूटर और सायरन लगे दिखाई दिए। हाल ही में राजगढ़ जिले से एक दिलचस्प मामला सामने आया था, जहां कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रियव्रत सिंह ने एसपी को ज्ञापन सौंपकर भाजपा नेताओं की गाड़ियों से हूटर हटाने की मांग की थी। उन्होंने पुलिस अफसरों को कुछ गाड़ियों की तस्वीरें भी सौंपी थीं। इसी दौरान एक जिला पंचायत सदस्य यशवंत गुर्जर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उनके गांव में एक नेता की गाड़ी में लगे हूटर की तेज आवाज से भैंसें भड़क जाती हैं और उन्होंने दूध देना बंद कर दिया है। यह टिप्पणी सुनकर एसपी समेत वहां मौजूद सभी लोग हंस पड़े। क्या कहता है कानून और क्या है पुलिस का पक्ष?
सीनियर एडवोकेट आर्यन उरमलिया बताते हैं, ‘मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 19 के तहत प्रेशर हॉर्न और हूटर पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। अगर कोई दुकानदार इसे बेचता है या सर्कुलेशन में लाता है, तो यह अपराध की श्रेणी में आता है। जिला प्रशासन उड़नदस्ता बनाकर ऐसे दुकानदारों पर सख्त कार्रवाई कर सकता है। पुलिस भी अवैध हूटर लगी गाड़ियों पर चालानी कार्रवाई कर सकती है और ऐसे दुकानदारों पर मुकदमा भी दर्ज कर सकती है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार इस प्रकार के प्रतिबंधित हूटर बेचने वालों पर कानूनी कार्रवाई करने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस और सरकार को निर्देशित भी किया है। पुलिस अफसर बोले- समय समय पर कार्रवाई करते हैं
इस संबंध में जब भास्कर ने भोपाल यातायात पुलिस के अतिरिक्त उपायुक्त बसंत कुमार कौल से बात की, तो उन्होंने बताया, ‘समय-समय पर परिवहन विभाग के निर्देशों के अनुसार यातायात पुलिस हूटर लगाकर चलने वाले वाहनों की चेकिंग करके चालान बनाती है। मोटर व्हीकल एक्ट में 3 हजार से लेकर अधिकतम 5 हजार रुपए तक के चालान का प्रावधान है।’ उन्होने बताया कि एम्बुलेंस,फायर बिग्रेड, आपातकालीन सेवा में चलने वाली गाड़ियां, परिवहन विभाग के अफसरों की गाड़ियां, कार्यपालिक मजिस्ट्रेट और पुलिस के वाहनों पर सायरन लगाने की अनुमति है। नगर निगम के अधिकारी और पुलिस मिलकर अतिक्रमण हटाने के दौरान सायरन का प्रयोग करते हैं। हालांकि, पुलिस का यह दावा भास्कर की पड़ताल के नतीजों से बिल्कुल मेल नहीं खाता। अगर कार्रवाई हो रही होती, तो दुकानदार इतने खुलेआम हूटर बेचने और लगाने की हिम्मत नहीं करते। यह साफ है कि कार्रवाई या तो हो नहीं रही, या फिर वह इतनी लचर है कि अपराधियों में कानून का कोई खौफ ही नहीं है।

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