सक्ती जिले के वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर ब्लास्ट में अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 16 का इलाज जारी है। शुरुआती जांच के दौरान मजदूरों-अफसरों बातचीत में यह सामने आया है कि ओवरलोडिंग और पाइप लीकेज से ब्लास्ट हुआ है। 600 मेगावाट क्षमता वाले प्लांट को उसकी सीमा से ज्यादा, करीब 650 मेगावाट तक चलाया जा रहा था। मजदूरों के मुताबिक ब्लास्ट के समय न सायरन बजा और न ही कोई अलर्ट जारी किया गया। हादसे के बाद अफरा-तफरी मच गई और डर के कारण प्लांट के पीछे लेबर क्वार्टर में रहने वाले 2000 से ज्यादा मजदूर घर लौट गए हैं। अब गिनती के करीब 50 मजदूर ही बचे हैं। भास्कर की टीम भी ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर मजदूरों से बातचीत की…पढ़िए ये ग्राउंड रिपोर्ट:-
पहले हादसे की ये तस्वीरें देखिए… ओवरलोडिंग बनी हादसे की बड़ी वजह हादसे के बाद औद्योगिक सुरक्षा विभाग के बॉयलर इंस्पेक्टर उज्ज्वल गुप्ता की टीम ने बुधवार को 6 घंटे जांच की। शुरुआती जांच में सामने आया कि उत्पादन बढ़ाने के लिए बॉयलर का लोड एक घंटे में तेजी से बढ़ाया गया, जिससे हादसा हुआ। झारखंड से काम करने आए फिटर इंदर देव राणा ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या इंजीनियरिंग स्तर की है। प्लांट को उसकी क्षमता से ज्यादा लोड पर चलाया गया। पहले से ही गर्मी ज्यादा थी, ऐसे में ओवरलोड चलाने की जरूरत नहीं थी। ना सायरन बजा, ना एंबुलेंस पहुंची बंगाल से काम करने आए फिटर सुमित कोले ने बताया कि वे पिछले एक साल से प्लांट में काम कर रहे हैं। धमाके के बाद पूरा इलाका धूल और धुएं से भर गया, लेकिन इसके बावजूद प्लांट के अंदर कोई सायरन नहीं बजा और न ही कोई अलर्ट जारी हुआ। सिर्फ एक तेज धमाका हुआ और देखते ही देखते हादसा हो गया। उन्होंने बताया कि प्लांट में मौके पर एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं थी। घायलों को बसों में लादकर अस्पताल भेजना पड़ा और हालात बेहद खराब थे। 1 साल पहले टेस्टिंग के दौरान पाइप फटा था, गैस निकली थी… प्लांट में रिगर का काम करने वाले राम आश्रय सिंह ने बताया कि वे बिहार के गोपालगंज के रहने वाले हैं और ठेकेदार के जरिए यहां काम कर रहे हैं। वे 2024 से इस प्लांट में काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक, पिछले साल टेस्टिंग के दौरान एक बार पाइप फटने से गैस लीक हुई थी, लेकिन उस समय कंपनी ने पहले ही सूचना दे दी थी, जिससे कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। इस बार प्रोडक्शन के दौरान सब कुछ अचानक हुआ। लेबर की सुरक्षा की व्यवस्था नहीं मजदूरों का आरोप है कि हादसे के बाद लेबर क्वार्टर में कुछ स्थानीय लोग लाठी-डंडे लेकर पहुंचे और दरवाजे खटखटाकर प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दबाव बनाने लगे। उनका कहना है कि सुरक्षा के लिए वहां पुलिस या प्रशासन की कोई व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने बताया कि लेबर क्वार्टर में कभी-कभार ही इंचार्ज आता है और कोई ठोस सुरक्षा इंतजाम नहीं दिखता। बाहर से आए मजदूर खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, जिससे उनका डर और बढ़ गया है। रोजी-रोटी पर भी पड़ा असर मजदूरों का कहना है कि वे 25-30 हजार रुपये की मजदूरी के लिए दूर-दराज से यहां काम करने आते हैं। अब प्लांट बंद है और कोई व्यवस्था नहीं है, ऐसे में उनके सामने घर लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। करीब 50 लोग यहां रुके हैं। क्या हमें यहां रुकने पर सैलरी मिलेगी, इसका भी कोई जवाब नहीं दे रहा। हम भी घर लौटने की सोच रहे हैं। यहां रुक कर क्या करेंगे। अफसर बोले- लीकेज की वजह से ब्लास्ट नाम न बताने की शर्त पर प्लांट अधिकारियों ने बताया कि यह विस्फोट बॉयलर यूनिट में उत्पन्न उच्च दबाव वाली भाप को टर्बाइन तक ले जाने वाली पाइप में लीकेज के कारण हुआ। यही टर्बाइन घूमकर बिजली उत्पादन करती है। सिंहितराई में 1200 मेगावाट के कोयला आधारित थर्मल पावर प्रोजेक्ट (दो यूनिट, प्रत्येक 600 मेगावाट) का निर्माण 2009 में शुरू हुआ था। यह प्रोजेक्ट पहले एथेना छत्तीसगढ़ पावर लिमिटेड के पास था, लेकिन 2016 से 2022 के बीच इसका काम ठप रहा। बाद में 2022 में वेदांता लिमिटेड ने प्लांट का अधिग्रहण किया। इसके बाद एक 600 मेगावाट यूनिट को पिछले साल अगस्त में चालू किया गया, जबकि दूसरी यूनिट का निर्माण अभी जारी है। यूनिट पहले भी कई बार मेंटेनेंस की वजह से बंद रही जानकारी के मुताबिक, यह यूनिट पहले भी कई बार मेंटेनेंस के कारण बंद रही है। हाल ही में 16 से 22 मार्च तक यहां काम बंद रखा गया था। इसके अलावा भी इस यूनिट में कई बार शटडाउन किया जा चुका है।
जाने वेदांता प्लांट के बारे में वेदांता का यह पावर प्लांट कुल 1200 मेगावाट क्षमता का है, जिसमें 600-600 मेगावाट की दो यूनिट शामिल हैं। कंपनी ने इसे साल 2022 में NCLT प्रक्रिया के तहत अधिग्रहित किया था, इससे पहले यह प्लांट एथीना कंपनी के पास था। अधिग्रहण के बाद प्लांट के निर्माण और विकास का काम शुरू किया गया, जिसके तहत पहली यूनिट(600 mw) जुलाई 2025 से ऑपरेशन में आकर बिजली उत्पादन शुरू कर चुकी है। जबकि दूसरी यूनिट का काम अभी जारी है और इसके दिसंबर 2026 या जनवरी 2027 तक चालू होने की संभावना जताई जा रही है। यह एक कोयला आधारित थर्मल पावर प्रोजेक्ट है, जिसे बड़े स्तर पर बिजली उत्पादन के लिए विकसित किया जा रहा है। हादसे से जुड़ी ये तस्वीरें भी देखिए… …………………………. प्लांट हादसे से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… वेदांता ब्लास्ट हादसा…1 घंटे में दोगुना किया प्रोडक्शन:लॉगबुक में खराबी का जिक्र, चेतावनी के बावजूद नहीं रोका काम,इसलिए फटा बॉयलर, अब तक 20 मौतें
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के वेदांता पावर प्लांट में मंगलवार (14 अप्रैल) दोपहर हुए बॉयलर ब्लास्ट की शुरुआती जांच रिपोर्ट में गंभीर लापरवाही सामने आई है। इस हादसे में 20 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 16 लोग घायल हैं। जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। पढ़ें पूरी खबर
